एक्सप्रेस-वे बनने के बाद ड्रोन से मार्केट तक जाएंगे उत्पाद

वर्ष 2030 तक भारत को एक वैश्विक ड्रोन हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस लक्ष्य को प्राप्त करने में उद्योग, सर्विस डिलिवरी और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है। एक्सप्रेस-वे के हेलीपैड से ड्रोन उड़ सकेंगे। इससे विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 17 Sep 2021, 11:09 AM IST

कोटा. दिल्ली-मुंबई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने के बाद एेसे केन्द्र भी बनेंगे जहां से ड्रोन के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को दिल्ली या अन्य स्थानों पर भेजा जा सकेगा। २०० किलो तक सामग्री ड्रोन से भेजी जा सकेगी। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को सवाई माधोपुर-बूंदी में एक्सप्रेस-वे के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों को उदाहरण देकर बताया कि जैसे सवाई माधोपुर के अमरूद की मांग हर जगह है तो ड्रोन से दिल्ली तक अमरूद भेज सकेंगे। आगे एेसा समय भी आएगा जब ड्रोन में व्यक्ति भी सफर कर सकेंगे। एक्सप्रेस-वे के पास बनने वाले हेलीपैड से ड्रोन उड़ सकेंगे। मंत्री गडकरी के दौरे से एक दिन पहले १५ सितम्बर को आत्मनिर्भर भारत के सामूहिक दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ड्रोन और इससे जुड़े उत्पादों के लिए उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी।

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पीएलआई योजना के तहत 120 करोड़ रुपए अगले 3 साल में दिए जाएंगे। तीन साल की अवधि में निर्माण क्षेत्र में ड्रोन के लिए 5000 करोड़ रुपए का अनुमानित निवेश किया जाएगा जो बदले में 900 करोड़ रुपए का कारोबार लाएगा और 10 हजार रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वर्ष 2030 तक भारत को एक वैश्विक ड्रोन हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस लक्ष्य को प्राप्त करने में उद्योग, सर्विस डिलिवरी और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है।

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