Ramadan Special: सिर्फ ख्वाहिश क्यो, फर्ज है बड़ा...जीवन की सांझ में रख रहे हैं रमजान, उम्र नहीं बाधा

Suraksha Rajora

Publish: May, 21 2019 05:44:47 PM (IST) | Updated: May, 21 2019 06:14:08 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. वहां मुझसे मेरे जीवन के सवाल जवाब किए जाएंगे। मैंने क्या किया,
कैसे किया, किसका भला किया, किसका बुरा किया, जैसे कई साल पूछे जाएंगे। रमजान नहीं रखूंगी तो ऊपर वाले को क्या जवाब दूंगी, कैसे मुंह दिखाऊंगी। कुछ इसी तरह के विचार रखती है, 70 की आयु पार जम्मो।

 

बात सिर्फ एक जम्मो की नहीं। जम्मो की तरह और भी कई हैं जो जीवन की
सांझ में पूरी शिद्दत के साथ रमजान रख युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
खास बात तो यह है कि इनमें भी युवा वर्ग की तरह से ही रमजान को लेकर
उत्साह है।

 

ताकत वही देता है

जंगली शाह बाबा दरगाह परिसर में एक कार्यक्रम के दौरान 74 वर्षीय जमीला
ने बताया कि रब की मर्जी से सब कुछ ठीक है, किसी ख्वाईश को लेकर रमजान
नहीं कर रही। वह बताती है कि खुदा को जवाब देना है, रमजान नहीं करेंगी तो
क्या जवाद देगी।

 

भट्टजी घाट क्षेत्र की रहने वाली जमीला बताती है कि दुनिया में न धन साथ जाता है न ही दौलत, हमने जो अच्छे कार्य किए उन्हीं का हिसाब होता है। इंसान को सिर्फ वहीं कार्य करने चाहिए जो खुदा का पसंद हों। जमीला उर्फ जम्मो बताती है कि वह छोटी आयु से ही रमजान कर रही है, वह मानती है कि रमजान करने की ताकत भी उपरवाला ही देता है।

 

हौश संभाला तब ही से रमजान

चन्द्रघटा क्षेत्र में स्थित सिपाहियों की मस्जिद मंे ९६ वर्षीय हाजी अब्दुल मजीद माला जब रहे थे। उन्होने बताया कि वह 15 वर्ष की आयु से रमजान रख रहे हैं। यह काफी सुकून देने वाला होता है। इससे सेहत में कोई कमी नहीं आती बल्कि इंसान चुस्त दुरुस्त रहता है। मजीद बताते हैं कि ईश्वर अल्लाह से हमेशा जुड़कर रहना चाहिए।

युवावस्था में रमजान रख लिए तोक्या, परीक्षा की घड़ी तो यही है। उन्हें रमजान के दौरान कभी कोई समस्या नहीं आई। मजीद बताते युवाओं को संदेश देते है कि माता पिता का हमेशा खयाल करो। मां के कदमों में ही जन्नत है। जो माता पिता की सेवा करते हैं, हमेशा खुशहाल रहते हैं।

 

फर्ज अदा नहीं किए तो क्या किया

छावनी क्षेत्र स्थित काली मस्जिद में इलियास मेवाती ने बताया कि अच्छे कार्यों में उम्र कभी बाधक नहीं बन सकती। इस्लाम में इंसान के पांच फर्ज बताए हैं, इनमें से रमजान एक है। फर्ज से इंसान को कभी दूर नहीं होना चाहिए। उम्र कितनीभी हो, इस जीवन को देने वाला ही ताकत देने वाला है। परिस्थिति कोई भी हो फर्ज से मत डिगो। ७५ वर्षीय इलियास बताते हैं कि युवाओं में आस्था कम नहीं हो रही बढ़ रही है।

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