सालो का रिकॉर्ड तोड़ कोटा मंडल ने की करोड़ो की वसूली

मंडल रेलवे के वाणिज्य विभाग ने बकाया वसूली के मामले में विगत छह सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

By: Dhitendra Kumar

Published: 25 Apr 2018, 05:00 PM IST

कोटा . मंडल रेलवे के वाणिज्य विभाग ने बकाया वसूली के मामले में विगत छह सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साल 2017-18 के प्रारम्भ में कोटा मंडल में 1 करोड़ 47 लाख रुपए बकाए थे। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 17 करोड़ 50 लाख रुपए नई बकाया राशि जनरेट हुई। इस प्रकार कुल 18 करोड़ 97 लाख बकाया खाते में हो गए।

कोटा मंडल ने इसमें से 17 करोड़ 55 लाख वसूल लिए। 31 मार्च 2018 को 1 करोड़ 42 लाख रुपए बकाया मद में बचे। इसमें से 1 करोड़ 28 लाख के प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। इस तरह नॉन कोर्ट मद में 14 लाख की ही वसूली बाकी है। बकाया वसूली के मामले में कोटा मंडल पश्चिम मध्य रेलवे में प्रथम पायदान पर आया है।

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बनाई रणनीति

सितम्बर 2017 में ज्वॉइन करने के बाद सीनियर डीसीएम विजय प्रकाश ने बकाया राशि वसूलने की ठोस रणनीति बनाई। एक्सप्रेस प्लान के लिए मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एस.के.दास और डीआरएम यूसी जोशी का मार्गदर्शन लिया। वाणिज्य निरीक्षक आरके मीणा एवं वरिष्ठ चल लेखा निरीक्षक घनश्याम रैना ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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कोटा जंक्शन उदासीनता से विलम्ब हो गई यात्रियों की राहत
5 साल पहले बना रिले रूम भवन
कोटा जंक्शन पर रूट रिले इंटरलॉकिंग प्रणाली के लिए रिले रूम भवन का निर्माण करीब पांच साल पहले ही हो गया, लेकिन सिग्नल एवं टेलीकॉम निर्माण विभाग की लेटलतीफी के कारण इसका उपयोग नहीं हो पाया है। इंटरलॉकिंग प्रणाली शुरू होने से पहले ही यह भवन पुराना लगने लगा है, इसका रंग उतर चुका है। वर्ष 2013 में मौजूदा प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार हुई थी, योजना बनने के पांच साल बाद भी सिग्नल एवं टेलीकॉम निर्माण विभाग कार्य पूरा कराने में विफल रहा।

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टेण्डर प्रक्रिया काफी में समय लगा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि इस कार्य में इंजीनियरिंग, ऑपरेटिंग, सेफ्टी सहित कई विभागों के सहयोग की आवश्यकता है, लेकिन सिग्नल एवं टेलीकॉम निर्माण विभाग की ओर से समन्वय नहीं होने के कारण इसमें बाधाएं आई।

यदि विभाग समय पर यह कार्य शुरू कर देता तो पांच साल पहले ही यात्रियों को राहत मिल जाती। गौरतलब है कि इस कार्य की निगरानी के लिए यहां उप मुख्य अभियंता स्तर सहित कई अधिकारी तैनात हैं। रूट रिले इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित करने पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रूट रिले इंटरलॉकिंग प्रणाली से जुड़े अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट के बारे में किसी तरह का संवाद करने से इनकार कर दिया।

करंट का खतरा
यात्री यार्ड में स्टेशन मॉडिफिकेशन, सिग्नल और लाइनों के विस्तार के कार्य के दौरान काम कर रहे को करंट का खतरा भी है। विद्युत लाइन को भी दुरुस्त करने के लिए ब्लॉक लिया जा रहा है। ऐसे में श्रमिकों के डर को दूर करने और उन्हें सतर्क करने के लिए संरक्षा विभाग की ओर से काउंसलिंग की जा रही है। वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी डॉ.आर.एन. मीना के अनुसार शून्य दुर्घटना और जानमाल की सुरक्षा के लिए उद्घोषणा की भी कराई जा रही है।

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