बड़ी खबर... रीको के इस निर्णय से कोटा के उद्यमियों में मचा हड़कंप....

करीब साठ आवंटियों को अंतिम नोटिस जारी

By: Dhirendra

Updated: 19 Jan 2019, 12:41 PM IST

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा . रीको औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक भूखण्डों का उद्योगों की जगह अन्य उपयोग करना अब उद्यमियों को भारी पड़ गया है। रीको ने एेसे भूखण्डों को पुन: अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर ली है। इसके लिए संबंधित उद्यमियों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। इससे उद्यमियों में हड़कम्प मचा हुआ है।

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रीको ने करीब दो-ढाई साल पहले इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में बिना अनुमति हॉस्टल, मैरिज गार्डन या अन्य व्यावसायिक उपयोग करने पर कई भूखण्डों का आवंटन निरस्त कर दिया था। इसके बाद रीको की ओर से कई नोटिस दिए गए गए। सुनवाई के बाद रीको की स्टेट कोर्ट में यह मामला चला गया। इसमें भी फैसला दिया गया कि जिन भूखण्डों पर उद्योग नहीं चल रहे और हॉस्टल या अन्य गतिविधियां संचालित हैं तो एेसे भूखण्डों को रीको अपने अधिकार क्षेत्र (टेक ओवर) में ले। इस पर रीको के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से करीब साठ आवंटियों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। इसमें कोटा कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी का एक बेशकीमती भूखण्ड भी शामिल है।

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जनसुरक्षा के लिए घातक
पूर्व में जिला कलक्टर की ओर से रीको क्षेत्र में संचालित हॉस्टल व शैक्षणिक संस्थानों के बारे में रिपोर्ट तैयार करवाई गई थी। इसमें माना था कि औद्योगिक क्षेत्र में आवासीय, होटल, हॉस्टल व शैक्षणिक गतिविधियां संचालित किया जाना पर्यावरण की दृष्टिï से उचित नहीं है। यह जनसुविधाओं की दृष्टिï से घातक व हानिकारक हो सकती है।

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नगरीय विकास मंत्री के समक्ष पक्ष रखेंगे

दि एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल का कहना है कि इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र शहर के बीच आ गया है। इसलिए अब यहां आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देनी चाहिए। सरकार ने होटल संचालन की अनुमति दे दी है, लेकिन हॉस्टल की नहीं दी। इस कारण रीको के स्टेट कोर्ट ने निरस्त भूखण्डों को टेकओवर करने का आदेश दिया है। नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से भेंटकर इस मसले पर चर्चा करेंगे और वस्तुस्थिति से अवगत करवाकर अनुमति मांगेंगे।

मास्टर प्लान का भी उल्लंघन माना था

कोटा शहर के मास्टर प्लान को राज्य सरकार के नगरीय विकास विभाग ने अनुमोदित किया है। इन्द्रप्रस्थ क्षेत्र को मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया है। मास्टर प्लान में निर्धारित भू-उपयोग तथा संस्था द्वारा आवंटित भू-उपयोग से भिन्न उपयोग प्रस्तावित करने की स्थिति में भू-उपयोग परिवर्तन नियम 2000 एवं 2010 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। इन नियमों के तहत भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया निर्धारित की गई है एवं समितियों का गठन किया गया है, जिसके तहत भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदन प्राप्त होने पर जांच के बाद ही वरिष्ठ नगर नियोजक कोटा जोन की टिप्पणी भी प्राप्त करने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

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