डेढ़ दशक से 'लापता सड़क' का दंश झेल रहे ग्रामीण

कोटा. एक ओर शहर की तस्वीर बदलने के लिए करोड़ों के विकास कार्यों को मूर्त रूप दिया जा रहा है तो वहीं सरकार के विकास और उन्नति के दावे ग्रामीण इलाकों में पहुंच कर दम तोड़ देते हैं। जिला मुख्यालय से चंद दूरी पर बसे ग्रामीण भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं लिए जूझ रहे हैं। बारां रोड पर स्थित आठवां मील से मानस गांव तक 5 किमी व घघटाना से बाडिय़ा तक 1.5 किमी की सड़क जर्जर हालत में है।

By: Deepak Sharma

Updated: 08 Apr 2021, 08:22 PM IST

कोटा. एक ओर शहर की तस्वीर बदलने के लिए करोड़ों के विकास कार्यों को मूर्त रूप दिया जा रहा है तो वहीं सरकार के विकास और उन्नति के दावे ग्रामीण इलाकों में पहुंच कर दम तोड़ देते हैं। जिला मुख्यालय से चंद दूरी पर बसे ग्रामीण भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं लिए जूझ रहे हैं। बारां रोड पर स्थित आठवां मील से मानस गांव तक 5 किमी व घघटाना से बाडिय़ा तक 1.5 किमी की सड़क जर्जर हालत में है। सड़क की बदहाली का आलम ऐसा है कि गांवों में चार पहिया वाहन भी नहीं पहुंच पाते हैं। फसल बेचने कोटा आने वाले किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वहीं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भी इसका खमियाजा भुगतना पड़ता है।

कई बार शिकायत कर चुके ग्रामीण
मानस गांव निवासी नरेंद्र यादव ने बताया कि यहां से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का कोटा आना-जाना होता है, लेकिन इस सड़क में दर्जनों गड्ढे होने से पैदल चलना भी दुश्वार है। आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। वाहन चालक भी इस मार्ग पर चलने से कतरा रहे हैं। स्थानीय विकास ने बताया कि ये सड़क डेढ़ दशक से इसी हाल में हैं। कच्ची सड़क पर गड्डों की भरमार है। टेंडर होने के बावजूद भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। घघटाना निवासी राजेन्द्र मीणा ने बताया कि जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार समस्या दूर करने की मांग चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

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