RTU's sixth convocation : साकार हुए सपने, गर्वित हुए अपने

85 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 18 को गोल्ड मेडल प्रदान किएसमारोह में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रही नगण्यआरटीयू का छठा दीक्षांत समारोह

कोटा. हाथों में डिग्री, गले में गोल्ड मेडल, चेहरे पर मुस्कान और हर तरफ खुशियां। बच्चों के हाथों में डिग्री देख गर्वित माता-पिता, ऐसा लगा मानो जिंदगी में कुछ पा लिया हो। यादों को सहजने के लिए मोबाइल और कैमरों में खुद को कैद करने की कोशिश। नजारा था राजस्थान टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह का।


कार्यक्रम यूआईटी ऑडिटोरियम में बुधवार दोपहर 12 बजे शुरू हुआ। इसमें पौशाक समेत कई बदलाव देखने को मिले। अध्यक्षता कुलाधिपति एवं राज्यपाल कल्याण सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि आल इंडिया यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के नामित अध्यक्ष प्रो. दुर्गसिंह चौहान रहे। 


इस अवसर पर 80 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 18 को गोल्ड मेडल प्रदान किए। कुलपति प्रो.एन.पी. कौशिक ने वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा और विश्वविद्यालय की गतिविधियों और विकास की जानकारी दी। भव्य समारोह में शहर के जनप्रतिनिधियों की भागीदारी नगण्य रही। तीनों विश्वविद्यालयों के कुलपति ही यहां नजर आए। समय पर शुरू हुआ कार्यक्रम निर्धारित समय से कुछ मिनट पहले ही संपन्न हुआ।


प्लेसमेंट पर सवाल

इस अवसर पर राज्यपाल सिंह ने कहा कि डिग्री दे दी जाती है, लेकिन प्लेसमेंट का प्रतिशत बहुत कम है। पिछले सत्रों के आंकड़े देखे तो पता चला कि 66800 का नामांकन था, 8692 को ही रोजगार मिला, यानी 28 प्रतिशत को। ज्यादातर प्लेसमेंट अण्डरपे होते हैं। विश्वविद्यालयों को इसे गंभीरता से लेना होगा।


इसके लिए कमेटी बनाई जाए, जल्द ही विश्वविद्यालयों को सर्कुलर भेजेंगे। छात्रों को स्टैण्डअप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया से जोड़ा जाए। सुनिश्चित करें कि प्लेसमेंट अच्छे हों, छात्रों को उचित पैकेज मिले।


काले गाउन मानसिक गुलामी के प्रतीक

सिंह ने कहा कि इस बार दीक्षांत समारोह कुछ अलग और बेहतर है। अब तक वर्षों पुरानी विदेशी औपनिवेशी मानसिकता के चलते अंग्रेजों के काले गाउन में उपाधियां दी जाती थीं, जो मानसिक गुलामी का प्रतीक था। भारतीय परिवेश के श्वेत वस्त्र अच्छे लग रहे हैं। काला गाउन होता तो चेहरे भी ठीक से नजर नहीं आते।


कोटा दे रहा है टैलेंट

आल इंडिया यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के नामित अध्यक्ष प्रो. दुर्गसिंह चौहान ने कहा कि हमारी व्यवस्थाएं विकास के अनुकूल नहीं है। नैतिक शिक्षा पढ़ाई से गायब हो गई है। यही कारण है कि नैतिक पतन हो रहा है। 


डॉक्टर व इंजीनियर तो बन रहे हैं, लेकिन कोई इंसान नहीं बन रहा। हमें मानवीय होना होगा, समग्र विकास की सोचनी होगी। विद्यार्थियों को भी प्रेक्टिकल होते हुए फील्ड वर्क ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। 1990 में आईआईटी-जेईई में गांव का एक बच्चा नजर नहीं आता था।


आज कोटा ने माहौल बदला है। यहां बच्चे पढऩे आ रहे हैं और आईआईटी जेईई में प्रवेशित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों को दिया जाने वाला फण्ड बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। हर संस्थान में फेकल्टी की कमी है, इसे पूरा किया जाना चाहिए। प्राइवेट संस्थानों में अध्यापन करवाने वाले शिक्षकों को उचित वेतन मिलना चाहिए।


मुख्यमंत्री की मौजूदगी का दिखा असर

दीक्षांत समारोह के दौरान ही शहर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी का असर भी नजर आया। शहर के जनप्रतिनिधि समेत अन्य मेहमानों की 80 प्रतिशत कुर्सियां खाली ही रही। 


कार्यक्रम में कोटा विश्वविद्यालय, वद्र्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय और कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव व कुछ पुलिस अधिकारी ही मौजूद रहे। प्रबंध मण्डल में शामिल जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उल्लेखनीय है कि शहर के ही नान्ता क्षेत्र में इसी समय मुख्यमंत्री का कार्यक्रम था।


ऐसे चला दीक्षांत समारोह

11.53 बजे शोभायात्रा का हाल में प्रवेश

11.57 बजे दीक्षांत समारोह शुरू करने की घोषणा

12.00 बजे कुलपति का अभिभाषण

12.11 बजे डिग्रियों का वितरण शुरू

12.29 बजे तक डिग्रियां प्रदान की

12.36 बजे तक स्वर्ण पदक प्रदान किए

12.57 तक विशिष्ट अतिथि का अभिभाषण

12.58 से 1.16 तक राज्यपाल का उद्बोधन

1.18 बजे समारोह समापन की घोषणा

1.32 बजे तक था प्रस्तावित


भारतीय परिवेश में निखरे

- सफेद कुर्ता-पायजामा व आसमानी स्टाल में डिग्री धारक

- श्वेत वस्त्र, केसरिया स्टाल व साफे में अतिथि

- श्वेत वस्त्र, मूगिंया स्टाल व साफे में अकेडमिक कौंसिल के सदस्य

- श्वेत वस्त्र, साफे व गहरे आसमानी रंग की स्टाल में प्रबंध मण्डल के सदस्य

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shailendra tiwari Desk
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