पंच से लेकर सांसद तक के लिए हो 'एक' प्रावधान

पंच से लेकर सांसद तक के लिए हो 'एक' प्रावधान

Dheetendra Kumar Sharma | Publish: May, 17 2018 07:50:55 PM (IST) Kota, Rajasthan, India

अदालत परिसर स्थित परिषद के सभागार में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने राजनीति के शुद्धिकरण के लिए अपने-अपने विचार रखे।

कोटा . जो व्यक्ति कानून का जानकार हो उसे ही विधि मंत्री बनाया जाए। यानि चुने हुए जनप्रतिनिधियों में योग्यता के अनुसार ही मंत्रीपद दियाजाए। साथ ही चुनाव सामग्री को चुनाव आयोग बांटे और इसके बदले में प्रत्याशियों से राशि जमा कराए। तीन बार से ज्यादा कोई चुनाव नहीं लड़ सकें, जेल से चुनाव लडऩे की प्रथा बंद हो।

एेसे ही कई सुझाव गुरूवार को राजस्थान पत्रिका के चैंंजमेकर महाअभियान के दौरान आए। अभिभाषक परिषद के सहयोग से अदालत परिसर स्थित परिषद के सभागार में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने राजनीति के शुद्धिकरण के लिए अपने-अपने विचार रखे। पत्रिका के इस महाअभियान को देश के लिए बेहतरीन पहल बताया। इस मौके पर अधिवक्ताओं ने शपथ भी ली कि वह इस अभियान के सजग सिपाही बनेंगे, लोगों को जागरुक करेंगे। अधिवक्ताओं ने कहा कि कानून में जो प्रावधान एक पंच, सरपंच के लिए हो वहीं विधायक व सांसद के लिए भी रहे।

राजनीति के शुद्धिकरण के लिए शिक्षित और युवा वर्ग को कदम बढ़ाने होंगे। इसके लिए जनप्रतिनियिधों के २-३ बार से अधिक चुनाव लड़ने पर रोक होनी चाहिए। अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक हो।
नरेश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष परिषद

 

चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग रोकना होगा। चुनाव लड़ने की खर्च सीमा की सख्ती से पालना हो। चुनाव में फर्जी शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ कार्यवाही हो। परिवारवाद को बढ़ाना नहीं देना चाहिए।

रघुनंदन गौतम, पूर्व अध्यक्ष परिषद

 

जिस तरह से शिक्षित वर्ग आईएएस और आईपीएस बनना चाहते हैं उसी तरह से शिक्षित वर्ग को राजनीति में भी आगे आना चाहिए। जातिगत राजनति को खत्म करना होगा। देश की कमान विकास की सोच रखने वालों के हाथ होनी चाहिए।

दिनेश रावल, पूर्व अध्यक्ष परिषद

युवा व शिक्षित वर्ग को ही राजनीति में आगे आना चाहिए। लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढऩी चाहिए। ५० प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया जाए।

मधु शर्मा

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कानून में भी संशोधन होना चाहिए। निर्वाचन नियमों में भी बदलाव होना चाहिए। बिगडे़ हालात सुधारने के लिए चेंज मेकर अभियान अनुकरणीय है। तंत्र ? को जनता पर नही जनता को तंत्र पर हावी होना चाहिए। ं

कल्पना शर्मा

पत्रिका जनता की आवाज पहले भी बनी है और एक बार फिर बन रही है। चेंजमेकर अभियान दूरगामी है, इससे जुड़कर देश में परिवर्तन संभव है।

अख्तर खान

जातिगत, बाहुबली व सिंबल के आधार पर टिकट देना बंद हो। स्वार्थ से राजनीति में गिरावट है। अच्छे लोग आगे आएं इसके लिए ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

रविन्द्र विजय

राजनीति में शुद्धीकरण के लिए पार्टी में पहले आंतरिक लोकतंत्र हो, पहले पार्टी में जीते उसके बाद टिकट मिले। चुनाव से पहले और बाद में प्रत्याशी की सम्पत्ति का विवरण लिया जाए।

रवि विजय

चुनाव आयोग ने पहले सख्ती की थी जिस कारण काफी सुधार हुआ। आने वाले चुनावों में भी पैसा बचाने के लिए कडे़ नियम लागू किए जाने चाहिएं।

दीपक बबलानी

दो या तीन बार ही चुनाव लडऩे की छूट दी जाए। एक ही परिवार के लोग बार-बार चुनाव लड़ते हैं और काबिल व्यक्ति को मौका ही नहीं मिलता। मतदाताओं को जागृत करने के लिए शिविर लगाए जाने चाहिएं।

रमेश कुशवाह, पूर्व अध्यक्ष परिषद

दो जगह से चुनाव लडऩे पर पाबंदी हो, स्वास्थ्य मंत्री चिकित्सक हो और विधि मंत्री काननू का जानकार। प्रचार सामग्री का पैसा चुनाव आयोग के पास जमा कराएं।

महेश शर्मा

राजनीति में आने का बड़ा कारण सुविधाओं का मिलना है, राजनेताओं की सुविधाएं बंद कर दी जानी चाहिए। जो हार गया उसे मंत्री बना दिया जाता है, यह भी बंद हो। चुनाव में संसाधनों के प्रयोग पर पाबंदी हो।

मनोजपुरी, अध्यक्ष अभिभाषक परिषद

लोग पैसा कमाने व आपराधिक छूट लेने राजनीति में जा रहे हैं। चुनाव आयोग को इस पर सख्त हो। प्रचार की जिम्मेदारी भी चुनाव आयोग अपने हाथ में ले।
वीरेन्द्र सिंह भानावत

राजनीति में बदलाव तभी होगा जब नए और शिक्षित लोगों को मौका मिलेगा। देश के विकास और स्वच्छ छवि वाले लोगों को स्वयं पहल कर आगे आना होगा। वकील समुदाय बदलाव का हमेशा से नायक रहा है। प्रयास करेंगे तो परिणाम भी आएंगे।
बूजराज सिंह चौहान, पूर्व महासचिव परिषद


राजनीति का व्यवसायिक करण बंद हो। स्वच्छ छवि वाले लोग आगे आए। इसके लिए वकीलों को प्रयास करने होंगे। अच्छे व सामाजिक कार्य करने वालों को आगे बढ़ाना होगा। आपराधिक छवि वालों को राजनीति से दूर करना होगा।
रोहित सिंह राजावत, पूर्व महासचिव परिषद


ये भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में परिषद के महासचिव जितेन्द्र पाठक, उपाध्यक्ष अतीश सक्सेना, पूर्व महासचिव अजय नंदवाना,महेन्द्र गुप्ता, खुशाल गुप्ता, सोनल विजय,मनीष गुप्ता, सीताराम मुराडि़या, अभिषेक पाठक,सत्य नारायण मेघवाल, मनीष शर्मा, ममता शर्मा, प्रमोद शर्मा, कौशल किशोर शर्मा,मुकेश कुमावत व भुवनेश शर्मा समेत कई वकील भी मौजूद थे।

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