सोशल प्राइड : रक्तदान में बेटियों का जुनून दे रहा प्रेरणा का मानवीय संदेश

कोरोना संक्रमण काल की विपरित परिस्थतियों से निपटने में शहरवासी अपने-अपने सामथ्र्य अनुसार योगदान दे रहे हंै।

By: Abhishek Gupta

Published: 28 May 2021, 12:55 PM IST

कोटा. कोरोना संक्रमण काल की विपरित परिस्थतियों से निपटने में शहरवासी अपने-अपने सामथ्र्य अनुसार योगदान दे रहे हंै। इस कठिन समय में रक्त की कमी ने शहर के थैलेसीमिक बच्चे, इमरजेंसी में आई रक्त की आवश्यकता को मरीजों को परेशानी में डाल रखा है। जहां एक ओर लॉकडाउन व झुलसती गर्मी में लोग घरों में कैद हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी बिटियां हैं, जो मानवीय भाव को लेकर मरीजों को रक्तदान कर प्रेरणा का संदेश दे रही हैं। ऐसी ही कुछ साहसिक व दृढ़ इच्छा शक्ति से भरपूर बेटियों से हम आपको मिलवाते हैं। उनका रक्तदान में योगदान अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायी है...।

थैलेसीमिक बच्चे की मदद के लिए आगे आई

जवाहरनगर निवासी 27 वर्षीय धनुजा शर्मा ने एक थैलेसीमिक बच्चे को रक्त उपलब्ध करवाने इमरजेंसी में दौड़कर रक्तदान किया। शिक्षा विभाग में कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत धनुजा को एक सोशल मीडियाग्रुप के माध्यम से पता चला कि एक थैलेसीमिक बच्चे को ओ-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता है। जब मैसेज पढ़ा तो इंसानियत का जज्बा लिए धनुजा ने तुरंत थैलेसीमिक बच्चे के पिता से बात कर ब्लड बैंक पहुंची और रक्तदान किया।

रक्तदान कर गर्भवती महिला की जान बचाई
रंगपुर रोड निवासी 20 वर्षीय वीनस जैन के परिवार में शुरू से ही रक्तदान को लेकर एक संस्कार रहे हैं। दुर्लभ ग्रुप ए नेगेटिव वीनस जैन ने हमेशा से तय कर रखा था कि जब भी मौका मिलेगा, वह पिता व भाई का अनुसरण करेगी। एमबीएस ब्लड बैंक में भाई सौरभ जैन को प्लाज्मा डोनेट करते देखा तो इच्छा हुई की वह भी रक्तदान करे। उसी दौरान जेके लोन अस्पताल में एक गर्भवती महिला के परिजन ब्लड बैंक के बाहर ए नेगेटिव ब्लड ग्रुप के लिए परेशान हो रहे थे। मानवीय भाव जागृत हुआ दो बार हीमोग्लोबिन की कमी से अनफिट हुई वीनस ने इस बार फिट होकर अनजान के लिए रक्तदान किया।

माता-पिता की वैवाहिक वर्षगांठ पर बेटी ने किया रक्तदान
केशवपुरा टीचर्स कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय निवेदी पोरवाल ने पापा-मम्मी की वैवाहिक वर्षगांठ को लॉकडाउन में कुछ अनूठे तरीके से मनाने का निश्चिय किया। आईआईटी की तैयारी कर रही बेटी ने जब पापा-मम्मी से बात की और उनकी वैवाहिक वर्षगांठ पर रक्तदान की इच्छा जाहिर की तो संक्रमण काल में दोनों थोड़ा विचलित हुए। लेकिन, फिर निवेदी के दृढ़ निश्चिय के आगे झुक गए और सितम्बर में पॉजिटिव आई निवेदी ने ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान किया। निवेदी का कहना है कि 18 वर्ष पूर्ण होने पर प्रत्येक को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।

550 यूनिट ही रक्त उपलब्ध

एमबीएस कोटा ब्लड बैंक के एचओडी डॉ. एच.जी. मीणा के अनुसार, वर्तमान पस्थितियों में 750 पंजीकृत थैलेसीमिक बच्चों में 550 यूनिट ही रक्त उपलब्ध है। ए व एबी ब्लड ग्रुप की सबसे ज्यादा कमी बनी हुई है। इन दिनों जरूरतमंदों की मदद के लिए रक्तदान को लेकर शहरवासियों को आगे आना चाहिए।

Abhishek Gupta
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