' पुलवामा में बहा था खून का दरिया, हम डरे नहीं बल्कि सीना तान किया मुकाबला '

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए आतंकी हमले का
क्या था मंजर, पढि़ए जवान नरेंद्र सिंह की जुबानी...

कोटा. पुलवामा की आज पहली बरसी है। एक ऐसा दर्दनाक हादसा जिसने पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था। मध्यप्रदेश के गुना जिले के रहने वाले और हमले के प्रत्यक्षदर्शी रहे जवान नरेन्द्र सिंह ने पत्रिका से बातचीत के दौरान उस मंजर को बयां किया है।

बकौल नरेंद्र, आतंकी हमला इतना खतरनाक था कि हमारे चालीस जवान मौके पर ही शहीद हो गए। समीप के गांवों में घरों के शीशे टूट गए। काफिले में शामिल वाहनों के शीशे टूट कर न जाने कितनी ही दूर जा गिरे। खून का दरिया बहने लगा। वाहनों के हुलिए बदल गए। काफिले पर गोलियां बरसाई जा रही थी।

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ऐसे माहौल में भी काफिले में शामिल जवान जब अपने वाहनों से नीचे उतरे तो चेहरे पर कोई डर या तनाव नहीं था। उन्होंने तत्काल मोर्चा संभाल लिया। काफिले में शामिल सीआरपीएफ के जवानों का कहना है कि अगर गोलियां चला रहे आतंककारी सामने होते तो उनका क्या हश्र होता, ईश्वर ही जाने। काफिले में शामिल ऐसे ही एक जवान नरेन्द्र सिंह ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि वे 2015 से कश्मीर में तैनात हैं।

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जब हादसा हुआ तब सीआरपीएफ की 78 बसों में जवान जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे। मैं दसवें नम्बर की बस में सवार था, लेकिन जब विस्फोट हुआ तो कान फाड़ देने वाली आवाज सुनाई दी। आवाज सुन कर लगा कि कुछ अनहोनी हो गई है। जिस जगह धमाका हुआ, वहां हमें नहीं जाने दिया।

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