रामगंजमंडी का स्पाइस पार्क दे सकता है हजारों लोगों को रोजगार, पर यहां अटका है मामला...

रामगंजमंडी का स्पाइस पार्क दे सकता है हजारों लोगों को रोजगार, पर यहां अटका है मामला...

DHIRENDRA TANWAR | Updated: 11 Jul 2019, 05:43:57 PM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

15 करोड़ खर्च करने के बाद भी इस कारण नहीं आ रही निर्यातक कंपनियां...

रामगंजमंडी. यहां दो साल पहले 15 करोड़ की लागत से तैयार हुआ स्पाइस पार्क बेरोजगारों की उम्मीदों पर तो कम से कम खरा नहीं उतरा है। अठारह कंपनियों के आने के दावों के बीच खिली बांछें अब निस्तेज हैं।
धनिया और लहसुन के बूते प्रोसेसिंग यूनिट्स को खींच लेने और क्षेत्र के विकास को पंख लगाने के सपने भी फिलहाल धुंधले ही हैं। वजह यह कि अव्वल तो आवेदन ही पूरे नहीं आए, फिर आई आवेदक कंपनियों ने भी यहां कोई रूचि नहीं दिखाई। पिछले माह जरूर एक कंपनी ने करार की प्रक्रिया कर उम्मीदों का चिराग जलाया। जानकारों के मुताबिक सभी यूनिट्स लगे तो करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। निमाणा मार्ग पर तत्कालीन केन्द्रीय उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने रामगंजमंडी में स्पाइस पार्क की घोषणा कर बजट का आवंटन किया था। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्क का शिलान्यास किया। अठारह कंपनियों के लिए स्पाइस पार्क प्रशासन की तरफ से गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट व कार्यालय संचालन के लिए भवन-ऑफिस बनाए गए। करीब 15 करोड़ रुपए खर्च हुए। मार्च 2017 में यह बनकर तैयार हुआ। जून 2017 में केन्द्र सरकार ने एक यूनिट संचालन का जिम्मा लिया और केरल की मसाला निर्यातक कंपनी इस्टर्न कोन्डीमेंट प्रा. लि. की यूनिट लगवाई। कंपनी ने 80 बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ दिया। बस इसके बाद से ही बेरोजगार अन्य कंपनियों के आने की बाट जोह रहे हैं। मसाला बोर्ड द्वारा नियमानुसार पार्क में संचालित होने वाली यूनिट के लिए 30 साल का लीज एग्रीमेंट किया जाता है। निर्यातक कंपनी के नाम की भूखंड रजिस्ट्री करवाई जाती है।

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आवेदन 13 आए, एग्रीमेंट नहीं किया

मसाला पार्क तैयार हुआ तो 13 मसाला निर्यातक कंपनियों ने यूनिट संचालन के लिए आवेदन किया था। दो कंपनियों ने आवेदन निरस्त करा लिया। शेष 11 कंपनियों में नई दिल्ली की एक कंपनी की तरफ से पिछले माह एग्रीमेंट तैयार किया गया। मसाला बोर्ड कंपनी को हरी झंडी देगा तब यूनिट प्रारंभ होगी।

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संभावना - लहसुन यूनिट

हाड़ौती में लहसुन की खेती बड़े स्तर पर होती है। लिहाजा, पार्क में लहसुन आधारित उद्योग लगाया जा सकता है। मांसाहार के चलते मुस्लिम देश लहसुन का बड़ा बाजार हैं। मुम्बई गुजरात के कई व्यापारी ऐसे देशों में इसका निर्यात कर रहे हैं। निर्यातक कंपनी लहसुन की उपलब्धता को देखते हुए यहां यूनिट संचालित करे तो किसानों को अच्छे भाव मिल सकते हैं। पार्क में कंपनी को यूनिट संचालन का अधिकार प्राप्त है। वर्तमान में किसी लहसुन निर्यातक कंपनी की तरफ से आवेदन नहीं आया है।

फैक्ट फइल

15 करोड़ लागत से बना है स्पाइस पार्क
12 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है पार्क
18 निर्यातक कंपनियों को लगानी थी यूनिट।
01 सरकारी यूनिट अभी पार्क में है संचालित।
80 स्थनीय लोगों को मिला है रोजगार।

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