scriptSquad of families who suffered the bite of corona in Kota | कोरोना का दंश झेलने वाले परिवारों की दास्तां: वक्त ने सिखा दिया तूफानों से लडऩा | Patrika News

कोरोना का दंश झेलने वाले परिवारों की दास्तां: वक्त ने सिखा दिया तूफानों से लडऩा

मजबूरियां भी इंसान को क्या-क्या खेल खिलाती है। जीवन में ऐसे मुकाम भी आते हैं जिनके बारे में इंसान सोच भी नहीं सकता। अब इसे कुदरत की मर्जी मानें का किस्मत। कोरोना के कहर ने गत वर्ष कई परिवारों के साथ ऐसा ही खेल खेला। रब भी ऐसा रूठा कि किसी के जिगर का टुकड़ा सदा के लिए दूर हो गया, किसी के सिर से पिता का तो किसी से माता-पिता का साया उठ गया।

कोटा

Published: June 14, 2022 12:18:59 pm

हाबूलाल शर्मा
कोटा. मजबूरियां भी इंसान को क्या-क्या खेल खिलाती है। जीवन में ऐसे मुकाम भी आते हैं जिनके बारे में इंसान सोच भी नहीं सकता। अब इसे कुदरत की मर्जी मानें का किस्मत। कोरोना के कहर ने गत वर्ष कई परिवारों के साथ ऐसा ही खेल खेला। रब भी ऐसा रूठा कि किसी के जिगर का टुकड़ा सदा के लिए दूर हो गया, किसी के सिर से पिता का तो किसी से माता-पिता का साया उठ गया। तूफां उस जीवन में आयास जिसकी मांग का सिंदूर खामोशी के साथ उजड़ गया। इन सभी के बावजूद इन महिलाओं ने तूफानों से कश्ती को आहिस्ता-आहिस्ता निकाल कर वक्त से लडऩा सीख लिया। अब एक सशक्त नारी की तरह परिवार की गाड़ी को चला रही है। दर्द भरी दास्तां सुनाते हुए इनकी आंखे भर आती है, लेकिन ये कहती हैं कि शायद नियती को यही मंजूर था। बेशक इन महिलाओं ने दुनिया को कभी देखा नहीं था, लेकिन अब कोई मजदूरी तो कोई घर पर सिलाई के साथ अन्य कार्य कर परिवार को संबल दे रही है।
अपनों का साथ छूटा, लेकिन इनका हौंसला नहीं टूटा
कोरोना का दंश झेलने वाले परिवारों की दास्तां: वक्त ने सिखा दिया तूफानों से लडऩा
बच्चों के बारे में तो सोचना ही पड़ेगा
कोरोना कहर से पीडि़त महिलाओं ने बताया कि जो भी हुआ वह तकदीर का खेल है। लेकिन परिवार व बच्चों के बारे में तो सोचना ही पड़ेगा। यहीं सोचकर अपना फर्ज निभाने का प्रयास कर रही हैं। जो काम वह कर सकते थे वह तो नहीं कर पातेए लेकिन प्रयास एक ही है कि बच्चों का भविष्य संवर जाए।
सिल रही हूं जिंदगी का ताना-बाना
केशवपुरा निवासी प्रमिला प्रजापति ने बताया कि 2 जून 2021 को पति रामभजन प्रजापति की कोरोना से मौत हो गई। पति प्राइवेज नौकरी कर परिवार चला रहे थे। उनकी मौत के बाद परिवार में बुजुर्ग सास सहदेवी व बेटा नवीन (14) की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। ग्रेजुएट होने के बावजूद मैंने स्कूल से लेकर कई जगह नौकरी की तलाश की, लेकिन नहीं मिली। घर खर्च चलाने के लिए घर पर ही सिलाई, साड़ी फॉल व पीकू का काम शुरू कर परिवार चला रही हूं। बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे है। नौकरी की तलाश कर रही हूंस मिल जाएगी तो बच्चों का भविष्य सुधर जाएगा।
मां-बेटे ने संभाली घर की कमान
रंगतालाब स्टेशन निवासी बसंती बाई ने बताया कि पति रामावतार मेघवाल पुताई का काम कर परिवार चला रहे थे। कोरोना से 9 मई 2021 को मौत हो गई। परिवार में दो बेटे है। बड़ा बेटा विजय कुमार रेलवे स्टेशन पर कैंटीन में काम करता था उसका भी काम धंधा छूट गया। पति के जाने के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया। आर्थिक संकट से बचने के लिए बेलदारी का काम शुरू किया और छोटा बेटा सुमित जो पहले कुछ नहीं करता था पुताई का काम शुरू कर दिया। दोनों मां-बेटे मेहनत कर घर चला रहे है।
बच्चों के लिए झाड़ू पौंछे का काम शुरू किया
केशवपुरा में किराए के मकान में रह रही चांदनी शर्मा ने बताया कि पति मंडी में हम्माली का काम करते थे। 30 जून 2021 को कोरोना से मौत हो गई। पति की मृत्यु के बाद परिवार पर दुरूखों का पहाड़ टूट पड़ा। दो छोटे बच्चे है तमन्ना (11) व साहिल (10) है। दूसरों के सामने हाथ फैलाने की जगह परिवार चलाने व बच्चों को पढ़ाने के लिए घर-घर झाड़ू पौंछे का काम शुरू किया। इसमें इतनी कमाई तो नहीं है लेकिन सुकून की जिंदगी जी रही हूं।
मां ही सहारा थी, वह भी छोड़कर चली गई
माला रोड स्टेशन निवासी रतना मेनन ने बताया कि मां डीसीएम में एचआर डिपार्टमेंट में काम करती थी और पिता केरल में ट्रक ड्राइवर है। मां मुझे इंटर्न की तैयारी करवा रही थी। कोरोना से 6 मई को मां रेणुका मेनन का निधन हो गया। परिवार में मैं अकेली रह गई। पिता ड्राइवर है वो खर्चा वहन नहीं कर सकते थे। ऐसे में मौसी व मामा जो कोटा में ही रहते है उन्होंने मुझे सहारा दिया ताकि मैं पढ़ाई पूरी कर सकू।
घुटनों का ऑपरेशन होना है, पर नहीं हो पा रहा
स्टेशन रेलवे सोसायटी निवासी शकुंतला शर्मा ने बताया कि पति नरेश शर्मा बेटे हिमांशु के साथ अच्छी जिंदगी जी रहे थे। पति निजी बैंक में नौकरी करते थे। कोरोना से 5 मई 2021 को उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद मां.बेटे पर दुरूखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे ने अभी बीकॉम किया है। घुटनों में दर्द रहने व चिकित्सकों के ऑपरेशन का बोलने के बाद भी बेटे को आगे पढ़ाने के लिए घर पर ही सिलाई का काम शुरू किया है। एक कमरा किराए पर दिया है ताकि परिवार का खर्च चला सकूं।

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