Save Chambal River Campaign : नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी पानी को तरस जाएगी

चार माह पहले शुरू ही पहल बनी मुहिम, पत्रिका अभियान से प्रेरित होकर भीतरियाकुंड को प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प लिया

कोटा. चंबल को शुद्ध रखने के लिए लोगों को जागरूक करने की चार माह पहले हमलोग संस्था की ओर से शुरू की गई पहल अब मुहिम बन चुकी है। हर रविवार को भीतरिया कुंड के पास श्रमदान कर चंबल से गंदगी साफ करने का संदेश दिया जा रहा है। रविवार को भी हमलोग संस्था के साथ कॉलेज-स्कूल के विद्यार्थियों की टीम और कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने श्रमदान किया।


अब सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग संग्रहण कर निर्धारित प्रक्रिया से निस्तारण के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यहां महक जैन, प्रिया गुप्ता, राहुल शर्मा, हेमंत मालव, राहुल शिवपुरा सहित कॉलेज के कई विद्यार्थियों ने कहा कि नगर निगम अभी तक कचरे का निस्तारण सही तरीके से नहीं कर पा रही है।

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निगम की गाडिय़ां सूखे और गीले कचरे को एक साथ लेकर परिवहन कर रही हैं। कचरे को नांता ट्रेंचिंग ग्राउंड में उसी अवस्था में फेंक दिया जाता है। हमें ऐसी व्यवस्था नहीं चाहिए। चंबल में गंदगी फेंकना आपराधिक कृत्य जैसा है।

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हमलोग संस्था के संयोजक डॉ. सुधीर गुप्ता ने अपने नियमित संवाद में कहा, यह जागरूकता की पहल है, चंबल को सभी को मिलकर शुद्ध बनाना होगा। नई पीढ़ी इस स्थिति में चंबल को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है तो नई पीढ़ी को इस अभियान को जन-जन का अभियान बनाना होगा।

यह बात तय है कि यदि अभी भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी पानी के लिए तरसेगी। चंबल की जो जलराशि दिख रही है, वह तभी तक है, जब तक पूरी नदी दूषित नहीं हो जाती, इसी तरह हम नदी में गंदगी डालते रहे तो यह पूरी तरह दूषित हो जाएगी और पीने के पानी के लाले पड़ जाएंगे।

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इतने नालों से कब तक बचेगी नदी
डॉ. गुप्ता ने कहा, चंबल शुद्धीकरण योजना के तहत जब कुछ साल पहले इन नालों का सर्वे करवाया था, तब चंबल में सीधे गिरने वाले 22 नाले चिन्हित किए गए थे। उनमें से 14 नाले डाउन स्ट्रीम में चंबल रिवर फ्रंट वाले एरिया में गिरते हैं। इन नालों के कारण चंबल प्रदूषित हो रही है। सारे नाले चंबल में गिरते रहेंगे तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितने दिनों तक बची रहेगी। इसलिए बिना समय गंवाएं लगातार चंबल के लिए काम करना होगा।


प्लास्टिक मुक्त करेंगे

यहां कॉलेज छात्र और साामजिक कार्यकर्ताओं ने राजस्थान पत्रिका के अभियान से प्रेरित होकर भीतरियाकुंड को प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प लिया। युवाओं ने कहा, जल्द इसकी कार्य योजना तैयार की जाएगी। कुन्दन चीता ने कहा, देश की चुङ्क्षनदा सदानीरा नदियों में से राज्य में चंबल ही ऐसी नदी है, जिसमें वर्षभर पानी रहता है। इस नदी से कोटा के अलावा बूंदी, भीलवाड़ा सहित कई जिलों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। लाखों को लोगों का जीवन इस नदी पर निर्भर है।

भावना शर्मा ने कहा, अब बातों का वक्त नहीं है, चंबल को शुद्ध रखने के हर किसी को आहूति देन की जरूरत है। बीटा स्वामी, आर.पी पंचोली, मंजू चौहान, लवदीप हाड़ा, भवानी मीना, विकास, भानू सेन, गिरिराज गुर्जर, कमलेश कुमार, ओमेंद्र सिंह सहित कई प्रतिनिधियों ने चंबल को शुद्ध रखने का संकल्प दोहराया।

shailendra tiwari
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