कवि व अभिनेता शैलेष लोढ़ा ने बताया हास्य और उपहास में बड़ा अंतर.. जानिए क्या बोले...

DHIRENDRA TANWAR

Publish: Mar, 17 2019 01:40:58 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 01:40:59 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. हास्य और उपहास में बड़ा अंतर है, लेकिन हमने उपहास को हास्य समझ लिया है। जिन चीजों पर करुणा पैदा होनी चाहिए उन्हें देखकर आपकी हंसी छूट रही है तो यह इस दौर की सबसे बड़ी गिरावट है। जरूरत और दिखावे के अंतर को जो नहीं समझ सकता उसके लिए हास्य के मर्म को समझना नामुमकिन है। काव्य की हास्य एवं व्यंग्य शैली की बारीकियों पर यह बेबाक टिप्पणी की तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम हास्य कवि शैलेष लोढ़ा ने।

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कवि सम्मेलन में शामिल होने के लिए शैलेष लोढ़ा शनिवार को कोटा आए थे। राजस्थान पत्रिका से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्टैंडअप कॉमेडी, लाफ्टर शो और काव्य की हास्य विद्या को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। कवित्व की शैली लंबी जरूर है, लेकिन लतीफे गढऩे के लिए भी उतनी ही गंभीरता चाहिए जितनी हास्य कविता के लिए। इसलिए ऐसा कहना कि टीवी शो हास्य कविता के मूल को खत्म कर रहे हैं या हास्य कविता इनकी वजह से मर रही है पूरी तरह से गलत होगा।

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जो बिकता है वो लिखना पड़ता है
आत्मिक सुकून के लिए अच्छे साहित्य की जरूरत है, लेकिन घर चलाने के लिए तो वही लिखना पड़ता है जो बिकता हो। शो को लोकप्रिय बनाना ही तो डायरेक्टर और प्रड्यूशर की जिम्मेदारी है। स्क्रिप्ट भी वही लिखी जाएगी जो यह लोग चाहेंगे।

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राजनीति को ना
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार को जज करने के लिए पांच साल का कार्यकाल काफी नहीं होता। इसलिए मैं किसी सरकार पर कोई टिप्पणी तो नहीं करूंगा, लेकिन यह जरूर कहूंगा कि भारत की जो भी सरकार हो वह कम से कम इतनी तो मजबूत हो जो आतंक जैसे गंभीर मुद्दों पर साफ-साफ कह सके कि अब और नहीं। मुझे राजनीति में आने, टिकट देने और चुनाव लड़ाने के तमाम राजनीतिक दलों ने ऑफर किए। मैं खुद को राजनेताओं वाली योग्यता पर खरा नहीं पाता इसलिए कभी भी राजनीति में कदम नहीं रखूंगा।

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