सुरसा के बेल की तरह फैल रहा संक्रमण, लेकिन सिस्टम सुस्ता पड़ा

कोरोना गांवों में तबाही मचा रहा है। गांवों में संक्रमण सुरसा के बेल की तरह फैलता जा रहा है। सरकार भी गांवों में बढ़ते संक्रमण को लेकर चिंतित नजर आ रही है

 

By: Abhishek Gupta

Published: 20 May 2021, 01:19 PM IST

कोटा. कोरोना गांवों में तबाही मचा रहा है। गांवों में संक्रमण सुरसा के बेल की तरह फैलता जा रहा है। सरकार भी गांवों में बढ़ते संक्रमण को लेकर चिंतित नजर आ रही है, लेकिन जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग सुस्त पड़ा है। शहर से बाहर नजर करने को तैयार नहीं है, ये तो कागजों की नाव पर सवार होकर कोरोना जैसे भयावह भवसागर को पार करना चाहते है। गांवों के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर ग्रामीणों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।

हालात यह है कि संक्रमण तेजी से फैल रहा है और एक के बाद एक मौतें भी हो रही है, लेकिन वहां उन्हें संभालने वाला कोई नहीं है। जिले में 16 सीएचसी, 40 पीएचसी व 21 यूपीएससी है। इनमें से कई पर डॉक्टर्स नहीं है। ऑक्सीजन बेड्स व वेन्टिलेटर ख्वाब है। सिलेण्डर की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। जांचों की सुविधा भी नहीं है। शहर के हालात भी कम खराब नहीं है। सीएचसी व पीएचसी पर कोरोना मरीजों की भर्ती की सुविधा नहीं है। सारा भार बड़े अस्पतालों पर पड़ रहा है। हालातों पर पत्रिका की पेश एक रिपोट...र्।

करोड़ों के नए भवन बन गए, लेकिन भर्ती की सुविधा नहीं

कोटा शहर की सीएचसी पर भी डॉक्टर्स व संसाधनों का टोटा है। इस कारण एमबीएस अस्पताल व कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे इन अस्पतालों में भार पड़ रहा है। 4 करोड़ की लागत से विज्ञान नगर सीएचसी का नया भवन बनकर तैयार है, लेकिन लगभग 18 माह से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन यहां पर अभी तक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की गई। इससे रोगियों के उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। ऑपरेशन नहीं होते है। एक्सरे मशीन भी धूल फांक रही है। दादाबाड़ी सीएचसी पर भी फिजिशियन नहीं है। वेन्टिलेटर की सुविधा नहीं है। भीमगंजमंडी व कुन्हाड़ी सीएचसी में भी भर्ती की सुविधा नहीं है। जबकि कुन्हाड़ी में भी सीएचसी का हाल ही में नया भवन बना है।

न कोरोना जांच की सुविधा और न सिटी स्कैन मशीन

रामगंजमंडी उपखण्ड में सात प्राथमिक, चार सामुदायिक चिकित्सालय होने के बावजूद सरकार के बेहतर चिकित्सा सुविधा के दावे खोखले नजर आते है। गम्भीर रोगियों को कोटा, झालावाड़ चिकित्सालय रैफर किया जा रहा है। रामगंजमंडी सामुदायिक चिकित्सालय में 16 चिकित्सकों के एवज में 6 चिकित्सक सेवा दे रहे है। कोरोना जांच की उपखण्ड में कोई व्यवस्था नहीं है। सेम्पल लेने कोटा से चिकित्साकर्मी आते है। रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग रहे है। प्राथमिक चिकित्सालय एक चिकित्सक के भरोसे है। चेचट, मोड़क, सुकेत सामुदायिक चिकित्सालयों में चिकित्सक का टोटा है। कोविड जांच के सीबीसी एसीआरपी जांच व रोगी में संक्रमण की मात्रा कितनी है, इसकी जांच जांच व सिटी स्केन से पता कि जाती है। पूरे उपखण्ड में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने से रोगी को जांच के लिए कोटा, झालावाड़ जाना पड़ रहा है। अल्प संसाधनों के बावजूद रामगंजमंडी में खुले कोविड सेंटर में 85 आक्सीजन स्तर वाले मरीजों को ही भर्ती करके उनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।

एक ऑक्सीजन मशीन थी, उसे भी रामगंजमंडी ले गए

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मोड़क स्टेशन पर एक भी वेंटिलेटर नहीं है। एक ऑक्सीजन मशीन थी, उसे भी रामगंजमंडी अस्पताल ले गए। वर्तमान में उपखण्ड में सबसे अधिक कोरोना पॉजिटिव मोड़क क्षेत्र में है। कोरोना से अब तक बीस से अधिक मौत हो चुकी है। उसके बाद भी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को झालावाड़ या कोटा रैफ र किया जा रहा है। केन्द्र अधीक्षक पंकज राठौर ने बताया है कि एक-दो दिन में अस्पताल में कोविड वार्ड शुरू कर कोरोना मरीजों का उपचार शुरू कर दिया जाएगा।

गद्दे फ टे, उधारी के डॉक्टर से होता इलाज

चेचट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी का लम्बे समय से पद रिक्त होने के अभाव में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही है। जिससे क्षेत्र के लोगों को पूर्ण चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। केन्द्र पर चिकित्सक के पांच पद स्वीकृत है, लेकिन चिकित्सालय में एक भी चिकित्सक कार्यरत नहीं होने के कारण उधार के चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। केन्द्र के पांच नर्सिंगकर्मी वर्षो से डेपुटेशन पर होने से चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही है। ऐसी स्थिति में दुर्घटना में घायल मरीजों को ओपीडी समय के बाद समुचित चिकित्सा उपचार नहीं मिल पाता है। केन्द्र पर 100 गांवों की चिकित्सा व्यवस्था निर्भर है। एएनएम के भी पद रिक्त है। प्रसूति सेवाएं खेड़ली उपस्वास्थ्य केंद्र की एएनएम द्वारा संचालित है। वार्ड के हालात चिन्ताजनक है। वार्ड में पांच सात पलंग है। इनमें गद्दे फ टे हुए है। गद्दों पर चादर की व्यवस्था नहीं है। यहां वार्ड केवल प्रसूताओं के लिए उपयोग होता है। दूसरे रोगियों को चिकित्सक के अभाव में भर्ती नहीं किया जाता। केन्द्र पर मोर्चरी नहीं होने व चिकित्सक के अभाव में शवों का पोस्टमार्टम मोड़क या मुक्तिधाम में किया जाता है।

एक एम्बुलेंस, लेकिन वह भी खटारा

सांगोद सीएचसी केन्द्र पर आसपास के गांवों के औसतन रोजाना करीब 300 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सा सुविधाओं की बात करें तो बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही। केंद्र से सांगोद में ज्यादातर मरीजों को कोटा रैफ र किया जा रहा है तो यहां मरीजों को एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं मिलती। अस्पताल में बरसों पुरानी एक छोटी खटारा एंबुलेंस है, जो कब रास्ते में बंद हो जाए, कहां नहीं जा सकता। ऐसे में इस एंबुलेंस का उपयोग मरीजों को रैफ र करने के बजाय सिर्फ अस्पताल के कामकाज में किया जा रहा है। केन्द्र पर जांच सुविधाएं भी ठप पड़ी हुई है। इससे मरीजों को निजी जांच केंद्रों में मनमाने दामों में जांच करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

एक भी वेंटिलेटर व बायपेप उपलब्ध नहीं

सुल्तानपुर सीएचसी में एक भी वेंटिलेटर व बायपेप उपलब्ध नहीं है। 45 बेड है इनमें 15 पलंगों का कोविड वार्ड बनाया हुआ है। केंद्र में रोजाना करीब 450 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीबन 40 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जबकि चिकित्सालय में मात्र 22 ही ऑक्सीजन सिलेंडर है। इस कारण मरीजों को कोटा रैफर किया जाता है। कुल 7 चिकित्सक कार्यरत हैं। उनमें से दो कोरोना संक्रमित है तो एक को कोटा में कोविड सेंटर लगाया हुआ है। महज 4 चिकित्सक सीएचसी को संभाल रहे हैं। चिकित्सालय में परमानेंट व संविदा के मिलाकर 17 नर्स हैं। जिनमें 5 महिला और 12 पुरुष है। इनमें में 4 संविदा पर कार्यरत स्टाफ को अन्यत्र प्रतिनियुक्ति पर लगाया हुआ है। चिकित्सालय में 8 नर्सेज स्टाफ की जरूरत है।

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