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बदहाल हो गए रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम

बरसाती पानी को सहेजने की मंशा से यहां बड़े-भूभाग में बने सरकारी भवनों में सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बनवाए गए रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है। हालत यह है कि छतों के पानी को सतह तक पहुंचाने के लिए कई भवनों में लगे पाइप टूटे पड़े है तो कई भवनों के पाइप उखड़ गए

कोटा

Published: May 07, 2022 04:53:38 pm

सांगोद (कोटा). बरसाती पानी को सहेजने की मंशा से यहां बड़े-भूभाग में बने सरकारी भवनों में सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बनवाए गए रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है। हालत यह है कि छतों के पानी को सतह तक पहुंचाने के लिए कई भवनों में लगे पाइप टूटे पड़े है तो कई भवनों के पाइप उखड़ गए है। एक से डेढ़ महिने बाद बारिश का दौर शुरू होने वाला है।
बदहाल हो गए रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम
बदहाल हो गए रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम
ऐसे में इन भवनों की छत पर जमा होने वाला बारिश का सारा पानी फिर व्यर्थ बहेगा। उल्लेखनीय है कि यहां कई सरकारी भवन बड़े भू-भाग में बने हुए है। बारिश के दौरान इन भवनों की छतों पर बारिश का अथाह पानी बहकर नालियों में व्यर्थ बह जाता है। सरकार की ओर से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम अनिवार्य करने के बाद यहां वर्ष 2018 में सरकार ने लाखों रुपए खर्च कर कई बड़े सरकारी भवनों पर वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम स्थापित करवाए। सरकार की मंशा थी की इससे भवनों की छतों से बहकर जाने वाला बरसाती पानी सिस्टम के जरिए भूमि में पहुंचेगा, जिससे भूजल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी।
टूटे पाइपों से व्यर्थ बहेगा पानी : सरकारी योजना के तहत यहां कई सरकारी स्कूल, तहसील भवन आदि में करीब डेढ़ से दो लाख रुपए की लागत से रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग सिस्टम लगवाए गए। इसमें भवनों की छतों पर पानी निकासी के लिए बने मौखों को प्लास्टिक पाइप से जोड़कर पाइपों को जमीन पर बने गड्ढे से जोड़ा गया। बारिश के बाद भवनों की छत का सारा पानी व्यर्थ बहने के बजाय गड्ढे के जरिए जमीन में जाने लगा, लेकिन मौजूदा समय में यहां अधिकांश भवनों पर पाइप टूटे हुए है। जिससे बारिश होने के बाद सारा पानी फिर व्यर्थ बहेगा।

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