राज्य भर में नही मिलेगा ऐसा दुर्लभ मामला ! एक गरीब पिता,तीन बेटियां ,तीनो को गंभीर डायबिटीज

चिकित्सक का दावा, राज्य में ऐसे मामले नहीं हुए रिपोर्ट ...डॉ. रामचंदानी ने बताया कि तीनों लड़कियों को बारह वर्ष की उम्र में ही मधुमेह हुआ

By: Suraksha Rajora

Published: 18 Dec 2018, 03:58 PM IST

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. एक ही परिवार की तीन बेटियों के टाइप वन मधुमेह का मामला सामने आया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर बसे शिवपुरी जिले के अटलपुर के मुनीष धाकड़ की चार में से तीन बेटियों के अचानक मधुमेह होने की घटना ने डॉक्टरों को चौंका दिया है। इस तरह का संभवत: यह राज्य का पहला मामला है। एक ही परिवार में सगे भाई-बहनों में दो बच्चों के टाइप वन डायबिटीज के अनेक मामले सामने आ चुके हैं।

 

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निर्धन किसान परिवार के इन बच्चों को डायबिटिक बच्चों की मदद करने वाली संस्था दोस्त की ओर से इंसुलिन, ग्लूकोमीटर समेत उपचार के सामान और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने वायरल से बने एंटीबॉडीज को ही इसका कारण माना है। इन बेटियों के पिता मुनीष धाकड़ ने बताया कि उनकी चार पुत्रियों में से एक का विवाह हो चुका है। वह पूर्ण स्वस्थ है। अठारह वर्षीय दूसरी पुत्री ज्योति की अचानक तबीयत बिगडऩे पर करीब छह साल पहले डॉक्टर ने जांच कराई तो उसका ब्लड शुगर लेवल 676 था। इसका उपचार शुरू किया गया।

 

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पिछले दिनों उनकी बारह वर्षीय तीसरी बेटी पूनम की जांच कराई तो उसे भी मधुमेह निकला। दो बेटियों के बाद उन्होंने औचक ही चौथी बेटी चांदनी की जांच कराई तो वह भी डायबिटिक निकली। इससे पूरा परिवार ही सन्न रह गया। वे अपनी तीनों बेटियों को लेकर कोटा पहुंचे और यहां वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जीडी रामचंदानी को दिखाया। डॉ. रामचंदानी ने बताया कि इन लड़कियों के परिवार में किसी को भी मधुमेह होने की जानकारी नहीं है।


ऐसी मजबूरी...


मुनीष सीमांत किसान है। उसके पास जरा सी जमीन है, जिससे वह अपनी तीन बेटियों का उपचार नहीं करा सकते हैं। ऐसे में इनका मददगार बनी दोस्त संस्था। संस्था की ओर से दवा, इंसुलिन इत्यादि दिए गए हैं। मुनीष ने बताया कि इन तीनों के लिए उन्हें काफी मात्रा में इंसुलिन रखना पड़ता है। घर में फ्रिज नहीं होने से वे इंसुलिन को पॉलिथिन में बंद कर उसे छोटी मटकी में पानी के बीच रखना पड़ता है। इस मटकी को भी पानी वाले बर्तन में रखा जाता है।

 

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डॉ. रामचंदानी ने बताया कि जन सहयोग से छोटे फ्रिज की व्यवस्था के प्रयास किए जाएंगे। इंसुलिन को न्यूनतम तापमान में नहीं रखने पर वे खराब हो जाते हैं।डॉ. रामचंदानी ने बताया कि तीनों लड़कियों को बारह वर्ष की उम्र में ही मधुमेह हुआ है। कारण की जांच कराई जा रही है। प्राथमिक तौर पर वायरल के कारण ऐसा होना लगता है। वायरल होने पर शरीर में एंटी बॉडीज बनती है, यह वायरल एंटीजन और बीटा सेल एंटीजन में फर्क नहीं कर पाते हैं और बीटा सेल को नष्ट कर देते हैं। इससे इन्सुलिन बनना बंद हो जाता है। जन्म के समय कम वजन के बच्चों में भी यह खतरा अधिक रहता है। इन बच्चों का जन्म के समय सामान्य वजन था। इसलिए वायरल की आशंका अधिक है।

 

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डॉ. रामचंदानी के अनुसार इस तरह का मामला राज्य में अभी तक कहीं रिपोर्ट नहीं हुआ है। इसमें एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों अथवा रक्त संबंधी में को टाइप वन डायबिटीज हुआ हो। उन्होंने कहा कि जयपुर, जोधपुर, उदयपुर में विभिन्न चिकित्सकों से बात की और इंटरनेट के जरिए भी इस तरह के मामले सर्च किए, राज्य में ऐसा मामला नहीं मिला। राज्य में ऐसा दुर्लभ मामला नहीं मिला

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