indian railways: तवा रेलवे ब्रिज और बागरातवा सुरंग से डेढ़ सौ साल से गुजर रही ट्रेनें

जबलपुर से इटारसी रेलखंड में नर्मदा नदी की सबसे बड़ी सहायक तवा नदी है। इस रेल लाइन पर सबसे पुराना तवा ब्रिज एवं बागरातवा सुरंग का कार्य ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन के तकनीकी सहयोग से 19 महीने में 8 मार्च 1870 को पूरा किया गया था। इस ऐतिहासिक पुराने पुल को 150 वर्ष पूर्ण हो गए हैं।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 11 Sep 2021, 10:36 PM IST

कोटा. पश्चिम मध्य रेलवे में डेढ़ सौ साल पुराने तवा पुल और बागरातवा सुरंग से ट्रेनें अभी भी गुजर रही हैं। स्वतंत्रता से पहले भारत में ईस्ट इंडिया रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे ने रेलगाड़ी चलाने और रेल लाइन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर 150 वर्ष पहले सन 1870 में मुंबई और कलकत्ता के बीच पहली बार रेल संपर्क के लिए लाइन को जबलपुर में जोड़ा गया। गौरतलब है कि जबलपुर से इटारसी रेलखंड में नर्मदा नदी की सबसे बड़ी सहायक तवा नदी है। इस रेल लाइन पर सबसे पुराना तवा ब्रिज एवं बागरातवा सुरंग का कार्य ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन के तकनीकी सहयोग से 19 महीने में 8 मार्च 1870 को पूरा किया गया था। इस ऐतिहासिक पुराने पुल को 150 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में नर्मदा घाटी की मिट्टी एवं तवा नदी के रेतीले तल को पार करना था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कार्य, सुरंग के बाई ओर लगभग 300 मीटर वक्र है। तवा ब्रिज और बागरातवा सुरंग आज भी सोनतलाई और बागरातवा स्टेशनों के बीच ट्रेक के आठ किलोमीटर के हिस्से पर है। यह पश्चिम मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण ब्रिजों में से एक अहम धरोहर के रूप में है। जिसे सन 1927 में गर्डर भी बदला गया। यह पुल तवा नदी पर तवा बांध से 7 किमी की दूरी पर स्थित है। इस पुल में 132 फिट के 2 स्पान और 202 फिट के 4 स्पान के नीचे वेब गर्डर है। इसके साथ 5 नग पियर और 2 नग एबटमेंट जो तत्कालीन समय की एशलर महीन चिनाई से बनी है। पुल की ऊंचाई 22 मीटर है। अब इस खण्ड के दोहरीकरण का कार्य भारतीय रेल द्वारा फरवरी 2020 में कमिशन किया। वर्तमान समय में पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा तवा नदी पर एक अतिरिक्त नया तवा ब्रिज का निर्माण किया गया है। आज की तारीख में तवा नदी पर अप और डाउन रेल लाइन बनाकर रेलखण्ड की क्षमता में वृद्धि हुई है।

Jaggo Singh Dhaker
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