कोटा मंडल में ट्रेन संचालन नई सिग्नल व्यवस्था से होगा

लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को सिग्नल अब दूर से ही दिखाई देंगे। इससे मानवीय भूलों के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

By: Jaggo Singh Dhaker

Published: 01 Aug 2020, 10:55 AM IST


कोटा. कोटा रेल मंडल में सिग्नल तंत्र को नई तकनीक में अपग्रेड करने की महत्वपूर्ण परियोजना को पूरी हो गई है। कोटा-चित्तौडग़ढ़ खंड की पुरानी मैकेनिकल सिग्नलिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सुरक्षित एवं नवीनतम इलेक्ट्रोनिक सिग्नलिंग व्यवस्था में बदल दिया गया है। रेल प्रशासन ने दावा किया है कि अब अति आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था लागू होने से माल यातायात एवं यात्री गाडिय़ों का संचालन ज्यादा सुरक्षित हो गया है। लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को सिग्नल अब दूर से ही दिखाई देंगे। इससे मानवीय भूलों के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में बहुत मदद मिलेगी। इस परियोजना के अन्तर्गत कोटा-चित्तौडग़ढ़ खंड के सभी स्टेशन एवं इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग गेट के सभी यांत्रिक सिग्नल के स्थान पर कलर लाइट सिग्नल लगा दिए गए हैं। इस खण्ड के सभी 10 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग अथवा इलेक्ट्रोनिक इंटरलॉकिंग में बदल दिया गया है। सभी ब्लॉक खण्डों को टोकनलेस एक्सल काउंटर पद्धति से जोड़ दिया गया है। अब कोटा मंडल के नागदा-मथुरा मेन लाइन एवं दोनों ब्रांच लाइन कोटा-रुठियाई और कोटा-चित्तौडग़ढ़ खण्ड के सभी सिग्नल कलर लाइट सिगनलिंग वाले हो गए हैं।

सिग्नल फेल होने की संभावना घटी

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह सिस्टम अत्याधुनिक है अत: इसके फेल होने की बेहद कम संभावनाएं हैं। इसमें दो सिस्टम एक साथ लगे हुए हैं। एक सिस्टम के फेल होने पर दूसरा सिस्टम अपने आप कार्य करने लग जाता है। जिससे रेल यातायात प्रभावित नहीं होगा। इस आधुनिकीकरण से कोटा-चित्तौडग़ढ़ खण्ड का रेल विद्युतिकरण का कार्य भी तीव्र गति से हो पाएगा।

यह परियोजना विश्व की बेहतर सिग्नलिंग व्यवस्थाओं के समकक्ष है। अत: कोटा मंडल की ओर से उठाया गया यह कदम रेलवे आधुनिकीकरण में मील का पत्थर साबित होगा।
-अजयकुमार पाल, प्रवक्ता, कोटा रेल मंडल

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