scriptTreatment of burning flame in Kota's private hospital | जिंदगी भर का दे गया गम, फिर भी हौसला नहीं कम | Patrika News

जिंदगी भर का दे गया गम, फिर भी हौसला नहीं कम

बारां जिले के मांगरोल निवासी किशोरी ज्योति पंकज जिन दो हाथों से पढ़-लिखकर तकदीर संवारना चाहती थी। उसका एक हाथ नहीं रहा। जिंदगी भर का गम होने के बावजूद ज्योति का हौसला कम नहीं हुआ। कोटा के विज्ञाननगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती ज्योति घटना को याद करते हुए बोली, दुनिया में ऐसे कई लोग है जो दुर्घटना में दोनों हाथ-पैर गंवा चुके हैं, लेकिन वे अपनी तकदीर खुद लिखते है। मैं भी शिक्षक बनकर अपनी तकदीर लिखूंगी।

कोटा

Published: December 02, 2021 09:27:41 pm

कोटा. बारां जिले के मांगरोल निवासी किशोरी ज्योति पंकज जिन दो हाथों से पढ़-लिखकर तकदीर संवारना चाहती थी। उसका एक हाथ नहीं रहा। जिंदगी भर का गम होने के बावजूद ज्योति का हौसला कम नहीं हुआ। कोटा के विज्ञाननगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती ज्योति घटना को याद करते हुए बोली, दुनिया में ऐसे कई लोग है जो दुर्घटना में दोनों हाथ-पैर गंवा चुके हैं, लेकिन वे अपनी तकदीर खुद लिखते है। मैं भी शिक्षक बनकर अपनी तकदीर लिखूंगी। परिवार को ऐसी बेटी पर नाज है। ज्योति के परिजन बोले कि वे बिटिया का सपना पूरा करने में पूरा सहयोग करेंगे।
ज्योति बोली: मेरा तो एक हाथ कटा है, लोगों के दोनों हाथ भी नहीं होते
जिंदगी भर का दे गया गम, फिर भी हौसला नहीं कम
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बारां अस्पताल में आई थी
ज्योति की तबीयत खराब होने पर वह सहेली कृष्णा बैरवा के साथ बुधवार को बारां में चिकित्सक को दिखाने आई थी। चिकित्सक को दिखाकर दोनों बारां-श्योपुर बस में गांव जाने के लिए बैठ गई। करीब 3 बजे मांगरोल रोड पर मिवाड़ा कुंड के पास बस चालक ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को ओवरटेक किया। ओवरटेक के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली के बिट से टकराने से हाथ कंधे के पास से कटकर नीचे गिर गया।
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चिल्लाते रहे यात्री, दौड़ती रही बस
ज्योति हाथ कटने के बाद वह तड़पने लगी। दोस्त कृष्णा ने उसे संभाला। घटना के बाद यात्री चालक से बस रोकने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन चालक ने घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर जाकर बस रोकी और मदद करने के बजाय उसे बस से नीचे उतारकर रवाना हो गए। ज्योति सड़क पर तड़पती रही। वहां भीड़ जुट गई। कृष्णा लोगों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कुछ युवतियां घटना को देखकर रुकी। वे उन्हें स्कूटी पर बिठाकर बारां अस्पताल शाम 4 बजे लेकर पहुंची। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे कोटा रैफर किया। कोटा में भी अलग-अलग अस्पतालों में घूमने से बालिका को तीसरे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तब तक ज्यादा समय गुजर जाने से हाथ नहीं जोड़ा जा सका।
परिवार की लाडली बिटिया
पिता अमरचंद मंगल ने कहा कि तीन बच्चों में ज्योति सबसे छोटी है। ज्योति का बड़ा एक भाई दीपक व बहन शीला है। वह परिवार में सबकी लाडली है।

मानवता व संवेदनशीलता नहीं दिखाई
मां बिनासी बाई ने कहा कि बस चालक ने मानवता व संवेदनशीलता दिखाई होती तो मेरी बेटी को हाथ नहीं गंवाना पड़ता। भाई दीपक मंगल ने कहा कि संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में भी चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तो ऐसे अस्पताल होने का क्या फायदा।
नियम विरुद्ध लगाया था डाला
जिला परिवहन अधिकारी महावीर पंचौली ने बताया कि ट्रॉली में डाला (अतिरिक्त भार) लादने की क्षमता बढ़ाना नियम विरुद्ध है। विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की जाती है।
प्रशासन ने ली खैर खबर
राजस्थान पत्रिका में गुरुवार को प्रकाशित खबर के बाद तहसीलदार रामस्वरूप पंकज ने ज्योति के परिवार की खैर खबर ली। उन्होंने परिजन को राज्य सरकार के दुर्घटना बीमा के तहत मदद दिलाने का भरोसा दिलाया।
चालक के खिलाफ करेंगे कार्रवाई
बारां डिपो की आगार प्रबंधक सुनीता जैन का कहना है कि इस मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर बस चालक रामेश्वर पूरबिया के खिलाफ कार्रवाई की जएगी।

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