यात्रीगण कृपया ध्यान दें ! टॉयलेट में बर्फ की सिल्ली, गंदे हाथ..बहता पसीना...ऐसे माहौल में बनता है रेलवे का खाना

Suraksha Rajora

Publish: May, 02 2019 07:19:50 PM (IST) | Updated: May, 02 2019 07:23:11 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India


कोटा. भईया मेनू है क्या? हां है. खाने में क्या-क्या है? सर वेज और नॉनवेज दोनों है, आप ऑर्डर करें. अच्छा एक फुल प्लेट वेज ला देना, और ठंडी लस्सी ...अक्सर जब आप ट्रेन में सफर कर रहे होते हैं तो खाने के ऑर्डर के लिए इस तरह की बातचीत आपके और वेटर के बीच होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि वेटर ऑर्डर पर जो खाना आपको लाकर देगा वह कितना शुद्ध है, तो इसका जवाब आप नहीं में देंगे। शायद आप नहीं जानते कि ट्रेन में आपको परोसा जाने वाला खाना आपको कई बीमारियां दे सकता है। पत्रिका टीम ने जायजा लिया तो कुछ ऐसी ही सच्चाई सामने आई जिसे देखकर आप भी चौंक जायेंगे ।

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रेलवे की ओर से यात्रियों को तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन ट्रेनों में खान-पान के नाम पर यात्रियों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। इसकी बानगी कोटा जंक्शन पर देखने को मिला। यहां पेन्ट्रीकार में बर्फ की सिल्ली चढ़ाई गई, इसे ठेले से उतारकर टॉयलेट के पास रख दिया गया। काफी देर तक सिल्ली वहीं रखी रही। बाद में कार्मिकों ने उसे अंदर ले जाकर रख दिया। टॉयलेट के पानी से खाना बनने में उपयोग वाली बात सामने आती रहती है बावजूद इसके प्रसाशन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया ।


देखकर भी अनदेखी


जिस समय यह सब हो रहा था, तब आईआरसीटीसी के मैनेजर भी वहीं थे और सबकुछ देख रहे थे। उन्होंने पेंटीकार के कार्मिकों को टोका तक नहीं। यह बर्फ ट्रेन में शीतल पेय पदार्थों को ठंडा करने के काम लिया जाता है। लस्सी, छाछ, रायते को ठंडा करने में भी उसका उपयोग होता है।


गंदगी में बनता खाना


संवाददाता ने पेन्ट्रीकार में झांककर देखा तो जहां खाना बनता है, वहां काफी गंदगी नजर आई। वहीं आईआरसीटीसी के मैनेजर ने पेन्ट्रीकार के अंदर देखा तक नहीं। इसी बीच एक अवैध वैंडर खाना देने ट्रेन पर पहुंचा तो मैनेजर कमलेश कुमार ने उसे टोका और आईडी मांगी तो उसके पास आईडी नहीं मिली। इसके बाद तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। ट्रेन जाने के बाद आईआरसीटीसी के मैनेजर से पूछा तो उन्होंने अवैध वैंडर पर जुर्माना करने की बात कही।


पुरानी सामग्री से बनाते हैं खाना


अवैध वैंडर से खाना मंगवाने के मसले पर जब ट्रेन के यात्रियों से बात की तो आगरा जा रहे वी.के. पाण्डेय ने बताया कि ट्रेनों में यात्रियों को जो नाश्ता और खाना दिया जाता है, वह कई दिनों पुरानी सामग्री से बनकर तैयार होता है। इसलिए यात्री बाहर से ही खाना मंगवाने को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा ट्रेनों के पेन्ट्रीकार में साफ -सफ ाई का भी कोई ध्यान नहीं रखा जाता। ऐसे में खाने की सामग्री को फ र्श पर ही रखने के कारण उसमें गंदगी पनपने लगती है।

 

शानदार रैक, लेकिन बेडरोल देख मुंह सिकोड़ लेते हैं यात्री

 

कोटा. कोटा-उधमपुर-कोटा एक्सप्रेस और वैष्णोदेवी कटरा एक्सपे्रस के एलएचबी रैक के साथ चलने से यात्रियों को सफर के दौरान कोचों में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। ट्रेन में सामान्य श्रेणी के यात्रियों के लिए दीनदयालू कोच लगाए हैं, जो पहले की तुलना में काफी सुविधाजनक है।


इस रैक से कोटा-उधमपुर और कोटा-कटरा के बीच दो सप्ताहिक ट्रेनों का संचालन हो रहा है। बेहतर रखरखाव के चलते इस ट्रेन को जोनल स्तरीय बेस्ट रैक अनुरक्षण पुस्कार से नवाजा गया। इसके बाद भी इसमें सफर करने वाले यात्रियों के मन में टीस है, वह इसमें मिलने वाले बेडरोल की गुणवत्ता। इस ट्रेन के रैक को पुरस्कृत किए जाने के बाद पत्रिका संवाददाता ने इसकी हकीकत जानी तो रैक का रखरखाव बेहतर मिला।

 

इससे यात्री भी संतुष्ट थे, लेकिन जब बेडरोल देखी तो पता चला तकिए फटे हुए हैं और चादरों की धुलाई की गुणवत्ता भी ज्यादा अच्छी नहीं मिली। ट्रेन में मौजूद स्टाफ ने बताया कि बेडरोल की धुलाई बेहतर की जाती हैे, कभी कोई तकिया फट जाता है या चादर गंदी निकल आती है तो उसे यात्रियों की शिकायत पर तत्काल बदल दिया जाता है।

 

वैष्णोदेवी जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी लोकप्रिय है। कोटा जंक्शन से चलने वाली इस ट्रेन में हाड़ौती संभाग के अलावा बयाना, गंगापुर सिटी और भरतपुर के यात्री भी माता वैष्णोदेवी जाने के लिए कटरा तक सफर करते हैं।



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