जंग लगने से जाम हुए बांध के स्लूज गेट

राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट सी गाडइ पर जंग लगने से जाम हो गए हैं। गेट के तले में मिट्टी जमी हुई है। यह खुलासा राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट की प्रारंभिक वीडियोग्राफी में हुआ। राणा प्रताप सागर बांध का निर्माण 1970 में हुआ था। करीब 35 सालों से बांध के चारों स्लूज गेट नहीं खुल रहे हैं। गेट नहीं खुलने से विभाग ने वीडियोग्राफी का कार्य शुरू करवा दिया है।

DILIP VANVANI

December, 0510:20 AM

रावतभाटा. राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट सी गाडइ पर जंग लगने से जाम हो गए हैं। गेट के तले में मिट्टी जमी हुई है। यह खुलासा राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट की प्रारंभिक वीडियोग्राफी में हुआ। राणा प्रताप सागर बांध का निर्माण 1970 में हुआ था। करीब 35 सालों से बांध के चारों स्लूज गेट नहीं खुल रहे हैं। गेट नहीं खुलने से विभाग ने वीडियोग्राफी का कार्य शुरू करवा दिया है।

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वीडियोग्राफी का कार्य देव कंस्ट्रक्शन एंड डाइविंग सर्विस हापुर उत्तर प्रदेश कर रही है। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि वीडियोग्राफी का कार्य सुबह करीब 11 बजे सिचाई विभाग के कार्यवाहक अधीक्षक अभियंता एचके सोमानी, एईएन सोनू कुमार, जेईएन दीपाशु चौधरी की मौजूदगी में शुरू किया गया। डाइविंग सुपरवाइजर रकमसिंह विशेष प्रकार के बनाए लोहे के पिंजरे में कैमरा लेकर साथ गए। इसके बाद उन्हें पानी में उतारा गया। उन्होंने स्लूज गेट के एक साइड की सी गाइड की वीडियोग्राफी की। इसमें पाया गया कि सी गाइड पर जंग लग गई है। इसी कारण से गेट जाम हो गए। वीडियोग्राफी के लिए कंपनी के कर्मचारी 120 फीट तक ही जा पाए। इसके नीचे मिट्टी जमी हुई है। बांध के ऊपर कंट्रोल रूम बनाया गया था। कंट्रोल रूम में सीसीटीवी लगाई है। दोपहर बाद वीडियोग्राफी के लिए पानी में अंडर वाटर स्पेशलिस्ट अर्जुन पंडित को उतारा गया। चारों गेटों की वीडियोग्राफी के लिए दस दिन लगेंगे। इस दौरान चारों गेटों को देखा जाएगा। गेटों के नीचे के हिस्से की भी जांच की जाएगी कि गेट कहां-कहां से टूटा हुआ है। यह क्यों नहीं खुल रहे हैं। पूरी वीडियोग्राफी को पेनड्राइव में डाला जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पूरणचंद मेघवाल को हार्ड कॉपी के साथ पेनडाइव सौंपा जाएगा।

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वीडियोग्राफी के लिए यह लाए
स्लूज गेटों की वीडियोग्राफी के लिए कंपनी अपने साथ 2 सीसीटीवी कैमरे, कम्प्यूनिकेशन बॉक्स, अंडर वाटर हेलमेट, सांस लेने के लिए 100 मीटर लम्बा पाइप, सांस लेने के लिए कम्प्रेशर आदि सामान लेकर आए हैं।
रात को ही टीम पहुंच गई
बांध की वीडियोग्राफी के लिए टीम के सदस्य मंगलवार रात को ही पहुंच गए थे। इस दौरान टीम के सदस्यों ने रात को ही बांध के चारों गेटों की स्थिति देखना शुरू कर दिया था। सुबह टीम के सदस्य 9.30 बजे ही बांध पर पहुंच गए। यहां पर पूजा अर्चना की गई। इसके बाद टीम ने वीडियोग्राफी की तैयारियां शुरू कर दी। सुबह 11 बजे वीडियोग्राफी शुरू कर दी।
अप्रेल मेें शुरू होगा जीर्णाद्वार का कार्य
राणा प्रताप सागर बांध के रखरखाव और मरम्मत जीर्णाद्वार का कार्य डेम रिहेबिलिटेशन एंड इंप्रुवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) का कार्य अप्रेल क शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत बांध के 17 बड़े व 4 स्लूज गेट बदले जाएंगे।

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