विजय दिवस पर विशेष : डाक टिकट पर 4 महीने पहले ही आजाद हो गया था बांग्लादेश

भारत और बांग्लादेश के लिए 16 दिसम्बर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन पाकिस्तान के हजारों सैनिकों ने समर्पण कर बांग्लादेश के निर्माण की नींव को पुख्ता कर दिया था।

By: ​Zuber Khan

Published: 16 Dec 2019, 02:02 PM IST

सुरक्षा राजौरा. कोटा. भारत और बांग्लादेश के लिए 16 दिसम्बर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन पाकिस्तान के हजारों सैनिकों ने समर्पण कर बांग्लादेश के निर्माण की नींव को पुख्ता कर दिया था। मजेदार बात यह कि बांग्लादेश में इससे करीब चार महीने पहले ही अपने अलग देश के रूप में डाक टिकट जारी कर दिए थे। इसमें भी ब्रिटेन भी मददगार था, जो भारत पाक विभाजन में पाकिस्तान का साथ दे रहा था। वे बाद में बांग्लादेश के निर्माण में मुक्तिवाहिनी के सहयोगी हो गए। कोटा के डाक टिकट संग्रहक नरेन्द्र जैरथ के पास यह दुर्लभ डाक टिकट संग्रह में मौजूद है।

Read More: बड़ी खबर: बिगबॉस फेम फिल्म अभिनेत्री पायल रोहतगी को 24 दिसम्बर तक जेल, बूंदी की जेल में कटेंगे 9 दिन

पूर्वी पाकिस्तान से अपनी आजादी की लड़ाई के दौरान मुजीबनगर सरकार ने आजाद किए इलाकों में अपने फील्ड ऑफिसर बना दिए थे। बांग्लादेश के गठन के चार महीने पहले 29 जुलाई 1971 को आठ डाक टिकट का सेट व प्रथम दिवस अनावरण जारी किया गया। प्रथम दिवस अनावरण पर तब स्टेम्प्स ऑफ बांग्लादेश सेन्ट्रल पोस्ट ऑफिस की मुहर भी लगाई गई थी। इसमें दस पैसे के डाक टिकट पर बांग्लादेश का नक्शा, बीस पैसे के टिकट पर ढाका विवि नरसंहार, पचास पैसे के टिकट पर 75 मिलियन देशवासियों का देश, एक रुपए के टिकट पर बांग्लादेश का झंडा, दो रुपए के टिकट पर 98 फीसदी चुनावी विजय, तीन रुपए के टिकट पर आजादी का शंखनाद स्वत: टूटती बेडिय़ों को दर्शाया गया था। पांच रुपए के टिकट पर शेख मुजीर्बुरहमान, दस रुपए के टिकट पर बांग्लादेश के नक्शे के साथ सपोर्ट बांग्लादेश लिखा गया था। इन टिकटों के डिजाइन बीमन मल्लिक ने बनाए थे। जैरथ ने 1971 में इन डाक टिकटों को कलकत्ता के बांग्लादेश मिशन सेन्ट्रल पोस्टऑफिस से मंगवाया था।

Read More: बचपन के दोस्त शहीद मुकुट कमांडो के स्मारक के पास होगा कमांडो राजेन्द्र का अंतिम संस्कार, झालावाड़ पहुंचे सेना के जवान

ब्रिटिश सांसद ने छपवाए थे
डाक टिकट के पीछे ब्रिटिश सांसद जोन स्टोनहाउस का हाथ था। उन्होंने अपने स्तर पर इन डाक टिकटों को खुद के खर्च पर छपवा कर इन्हें बेच कर आंदोलन के लिए धन अर्जित करना शुरू किया। वे यूरोप में इस आंदोलन को लोकप्रिय करने में भी इसका उपयोग करते रहे। ये डाक टिकट बिना किसी वाटरमार्क के लिथोग्राफिक तरीके से बनाए गए और इंग्लैण्ड में 1.09 पाउण्ड में बेचे गए।

Read More: कमांडो राजेन्द्र की मौत की सूचना पत्नी को देने का साहस नहीं कर सके परिजन, बुआ की चित्कार से कांप उठा कलेजा

ऐसे हुए जारी, फिर चली कहानी
29 जुलाई को डाक टिकट जारी करने की सूचना कलकत्ता में 26 जुलाई को एम्बेसडर हुसैनअली ने प्रेस कांन्फ्रेस कर दी थी। डाक टिकट कलकत्ता और लंदन में एक साथ जारी हुए थे। युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद 20 दिसम्बर 1971 से ये टिकट ढाका जीपीओ से मिलने शुरू हो गए थे। पहले इन पर रुपए ही अंकित था, जो बाद में टका लिखा जाने लगा।

Show More
​Zuber Khan
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned