पढ़ाई की ख्वाहिश पर चली कायदों की कैंची

काम-काज के साथ पढ़ाई करने की ख्वाहिश रखने वाले छात्रों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक और तुगलकी फैसले की गाज गिरी है।

By: shailendra tiwari

Published: 11 Jul 2016, 02:57 PM IST

काम-काज के साथ पढ़ाई करने की ख्वाहिश रखने वाले छात्रों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक और तुगलकी फैसले की गाज गिरी है। 


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मुक्त विश्वविद्यालयों के लिए गाइड लाइन तैयार करने वाली यूजीसी की इकाई डिस्टेंस एज्युकेशन बोर्ड (डैब) ने पीपीपी मोड में डिस्टेंस एज्युकेशन सेंटर (अध्ययन केंद्र) चलाने पर रोक लगा दी है। जिसके बाद वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय ने पीपीपी मोड में चल रहे सभी स्टडी सेंटर बंद कर दिए हैं। 


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जनवरी सत्र तक वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) पूरे प्रदेश में करीब 209 स्टडी सेंटर संचालित करता था। जिसमें से 50 स्टडी सेंटर राजकीय महाविद्यालयों में और सात क्षेत्रीय केंद्रों पर संचालित किए जाते थे। वहीं करीब 145 स्टडी सेंटर पीपीपी मोड पर संचालित किए जा रहे थे। 


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विवि प्रशासन ने इन अध्ययन केंद्रों पर अपने पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए तीन-तीन साल का अनुबंध किया था। डैब इन अध्ययन केंद्रों को फ्रेंचाइजी सेंटर बता कर लंबे समय से बंद करने पर जोर दे रहा था। 


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वर्ष 2016 की शुरुआत से ही जब डैब ने इस बाबत विवि प्रशासन पर दबाब बढ़ाना शुरू किया तो विद्या परिषद ने एमओयू की अवधि पूरी होने के बाद उसे दोबारा न बढ़ाने का फैसला लिया। फैसला लागू होते ही जुलाई के प्रथम सप्ताह में 68 अध्ययन केंद्रों पर ताले पड़ गए। 


इसी बीच डैब ने 30 जून को निर्देश जारी किए कि विश्वविद्यालय सिर्फ सरकारी महाविद्यालयों और विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में ही अपने स्टडी सेंटर संचालित करें। इसके अतरिक्त यदि किसी निजी संस्थान को पीपीपी मोड में स्टडी सेंटर चलाने की अनुमति दी गई है तो उसे कर दिया जाए। 


इतना ही नहीं डैब ने विवि प्रशासन को 15 दिन में इस आदेश की पालना करने और इस बाबत एक शपथ पत्र भी यूजीसी मुख्यालय में जमा कराने के निर्देश जारी कर दिए। जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीपीपी मोड में चल रहे सभी अध्ययन केंद्रों तो बंद करने का आदेश जारी कर दिया। 


डैब ने आदेश जारी किया है कि अब सिर्फ सरकारी महाविद्यालयों और विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में ही स्टडी सेंटर संचालित किए जा सकते हैं। पीपीपी मोड में चल रहे स्टडी सेंटर को फ्रेंचाइजी सेंटर बताते हुए इन्हें तत्काल बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके बाद पीपीपी मोड में संचालित सभी स्टडी सेंटर बंद कर दिए गए हैं। 

प्रो. अशोक शर्मा, कुलपति, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय 

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