video : गौसंर्वधन व संरक्षण पर देना होगा ध्यान

गोसेवा भारत की प्राचीन संस्कृति रही है। ऋषियों-मुनियों, राजा-महाराजाओं ने गोसेवा कर पुण्य कमाया। हमें भी गोमाता की चिंता करनी होगा। देसी नस्ल की गायों का पालन करना होगा।

कोटा. गोसेवा भारत की प्राचीन संस्कृति रही है। ऋषियों-मुनियों, राजा-महाराजाओं ने गोसेवा कर पुण्य कमाया। हमें भी गोमाता की चिंता करनी होगा। देसी नस्ल की गायों का पालन करना होगा।


यह बात विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने रविवार को कोटा प्रवास के दौरान कही। उन्होंने कहा कि गोमूत्र, गोबर पर भारतीय चिकित्सकों ने कई अनुसंधान किए। 


हम शुरू से ही गोमांस के आयात-निर्यात, गोमांस के लाईसेंस के नवीनीकरण को बंद करने की मांग करते आ रहे हैं।


उन्होंने कहा कि जगत गुरु रामानुजाचार्य ने समाज में व्याप्त बुराइयों, छुआछूत को मिटाने का काम किया है। 12 मई को विहिप रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती उज्जैन महाकुंभ में मनाने जा रहा है।



इस जयंती उत्सव के तहत उज्जैन के रुद्र सागर में मध्यप्रदेश के 15-20 जिलों के 15 हजार युवाओं का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें संतों, विहिप के शीर्ष पदाधिकारियों का युवाओं को नेतृत्व मिलेगा। कार्यक्रम की शृंखला में 15 मई से पहले गोसेवकों व महिलाओं का सम्मेलन भी होगा।

shailendra tiwari Desk
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