घर की रसोई में घुस गई 'डायन' बिगड़ गया खाने का स्वाद

तेल के दाम छू गए आसमान, दाल की कीमतें बेकाबू, पेट्रोल-डीजल भी हुए महंगे

Mukesh Gaur

January, 1606:20 PM

कोटा. बेकाबू हुई महंगाई को लेकर देशभर में हल्ला मचना शुरू हो गया है। राजनीति दल महंगाई को लेकर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। इसका असर रसोई तक पहुंच गया है। दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री के दामों में बेहताशा बढ़ोतरी से रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। खाद्य तेलों में ढाई महीने में ही 20 से 30 रुपए प्रति किलो की तेजी आई है, जो अब तक की सर्वाधिक तेजी मानी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही उथल-पुथल के कारण खाद्य सामग्री में तेजी आई है। सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी कम होने से तेलों में तेजी है।

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इस कारण बढ़े भाव
आढ़तिये दीपक दलाल व गौरव जैन ने बताया कि वायदा तेज होने से दीवाली के बाद से ही भावों में वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष ज्यादा बारिश के चलते सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द की फसलें खराब हो गई थी। उत्पादन कम होने से दाम बढ़ रहे हैं। आयातित पॉम तेल के चलते बाजार में टिकाव रहता था, लेकिन 6-7 माह से विदेश से भी पॉम तेल के आयात पर लगाम लगाने से भावों में वृद्धि हुई है। लगातार पेट्रोल व डीजल के भावों में वृद्धि भी एक कारण है। दीपावली के बाद से अब तक रिफाइड तेलों में 300 रुपए प्रति टिन व दालों में भी लगभग 300 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आई है।

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तीन गुना बढ़ीं सब्जियां
कोटा थोक एण्ड फ्रूट वेजिटेबल मर्चेंट संघ के महासचिव संतोष कुमार मेहता ने बताया पिछले एक साल में सब्जियों में ढाई से तीन गुना वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण पिछले वर्ष राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में लगातार बारिश व बाढ़ के अधिकांश सब्जियां या तो नष्ट हो गई या पैदावार कम हुई। ज्यादा असर प्याज पर पड़ा। पिछले साल जनवरी में प्याज 8 से 10 रुपए किलो बिका। जबकि यही प्याज नवम्बर दिसम्बर माह में 80 से 100 रुपए किलो पहुंच गया। विदेशी प्याज भी मंडियों में पहुंचा, लेकिन भाव कम नहीं हुए। अब नया प्याज आने लगा है तो भाव 25 से 30 रुपए किलो पर आए हैं। आलू के दामों में भी पिछले साल के मुकाबले 30 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

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