संवेदनहीन तंत्र : आईसीयू में खाली था बेड, लेकिन महिला को नहीं दिया, टूट गई सांसों की डोर

ड्यूटी डॉक्टर बोला...नेता से सिफारिश करा दो, आपको बेड मिल जाएगा
परिजन ने आईसीयू में जाकर खाली बेड व वेंटिलेटर की फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाया, लेकिन फिर भी नहीं पसीजा दिल

By: shailendra tiwari

Published: 20 May 2021, 06:39 PM IST

कोटा. एमबीएस अस्पताल में एक महिला मरीज के इलाज में बड़ी लापरवाही सामने आई है। आईसीयू में बेड व वेंटिलेटर खाली होने के बावजूद महिला मरीज को नहीं दिया। परिजनों ने आईसीयू में जाकर खाली बेड व वेंटिलेटर की फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाया और परिजन दो घंटे तक डॉक्टर के सामने बेड के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन फिर भी महिला मरीज को बेड नहीं दिया गया। आखिरकार महिला मरीज की सांस टूट गई। हालांकि यह घटना बुधवार तड़के की है, गुरुवार को यह मामला सामने आया है।


मृतका के नाती चंदन ने बताया कि उसकी नानी महात्मा गांधी कॉलोनी माला फाटक गली नम्बर-2 निवासी बीना देवी (60) की 19 अप्रेल को रात 2 बजे तबीयत खराब हो गई। जांच में पॉजिटिव होने पर एमबीएस के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। नानी का ऑक्सीजन सेचुरेशन डाउन था। उन्हें ऑक्सीजन पर ले रखा था। बुधवार रात 2 बजे नानी की तबीयत बिगड़ गई।

वार्ड में मौजूद डॉक्टर ने वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने को कहा, लेकिन अस्पताल में आईसीयू व वेंटिलेटर खाली नहीं होने की बात कही। डॉक्टर ने साफ मना कर दिया कि हमारे पास वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है, आप इनको ले जा सकते हैं। आपकी किसी नेता से जान पहचान है तो आप उनका फ ोन करवा दो, आपका काम हो जाएगा। चंदन ने बताया कि जब उन्होंने आईसीयू में जाकर देखा तो वहां एक बेड व वेंटिलेटर खाली था। बाकायदा उसका फ ोटो खींचकर लेकर आए और डॉक्टर को दिखाया, लेकिन डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा। मरीज को खाली पड़े वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने के लिए 2 घंटे तक डॉक्टर से गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार तड़के करीब 4 बजे महिला मरीज ने दम तोड़ दिया।


इनको सूचना नहीं

बुधवार सुबह घटना होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं है। किसी ने अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना तक नहीं दी। मीडिया के माध्यम से अस्पताल अधीक्षक को सूचना मिली। अस्पताल अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना ने बताया कि इस मामले की उन्हें कोई सूचना नहीं है। आपसे मिली है। इसे दिखवाता हूं। किसी डॉक्टर ने नेता की सिफारिश पर बेड मिलने की बात कही है तो यह गलत है। बेड खाली था तो मरीज को मिलना चाहिए था, नहीं मिला। इसकी जांच कर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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