World blood donor day: सपरिवार जुटे जान बचाने में

World blood donor day: सपरिवार जुटे जान बचाने में

Shailendra Tiwari | Publish: Jun, 14 2018 12:01:48 PM (IST) Kota, Rajasthan, India

स्वैच्छिक रक्तदान में कोटा शहर प्रदेशभर में अव्वल है।

कोटा. स्वैच्छिक रक्तदान में कोटा शहर प्रदेशभर में अव्वल है। करीब 10 हजार से ज्यादा स्वैच्छिक रक्तदाता हैं, जो भागदौड़ भरी जिंदगी में भी दूसरों की जान बचाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। शहर से रक्तदान व रक्तदाताओं का पुराना नाता रहा है। वर्ष 1975 से पूर्व एमबीएस में बल्ड बैंक स्थापित हो चुका था और तभी से यहां रक्तदान का सिलसिला जारी है। व्यक्तिगत रक्तदान से हटकर पहली बार 1979 में एमबीएस कर्मचारी दुर्गेश मेहता ने आईटीआई कॉलेज में रक्तदान शिविर लगाया, जिसमें 17 लोगों ने रक्तदान किया था। आज विश्व रक्तदाता दिवस पर मिलते हैं ऐसे ही जांबाजों से।

 

 

World blood donor day

एसडीपी डोनेट कर एंजोय की शादी

बोरखेड़ा निवासी रेणु कौशिक 25 बार ब्लड डोनेशन और 4 बार एसडीपी डोनेट कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उनके भाई की शादी थी, लेकिन किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता थी, तो वह शादी के काम छोड़कर एसडीपी डोनेट करने गई और उसके बाद शादी को एंजोय किया। एसडीपी डोनेट करने से कमजोर नहीं आती।

World blood donor day

माता-पिता से मिली प्रेरणा
एमबीएस में संविदा कर्मचारी नयापुरा निवासी चंदू पांचाल बताते हैं कि पिताजी श्याम लाल पांचाल भी अस्पताल में कर्मचारी थे। वे और मां शांति देवी दोनों ही जरूरत पढऩे पर रक्तदान करते थे। पिता ने करीब 25 बार रक्तदान किया वहीं माता ने 40 बार रक्तदान किया। उनकी प्रेरणा से चंदू और उनका भाई भी 25 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनकी पत्नी ज्योति पांचाल भी नियमित रक्तदान करती हैं। इन्होंने एक संस्था बना रखी है, जिसमें युवाओं की टीम ने बीते डेंगू सीजन में 300 लोगों को एसडीपी उपलब्ध कराई थी।

World blood donor day

पूरा परिवार नेगेटिव डोनर
विज्ञान नगर निवासी आभा कौशिक खानपुर के पास अलोदा गांव में शिक्षिका हैं। वह अब तक 23 बार ब्लड डोनेशन और 3 बार एसडीपी डोनेट कर चुकी है। पति ओम शर्मा भी 50 से अधिक बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं। बेटा राहुल 18 वर्ष का हुआ और उसने भी पहली बार रक्तदान किया। ये पूरा परिवार ही नेगेटिव डोनर है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned