घर के आगे पशु के उपचार की सुविधा, फिर भी रुचि नहीं लेते पशुपालक

घर के आगे पशु के उपचार की सुविधा, फिर भी रुचि नहीं लेते पशुपालक

Kamlesh Kumar Meena | Publish: Oct, 14 2018 11:10:50 AM (IST) Kuchaman City, Rajasthan, India

पशुपालन विभाग की चल पशु चिकित्सा इकाई का मामला, कई बार बुलाना पड़ता है पशुपालकों को

कुचामनसिटी. सरकार की ओर से जनता को कितनी भी सुविधा दी जाए, लेकिन जब तक लोग इसको लेकर जागरूक नहीं होंगे। तब तक सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतरने में दिक्कत आती ही है। जी हां हम बात कर रहे हैं कुचामन पशुपालन विभाग की चल पशु चिकित्सा इकाई की। जो पशु चिकित्सा सुविधा से वंचित गांवों में जाकर पशुपालकों के पशुओं का उपचार कर रही है। लेकिन पशुपालकों के रुचि कम लेने से कई बार पशु चिकित्सा सहित अन्य सुविधा से वंचित रहे जाते हैं। जानकारी के अनुसार कुचामन चिकित्सालय की चल पशु चिकित्सा इकाई हर माह करीब 20 गांवों का दौरा करती है। इस दौरान पशुधन के उपचार की गांव में ही सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। यहां तक तो ठीक है लेकिन कई बार पशुपालक रुचि नहीं लेते या उन्हें गांव में मोबाइल यूनिट के आने की सूचना नहीं मिल पाती, जिससे वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। चल पशु चिकित्सा इकाई में एक पशु चिकित्सक, कम्पाउंडर समेत अन्य स्टाफ होता है। साथ ही चल इकाई में पशुओं की चिकित्सा से संबंधित पूरी सुविधा रहती है। पशुपालकों को सिर्फ दो रुपए के शुल्क में नि:शुल्क दवाओं का वितरण भी किया जाता है। एक माह में चल इकाई को 20 कैम्प लगाने पड़ते हैं। ऐसे में एक दिन में 100-150 पशुओं का उपचार एक दिन में हो जाता है। गौरतलब है कि चल इकाई उन्हीं क्षेत्रों में जाती है, जहां पशु चिकित्सा की सुविधा नहीं है। अब तक चल इकाई की ओर से सैंकड़ों पशुओं का उपचार किया जा चुका है। इधर, विभाग का कहना है कि उनकी ओर से किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाती। चल इकाई के गांव में पहुंचने के बाद एक स्थान निर्धारित कर दिया जाता है। उस स्थान पर जितने भी पशुपालक अपने पशुओं को लेकर आते हैं, उनका उपचार किया जाता है। साथ ही दवा भी नि:शुल्क दी जाती है।

एफएमडी का कार्य भी साथ में
चल इकाई में कार्यरत स्टाफ एफएमडी टीकाकरण (खुरपका-मुंहपका) का कार्य भी कर रहा है। अभी तक क्षेत्र के पलाड़ा, त्रिसिंगिया, हनुमानपुरा, सरगोठ, सीतापुरा, सीडियास आदि में मोबाइल यूनिट की ओर से एफएमडी टीकाकरण किया गया। साथ ही पशुपालकों को रोगों से बचाने के बारे में जागरूक भी किया।

इनका कहना है
चल चिकित्सा इकाई उन गांवों का दौरा करती है, जहां पशु चिकित्सा सुविधा का अभाव है। हर माह चल इकाई की ओर से २० कैम्प लगाए जाते हैं। इस दौरान पशुओं का उपचार कर उनके लिए नि:शुल्क दवाई भी दी जाती है।
- डॉ. मालचंद कुमावत, पशु चिकित्सक, चल चिकित्सा इकाई, कुचामनसिटी

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