कम बैड से चलाना पड़ रहा काम, रोगियों को कैसे मिले राहत

कम बैड से चलाना पड़ रहा काम, रोगियों को कैसे मिले राहत

Kamlesh Meena | Publish: Sep, 08 2018 04:03:42 PM (IST) Kuchaman City, Rajasthan, India

राजकीय चिकित्सालय में भवन विस्तार के लिए राशि स्वीकृत, लेकिन तीन माह बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य

कुचामनसिटी. राजकीय चिकित्सालय में भवन विस्तार के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद कम बैड से काम चलाना पड़ रहा है। ऐसा स्वीकृत भवनों का कार्य शुरू नहीं होने से हो रहा है। जानकारी के अनुसार करीब तीन माह पहले कुचामन चिकित्सालय के भवन विस्तार के लिए 2 करोड़ 81 लाख की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ। यदि राजकीय चिकित्सालय मेें नए भवन का निर्माण पूरा हो जाए तो इससे रोगियों को काफी राहत मिलेगी। चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार कुचामन चिकित्सालय में वर्तमान में 150 बैड स्वीकृत है, लेकिन भवन के अभाव में 100 बैड की सुविधा ही उपलब्ध हो पा रही है। यदि अस्पताल में भवन सुविधा का विस्तार हो जाए तो स्वीकृत बैड की पूरी सुविधा रोगियों को मिल पाएगी। हालांकि अभी भी कोई परेशानी नहीं आने दी जा रही है। मौसमी बीमारियों के दौरान अस्पताल के बैड फुल हो जाते हैं। ऐसे में मरीजों को बैड के नीचे लेटाना पड़ जाता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2016-17 के तहत कुचामन चिकित्सालय के भवन विस्तार के लिए वित्तीय स्वीकृति की गई है। भवन विस्तार के तहत अस्पताल में नए वार्ड सहित स्टाफ आवास, लैबर रूम निर्माण सहित विभिन्न कार्य किए जाएंगे। कार्य पूर्ण होने के बाद अस्पताल में 150 बैड की सुविधा मिलने लग जाएगी। इधर, इस संबंध में प्रमुख चिकित्साधिकारी आर.एस. रत्नू ने बताया कि चिकित्सालय में भवन विस्तार की आवश्यकता है। तीन माह पहले राशि भी स्वीकृत हुई है, लेकिन अभी कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है।

इधर, 15 अक्टूबर तक चलेगा टीकाकरण अभियान
कुचामनसिटी. पशुओं में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से बचाव के लिए पशुपालन विभाग की ओर से एक सितम्बर से वृहद् स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। टीकाकरण 15 अक्टूबर तक चलेगा। टीकाकरण के दौरान पशुपालकों को आवश्यक जानकारियां भी दी जा रही है। पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. रमाकांत सोनी ने बताया कि एफएमडी पशुओं का संक्रामक रोग है। इससे दुधारू पशुुओं के दूध में एकदम गिरावट आ जाती है। ऐसे ेमें रोगी पशुओं को प्रभावित क्षेत्र से बाहर न ले जाएं, रोगी पशु को अलग से रखे एवं उसके पानी की व्यवस्था भी अलग से करे, खुर व मुंह को लाल दवा या फिटकरी के घोल से सुबह-शाम धोएं। इसके अलावा घाव में कीड़े पडऩे पर एक भाग फिनाइल तथा चार भाग मीठे तेल को मिलाकर घाव पर लगाएं इससे पशुओं को रोग से बचाया जा सकता है।

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