जानिए मकराना रेलवे स्टेशन पर क्यों उमड़ते है हजारों लोग

जानिए मकराना रेलवे स्टेशन पर क्यों उमड़ते है हजारों लोग
Know why there are thousands of people at Makrana railway station

Hemant Kumar Joshi | Updated: 27 May 2019, 12:16:03 PM (IST) Kuchaman City, Nagaur, Rajasthan, India

हेमन्त जोशी. कुचामनसिटी/मकराना.

मकराना, इस शहर का नाम जुबां पर आते ही आंखों के सामने संगमरमर की चमक सी दिखती है। विश्व को ताजमहल जैसी सुंदरता देने वाले इस शहर की तस्वीर थोड़ी विपरीत है। सच तो यह है कि रेलवे स्टेशन इस शहर की एक बड़ी आबादी रात्रि आशियाना है। यह कहानी सरकार के कई दावों की पोल खोलने वाली है। जिसमें ना केवल मकराना प्रशासन की खामियां छिपी है वरन सरकार के दावों की भी पोल खुल रही है।

मार्बल नगरी मकराना का अनदेखा सच- शहर में नहीं कोई सार्वजनिक पार्क या विश्राम स्थली, रेलवे स्टेशन ही है अधिकांश लोगों का आशियाना


नीले गगन के तले धरती का प्यार पले, ऐसे ही जग में आते है सुबह ऐसे ही शाम ढले... बरसों पुराने इस गीत की यह पंक्तियां मकराना शहर की वर्तमान स्थिति को बखूबी बयां कर रही है। स्टेशन पर कहीं लेटे हुए तो कहीं पंचायत चौकड़ी लगाए बैठे हजारों लोग दिन भर मेहनत मजदूरी के बाद रात को रेलवे स्टेशन को ही अपना आशियाना मानते है। पत्रिका टीम जब रात के साढे 11 बजे मकराना रेलवे स्टेशन पहुंची तो वहां का नजारा कुछ अलग नजर आया। स्टेशन पर लोगों की भीड़ थी। ट्रेन में चढने वाले और उतरने वाले यात्रियों की संख्या सौ से अधिक नहीं है लेकिन भीड़ तो कुछ अलग ही कहानी बता रही थी। जब कुछ लोगों ने इसकी जानकारी जुटाई तो कुछ लोगों ने कहा कि यहां हमेशा ही इतनी भीड़ रहती है। इसके पीछे की सच्चाई जानने के लिए करीब एक दर्जन लोगों से बातचीत की गई। कुछ लोगों ने सच को छिपाने के लिए इसे महज मनोरंजन और हथाई के लिए लोगों का यहां रहना बताया लेकिन जब सच सामने आया तो कहानी कुछ अलग थी। जी हां, यह रेलवे स्टेशन केवल घूमने या हथाई करने वालों के लिए नहीं है, यहां कई लोग अपनी रात गुजारने आते है। रात 10 बजे से देर रात 2 से 3 बजे तक इस स्टेशन पर लोगों की भीड़ मिल जाएगी। इसके बाद कुछ देर सन्नाटा रहता है लेकिन 4 बजने के बाद फिर यहां सैर सपाटे वाले लोगों की भीड़ उमड़ती है।

कैसे बनी यह स्थिति

मकराना शहर की यह स्थिति पिछले कई बरसों से हैं। रेलवे के अधिकारी और पूरा शहर इसका सच जानता है। सरकार भले ही नहीं जाने लेकिन मकराना शहर की पुरानी बसावट और शहर का नवीनीकरण नहीं होना इसका मुख्य कारण है। यह शहर मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाला शहर हैं, जिनके छोटे छोटे घरों में परिवार बड़े हैं। दबी जुबान कुछ लोगों ने सच को जाहिर किया कि आदमी केवल चंद घंटों के लिए अपने घर में रहते है, जब 2 आदमी घर होते है परिवार के अन्य सदस्य रेलवे स्टेशन रहते है। ऐसे ही शिफ्टिंग का दौर चलता है। मुस्लिम समुदाय की अधिकांश आबादी आज भी एक ही इलाके के इन घरों में निवास करती है।

नहीं है कोई रात्रि विश्रामगृह या सार्वजनिक पार्क

मकराना शहर की आबादी भले ही एक लाख से अधिक है, नागौर जिले की दूसरी नगरपरिषद् भी मकराना है। इसके बावजूद पूरे शहर में कोई सार्वजनिक पार्क या सार्वजनिक रात्रि विश्रामगृह जैसी कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में पूरे शहर के लिए खुली जगह के रुप में केवल रेलवे स्टेशन ही है। जहां सैर सैपाटे वाले भी जाते है और रात गुजारने वाले भी। रेल यात्रियों को तो यहां बैठने की सुविधा तक नहीं मिलती।

हर मौसम खुशगवार

इस रेलवे स्टेशन पर हर मौसम में भीड़ का यही आलम रहता है। चाहे चिलचिलाती धूप हो या कड़ाके की ठण्ड, बारिश में भी लोग टस से मस नहीं होते है। कारण भी साफ है कि आखिर जाऐं कहां। सिर ढंकने के लिए रेलवे स्टेशन के शेड और फुटऑवरब्रिज की सीढियों के नीचे खाली जगह भर जाती है। रेल प्रशासन की ओर से भी यहां कोई प्लेटफार्म टिकट जैसी कोई सख्ती नहीं है। ऐसे में शहरवासियों के लिए रेलवे स्टेशन ही आशियाना बना हुआ है।

पार्षद और सभापति भी देते है हाजिरी

ऐसा नहीं है कि यहां साधारण परिवार और गरीब तबके के लोग ही पहुंच रहे हैं। नगरपरिषद् के सदस्य भी हथाई करने यहीं पर आते है। राजनीति की शुरुआत और अंत यहीं है। सभापति भी सप्ताह में एकाध रात यहीं पर हथाई करने पहुंचते है। आमजन की इस संख्या में रेलवे स्टेशन पर मौजूदगी रहती है कि यह स्टेशन हर समय आबाद नजर आता है।
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इनका कहना
हां काफी लोग रेलवे स्टेशन जाते हैं लेकिन हजारों में नहीं है। अधिकांश लोग घूमने के लिए जाते हैं तो वहां बैठ जाते है। पार्क के लिए तो कोई जगह ही नहीं है।
शोकतअली गौड़
सभापति, मकराना

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