सॉफ्टवेयर से चिकित्सकों पर निगरानी रखने की तैयारी

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का मामला

By: Kamlesh Kumar Meena

Updated: 15 Nov 2018, 11:03 AM IST

कुचामनसिटी. राजकीय चिकित्सालयों में कार्यरत चिकित्सकों की अब सॉफ्टवेयर से निगरानी करने की तैयारी की जा रही है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से जांचा जाएगा कि चिकित्सक ने कितने मरीजों को देखा साथ ही मरीजों को कौन-कौन सी दवाइयां लिखी। जी हां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द ही इस योजना को अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि शुरुआत में इसे मेडिकल कॉलेज से संबंधित चिकित्सालयों में ही लागू किया जाएगा। बाद में इसे जिला स्तरीय अस्पताल व इसके बाद उपखंड मुख्यालय स्थित चिकित्सालय में लागू किया जा सकता है। इसके तहत चिकित्सकों के कार्य को सॉफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी में लाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार चिकित्सकों के कामकाज, गतिविधियों पर नजर रखने में दिक्कत आती है। ऐसे में इस कार्य में सॉफ्टवेयर की मदद लेने की तैयारी है। जानकारों की मानें तो आरोग्य ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की तरह अब इंटीग्रेटेड हेल्थ मेनेजमेंट सिस्टम को लाया जाएगा। इसमें रोगी के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सहित चिकित्सकों व अन्य स्टाफ पर नजर रखी जाएगी। आउटडोर में चिकित्सक ने कितने मरीज देखे, इसका भी सॉफ्टवेयर से पता लग सकेगा। साथ ही कौन-कौन सी जांच करवाई गई आदि की जानकारी भी लग सकेगी। चिकित्सक ऑनलाइन स्टोर में उपलब्ध दवाइयों की स्थिति के आधार पर दवाई लिखेंगे। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आमतौर पर कई बार ऐसी दवा लिख देते हैं, जो चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में रोगी को बाहर से दवा खरीदकर लानी पड़ती है। इससे उसे अनावश्यक रूप से आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ पर मुख्यालय से भी नजर रखी जा सकेगी।

इनका कहना है
चिकित्सालयों में इंटीग्रेटेड हेल्थ मेनेजमेंट सिस्टम के बारे में सुना है। हालांकि इस सिस्टम को मेडिकल कॉलेज स्तरीय चिकित्सालयों में ही लागू करने की जानकारी है। संभवत: बाद में इसे जिला स्तरीय व अन्य चिकित्सालयों में लागू किया जाए। अभी इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
- डॉ. आर.एस. रत्नू, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय चिकित्सालय कुचामनसिटी

इधर, डाटा कनेक्टिविटी नहीं होने से अटकी पशुगणना, एक माह की हुई देरी
कुचामनसिटी. पशुपालन विभाग की ओर से किए जाने वाली पशुगणना डाटा कनेक्टिविटी नहीं होने से अटक गई। ऐसे में पशुगणना का कार्य समय पर शुरू नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री के डिजिटिल इंडिया इनेशिएटिव के तहत डिजिटल तकनीक का उपयोग कर पशुगणना का कार्य किया जाना था। पशुगणना में टेबलेट कम्प्यूटर का उपयोग भी किया जाना है। इससे पहले 20वीं पशुगणना के लिए सॉफ्टवेयर लांच किया गया, लेकिन सॉफ्टवेयर में समय में डाटा कनेक्टिविटी नहीं हो पाई। इसके पीछे कारण रहा कि कौनसी कंपनी की सिम से इंटरनेट शुरू किया जाए। विभाग के स्तर पर तय होने के बाद सोमवार को बीएसएनएल की सिम प्राप्त होने की बात कही गई और नागौर से सिम प्राप्त की गई। गौरतलब है कि एक अक्टूबर से पशुगणना का कार्य शुरू होना था, लेकिन गांवों के नाम की सूची ऑनलाइन अपडेट नहीं हो पाई। जनगणना कार्य में 60 ग्रामीण तथा 12 शहरी क्षेत्र में प्रगणक लगाए गए हैं। विभाग को करीब एक माह पहले ही टेबलेट कम्प्यूटर वितरित कर दिए गए थे। इसके बाद भी पशुगणना के कार्य में देरी हुई।

छोटे-बड़े सब की करनी है गणना
विभाग के कार्मिकों को छोटे-बड़े पशु समेत सभी की गणना करनी है। पिछली बार साढ़े चार लाख के करीब बड़े पशु गणना में शामिल हुए थे। इसके अलावा छोटे पशु भी बहुतायत में है। ऐसे में गणना के बाद ही पता लग सकेगा कि इस बार पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई या नहीं।

इनका कहना है
डाटा कनेक्टिविटी के अभाव में पशुगणना का कार्य शुरू नहीं हो पाया। नागौर से सिम प्राप्त हो गई। इसके बाद जल्द ही पशुगणना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहरी क्षेत्र में 12 तथा 60 ग्रामीण क्षेत्र में कार्मिक लगाए गए हैं।
- डॉ. विवेक, वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी, पशुपालन विभाग कुचामनसिटी

Kamlesh Kumar Meena Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned