शौचालय को तरस रहे ‘आंगन’

शौचालय को तरस रहे ‘आंगन’

Kamlesh Meena | Publish: Aug, 08 2018 12:04:40 PM (IST) Kuchaman City, Rajasthan, India

शाला पूर्व नामांकित बच्चों को कैसे मिले सुविधा, कुचामन परियोजना के आंगनबाड़ी केन्द्रों का मामला

कुचामनसिटी. एक ओर सरकार स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर-घर शौचालय का ढिंढोरा पीट रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकार के आंगनबाड़ी केन्द्र ही शोचालयविहीन है। ऐसे में शाला पूर्व नामांकित बच्चों को आवश्यक सुविधा से महरूम होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कुचामन ब्लॉक में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर शौचालय की सुविधा नहीं है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों की माने तो सरकार गांवों व शहरों को ओडीएफ घोषित कर चुकी है, लेकिन अपने महिला एवं बाल विकास विभाग के केन्द्रों पर ही शौचालय की सुविधा नहीं होना बड़ी बात है। यही नहीं केन्द्रों पर बिजली-पानी के लिए भी कोई बजट नहीं आता। ऐसे में अपने स्तर पर ही यह व्यवस्था जुटानी पड़ती है। इधर, महिला एवं बाल विकास विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पहले के भवनों में ही सिर्फ शौचालय की सुविधा कम है। जबकि नए बनने वाले भवनों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। विभाग के पास आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अपने केन्द्रों के लिए कई जगहों पर पक्के भवन नहीं है। कई केन्द्र जर्जर भवनों में चल रहे हैं, जो बारिश के समय टपकने लग जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जो आंगनबाड़ी केन्द्र राजकीय विद्यालयों के परिसर में चल रहे हैं। वहां तो जैसे शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो जाती है। अन्यथा अन्य केन्द्रों को इस सुविधा के लिए जूझना पड़ता है। वर्तमान में कई आंगनबाड़ी केन्द्र किराए के भवनों में भी संचालित हो रहे हैं, जहां शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि वर्तमान में कुचामन परियोजना के तहत 280 आंगनबाड़ी केन्द्र स्वीकृत है। इनमें से 57आंगबाड़ी केन्द्रों में विभागीय भवन बने हुए हैं, जिनमें 25-30 केन्द्रों के भवनों में शौचालय बना दिए गए हैं। अन्य में अभी तक यह सुविधा नहीं उपलब्ध नहीं हो पाई है। वहीं 140 आंगनबाड़ी केन्द्र स्कूलों के पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं।

बजट का टोटा, कैसे जुटे सुविधा
महिला एवं बाल विकास विभाग गांवों में आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन तो करता है, लेकिन विभाग को पर्याप्त सुविधाओं के लिए बजट नहीं मिलता। न शौचालय बनाने के लिए राशि मिलती है और न ही बिजली व पानी की सुविधा। हालांकि ग्राम पंचायत चाहे तो अपने बजट में से आंगनबाड़ी केन्द्र पर शौचालय बना सकती है, लेकिन ग्राम पंचायतों के बजट की कमी के कारण वे इस कार्य को हाथ में नहीं लेते। नतीजन आज भी कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में आवश्यक सुविधा नहीं मिलती।

केन्द्रीय व राज्य मद से ग्राम पंचायतें आंगबाड़ी केन्द्रों पर शौचालय का निर्माण कर सकती है। इसके अलावा राज्य सरकार को विभाग की ओर से प्रस्ताव भिजवाया जा सकता है। वंचित केन्द्रों पर शौचालय की सुविधा होनी ही चाहिए।
- लालाराम अणदा, सरपंच, ग्राम पंचायत शिव

इनका कहना है
जिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पक्के भवन बने हुए हैं। वहां अधिकतर में शौचालय बने हुए हैं। इसके अलावा स्कूलों में चलने वाले केन्द्रों पर भी शौचालय की सुविधा मिल ही जाती है।
- आनंद दायमा, एएओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, कुचामनसिटी

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