१ साल से बाधित है प्रदेश का सबसे बड़ा नमक कारोबार

हेमन्त जोशी.

कुचामनसिटी. प्रदेश का सबसे बड़ा नमक उद्योग भी ठप है। नमक की सबसे बड़ी मण्डी नावां एवं कुचामन में नमक उद्योग पिछले एक साल लगातार घाटे में चल रहा है और अब कोरोना की मार ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी है। खारड़ों में नमक तो तैयार हो रहा है लेकिन बिक्री और लदान बंद है।

गत वर्ष जून माह में हुई बारिश के बाद से लगातार नमक उद्योग पर संकट के बादल छाए हुए है। पहले बारिश ने नमक उत्पादन की कमर तोड़ दी और इसके बाद लगातार अलग-अलग कारणों से नमक के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है। पर्याप्त उत्पादन नहीं होने के चलते नमक उद्योग पर संकट के बादल अब घने हो रहे है। कहीं ऐसा ना हो की बाजार में नमक की कमी से कालाबाजारी बढ जाए।
अब तक इसका असर खुदरा बाजार पर भले ही ना आया हो, लेकिन प्रदेश की सबसे बड़ी नमक मण्डी में इन दिनों नमक १५० रुपए क्विंटल तक बिक चुका है जो पिछले दस सालों के सर्वाधिक भाव है।
खारे पानी की सांभर झील के तटवर्ती क्षेत्र से जुड़े सभी गांवों में शहरों में अब चटक धूप रहने से नमक का उत्पादन के अनुकूल मौसम बन चुका है, लेकिन कोरोना का असर से उत्पादन पर भी दिख रहा है। नमक उत्पादन में प्रदेश की सर्वाधिक साथ प्रदेश की सबसे बड़ी नमक मण्डी नावां और कुचामन के नमक औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों संकट गहराया हुआ है। चटक धूप के साथ ही दिन के समय गर्मी का असर बढने से नमक उत्पादन इकाईयों में नमक तो तैयार होने लगा है लेकिन लदान और आवाजाही नहीं होने से नमक क्यारियों में ही पड़ा है। महज कुछेक खारड़ों में ही नमक श्रमिक बचे हुए हैं जो नमक के ढेर लगा रहे है। पानी से लबालब क्यारियों में अब नमक की सफेदी दिखने लगी है।
पहली बार भावों में इतनी बढोतरी- गत वर्ष गर्मी के मौसम में भी बार-बार हुई बारिश से नमक का पर्याप्त स्टॉक नहीं हो सका और इसके बाद नवम्बर में उत्पादन शुरु होने ही वाला था कि सांभर झील क्षेत्र में पक्षियों की मौत के बाद नमक के उत्पादन पर रोक लगा दी गई। सांभर झील में पक्षियों की मौत के साथ ही अवैध नलकूपों व खारड़ों पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरु हो गई और इसी दौरान मालगाडिय़ों के लदान पर रोक लग गई। पर्याप्त उत्पादन नहीं होने से नमक के भाव १५० रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गए, जबकि पिछले कुछ वर्षों से नमक के भाव ६० रुपए से ८० रुपए क्विंटल तक रहे हैं। खास बात तो यह है कि १५० रुपए क्विंटल के भाव भी स्थिर बने हुए हैं, इन भावों में भी नमक उपलब्ध नहीं है।
श्रमिकों की रोजी रोटी से जुड़ा है उद्योग- जिले के नावां, कुचामन व डीडवाना में हजारों परिवार नमक आधारित उद्योगों पर काम काज कर अपना पेट पाल रहे थे। कोरोना के भय से अधिकांश नमक श्रमिक अपने अपने गांव चले गए, हालांकि अब भी सौ से अधिक श्रमिक परिवार नमक उत्पादन इकाइयों पर ही अपना डेरा डाले हुए है। नावां क्षेत्र में जहां मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों के नमक श्रमिकों अपना गुजारा चलाते है वहीं कुचामन व डीडवाना में भी बिहार एवं मध्यप्रदेश के आदिवासी श्रमिक हैं।
बीस लाख तक मीट्रिक टन का होता है उत्पादन- जिले के नावां, कुचामन व डीडवाना में सालाना औसतन करीब अठारह से बीस लाख मीट्रिक टन नमक का उत्पादन किया जाता है। जिसमें अकेले नावां में नमक को रिफाइंड करके खाने योग्य बनाकर दूसरे राज्यों में भिजवाया जाता है वहीं कुचामन व डीडवाना से अखाद्य नमक ही कट्टों में भरकर उद्योगों में काम लेने के लिए भिजवाया जाता है। हालांकि वर्ष २०१९-२० में नमक का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में आधा भी नहीं हुआ है। आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो करीब ५-७ लाख मीट्रिक टन का ही उत्पादन हो सका है।
गर्मी में ही होता है अधिक उत्पादन-
नमक का उत्पादन पूर्णतया मौसम पर आधारित है। वर्षा की मौसम में जहां नमक का उत्पादन पूर्णतया बंद हो जाता है वहीं सर्दी के मौसम में उत्पादन में कमी आ जाती है। गर्मी के मौसम में चटक धूप व गर्म हवाएं चलने से नमक का उत्पादन अधिक होता है। ऐसे में इस बार गर्मियों में कोरोना के असर के चलते भी नमक का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो सकेगा और रिफाइनरियां बंद होने से बाजार में नमक की किल्लत बढ सकती है।
हुई थी सैंकड़ों पक्षियों की मौत- गत वर्ष सांभर झील में आए पक्षियों में बोटूलिज्म बीमारी फैलने से हजारों पक्षियों की मौत हो गई थी और इसके बाद नमक पर रोक लगा दी गई। अब नमक पर रोक हटी तो कोरोना से उत्पादन पर संकट छाया हुआ है। रिफाइनरियां बंद पड़ी है और खारड़ों से नमक का लदान नहीं हो रहा है।

२५०० के करीब नमक उत्पादन इकाईयां है नावां क्षेत्र में
५ हजार नमक श्रमिक अब भी अटके है खारड़ों में
१८ -२० लाख मैट्रिक टन नमक का होता है सालाना उत्पादन
२५ से अधिक नमक रिफाइनरियां पड़ी है बंद
१५० रुपए प्रति क्विंटल तक बिक चुका है साधारण नमक

Hemant Joshi
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