त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी कुशीनगर लोक सभा सीट, 2014 में मोदी के भाषण ने पलट दी थी बाज़ी

  • कुशीनगर में चीनी मिल के नाम पर घूमता है सियासी पहिया।
  • कुशीनगर लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह।

अभिषेक श्रीवास्तव

बिहार, नेपाल सीमा से सटे कुशीनगर संसदीय सीट का सियासी पहिया चीनी मिल और बाढ़ के ईर्द-गिर्द घूमता है। कभी जंगल पार्टी के आतंक का शिकार रहा यह क्षेत्र आज विकास के इंतजार में है। 2014 में मतदान से ठीक दो दिन पहले जब प्रधानमंत्री मोदी ने पडरौना में सभा की तो उनका निशाना यूपीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे आरपीएन सिंह थे। मोदी ने तब पडरौना चीनी मिल का हवाला देते हुए कहा था कि यहां के सांसद की नाकामियों के कारण चीनी मिल बंद है और खामियाजा पूरे जिले के गन्ना किसान भुगत रहे हैं। मोदी का यही संबोधन टर्निंग प्वाइंट बना और भाजपा चुनाव जीत गई। लेकिन तब और अब के हालात में कोई खास अंतर नहीं आया। 2012 से बंद पड़ी चीनी मिल आजतक शुरू नहीं हो सकी, जिसकी नारागजी क्षेत्र में साफ देखने को मिलती है।

 

दरअसल, कुशीनगर के किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। यहां की एक मात्र पडरौना चीनी मिल के बंद हो जाने से गन्ना किसानों को दूसरे मिलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हर चुनाव में चीनी मिल बड़ा मुद्दा बनकर उभरता है। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण मिल पर पिछले सात सालों से ताला लगा हुआ है। अगर दूसरे मुद्दों की बात करें तो रोजगार के लिए पलायन बड़ी समस्या है। कुशीनगर के युवा दूसरे शहरों अथवा प्रदेशों में जाने के लिए मजबूर हैं। ऐसा नहीं कि जिले के अंदर संभावनाएं कम हैं। जब हम स्थानीय लोगों से बात करते हैं तो उनके अंदर विकास की ललक साफ दिखती है। कहते हैं भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली होने से क्षेत्र देश ही नहीं दुनिया के सैलानियों को अपनी ओर खींचता है। पर्यटन की दृष्टि से यहां काफी उर्वरा है।

 

शहर से बीस किलोमीटर दूर पावानगर में महावीर स्वामी से जुड़े स्थल भी हैं, लेकिन सरकारों ने अबतक पर्यटन हब बनाने के नाम पर सिर्फ घोषणाएं की। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए २००७ में शुरू हुई कवायद प्रदेश में दो बार सत्ता बदलने के साथ दम तोड़ गई। वर्तमान में काम पूरी तरह ठप पड़ा है। अगर वाकई योजनाओं को यहां अमली जामा पहनाया जाता तो स्थिति कुछ और होती। युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में ही काफी रोजगार मिल सकता था।

 

कांटे के मुकाबले का आसार

कुशीनगर सीट से भाजपा ने अपने सांसद राजेश पाण्डेय का टिकट काटकर पूर्व कांग्रेस नेता विजय दूबे को मैदान में उतारा है। दरअसल, विजय दूबे को 2017 विधानसभा चुनावों से पहले क्रास वोटिंग के चलते कांग्रेस ने बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली, लेकिन विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला और अब लोकसभा में उन्हें प्रत्याशी बना दिया गया। हालांकि विजय दूबे 2009 का चुनाव यहां से भाजपा के टिकट पर ही लड़े थे, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था और फिर उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी और विधायक बन गए। गठबंधन के तहत यह सीट सपा के खाते में आई है। सपा ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नथुनी प्रसाद कुशवाहा को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने अपने पुराने सिपहसलार आरपीएन सिंह को प्रत्याशी बनाया। क्षेत्र में चल रही चर्चा की माने तो यहां सभी प्रत्याशी मजबूती से लड़ रहे हैं। हालांकि भाजपा को यहां भितरघात की चिंता सता रही है तो कांग्रेस को गठबंधन के मजबूती से लडऩे की। राजनीतिक मतभेद को लेकर क्षेत्र आपस में बंट चुका है और लोग खुलकर यहां अपने प्रत्याशी का समर्थन करते दिखते हैं। पूर्वांचल में चंद सीट ही ऐसी हैं जहां मतदाता मुखर रूप से प्रत्याशियों के विरोध या पक्ष में बात करते हैं। ऐसे में असली फैसला गन्ना किसानों को करना है। उनका रुख जिधर जाएगा, वह चुनावी वैतरणी पार करेगा।

 

यूपी की उन सीटों में शामिल जहां कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी

कुशीनगर लोकसभा सीट इसलिए भी हॉट है, क्योंकि यूपी की यह उन सीटों में शामिल है, जहां २०१४ में कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी। साथ ही अहम यह कि आरपीएन अपने पिता पडरौना राजघराने के सीपीएन सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं। सीपीएन सिंह दो बार सांसद रहे और इंदिरा गांधी सरकार में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था। बाद में १९८९ में मतगणना वाले दिन सीपीएन सिंह की हत्या कर दी गई। इस चुनाव के बाद उनकी पत्नी मैदान में उतरीं, लेकिन हार गईं। २००९ के चुनाव में आरपीएन ने लोकसभा चुनाव जीता था। 2014 में भाजपा प्रत्याशी राजेश पाण्डेय को 3,70,051 मत मिले थे, जबकि पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह को 2,84,511 वोट। सपा प्रत्याशी राधेश्याम सिंह को 1,11,256व बसपा के डॉ. संग्राम मिश्रा को 1, 32,881 मतों पर संतोष करना पड़ा था।

 

इस बार मोदी के भाषण से लेकिन चीनी मिल ग़ायब

12 मई को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर में चुनावी रैली की, लेकिन इस बार क्षेत्र बदल दिया। पडरौना के बजाय कप्तानगंज में सभा की। उन्होंने किसानों का जिक्र तो किया, लेकिन चीनी मिल पर कुछ नहीं बोले। यह आश्वासन दिया कि पांच एकड़ रकबे की सीमा को समाप्त कर सभी किसानों को लाभ दिया जाएगा।

Narendra Modi
रफतउद्दीन फरीद
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