चंदौली एआरटीओ की गिरफ्तारी के बाद भी अवैध वसूली पर लगाम नहीं, वसूली को इस्तेमाल हो रहे प्राइवेट आदमी 

चंदौली एआरटीओ की गिरफ्तारी के बाद भी अवैध वसूली पर लगाम नहीं, वसूली को इस्तेमाल हो रहे प्राइवेट आदमी 
अवैध वसूली

Sarweshwari Mishra | Publish: Sep, 04 2017 09:28:28 AM (IST) | Updated: Sep, 04 2017 03:04:30 PM (IST) Kushinagar, Uttar Pradesh, India

कई ड्राईवरों का आरोप है कि प्रतिमाह इंट्री फीस के नाम पर 1500- 2000 रुपये देने के बाद एआरटीओ के प्राईवेट आदमी व सिपाही ट्रकों को रोक लेते हैं

कुशीनगर. चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी व उनके अकूत संपत्ति का खुलासा होने के बाद भी ट्रकों से अवैध वसूली पर लगाम नहीं लग पा रहा है। कुशीनगर जनपद से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर एआरटीओ की मौजूदगी में सरेआम ट्रकों से अवैध वसूली की जा रही है। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि अवैध वसूली के इस अवैध धंधे में ट्रक ड्राईवरों को धमकाने के लिए प्राईवेट आदमियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रक ड्राईवरों का आरोप है कि प्रति महीने इंट्री फीस के नाम पर 15 सौ से 2 हजार रुपये देने के बाद भी कुशीनगर जनपद में ट्रकों को मनमानी तरीके से उप संभागीय परिवहन विभाग के सिपाहियों द्वारा रोक लिया जाता है और 5 सौ से एक हजार रुपये वसूलने के बाद ही छोड़ा जाता है। इंडिया वॉयस  के पास कुछ एेसे वीडिओ मौजूद हैं जो एआरटीओ की मौजूदगी ट्रकों से अवैध वसूली के आरोपों की न केवल पुष्टि कर रहे हैं बल्कि पूरे खेल पर से पर्दा भी उठा रहें हैं।

 

 

 


राष्ट्रीय राजमार्ग 28 करीब 75 किमी. की लंबाई में कुशीनगर जनपद से होकर गुजरती हैकुशीनगर जनपद में एनएच 28 रामपुर  पंद्रह मील के पास से शुरू होकर सलेमगढ़ के करीब बिहार  प्रदेश में प्रवेश कर जाती है। असम, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा , झारखंड  व बिहार  से देश के अन्य हिस्सों में जाने और  उधर से इन प्रदेशों को आने वाले ट्रक कुशीनगर जनपद के हिस्से में मौजूद एनएच 28 के रास्ते ही जाते हैं। इसके चलते कुशीनगर जनपद एक बड़ी संख्या में ट्रकों का आवाजाही हमेशा बनी रहती है। एक अनुमान केकुशीनगर जनपद से होकर जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते प्रतिदिन 5-7 हजार ट्रकें आती-जाती हैं। ट्रक ड्राईवरों की मानी जाए चंदौली के पूर्व एआरटीओ की तर्ज पर कुशीनगर जनपद के उप संभागीय परिवहन अधिकारी के संरक्षण व मौजूदगी में ट्रक ड्राईवरों से रुपये की अवैध वसूली हो रही है लेकिन इसे कोई रोकने वाला नहीं है। अब्दुल वाहिद, बलजीत व रेशम सिंह जैसे कई ड्राईवरों का आरोप है कि प्रतिमाह इंट्री फीस के नाम पर 1500- 2000 रुपये देने के बाद एआरटीओ के प्राईवेट आदमी व सिपाही ट्रकों को रोक लेते हैं।  सबकुछ सही होने के बाद भी 5 सौ से 1 हजार रुपये वसूलने के बाद ही जाने देते हैं। यदि नामात्र की कोई गड़बड़ी जैसे गाड़ी पर दो ड्राईवर न होना, दिखाई दे गई तो वसूली की रकम एआरटीओ के गुर्गों व सिपाहियों की इच्छा पर निर्भर करती है।

 

 

 

इंडिया वॉयस ने ट्रक ड्राईवरों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों का सच जानने की कोशिश की तो अवैध वसूली के पूरे खेल की परत दर परत उघड़ती चली गई। अवैध वसूली के गेम को ठीक ढंग से समझने के लिए इन तीन दृश्यों पर गौर करना जरूरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर एआरटीओ प्रवर्तन की गाड़ी खड़ी है। "साहब "गाड़ी के अंदर बैठे हैं उप संभागीय परिवहन विभाग के सिपाही नीचे खड़े है। दूसरी लेन से आ रहे  ट्रक को एक आदमी हाथ देता है। ड्राईवर एआरटीए की गाड़ी खड़ी देख ट्रक रोक देता है हाथ देने वाला आदमी ट्रक ड्राईवर के पास पहुंचता है और "साहब" का हवाला देकर रुपये की मांग करता है।  ड्राईवर द्वारा रुपये देने से इंकार करने पर यह आदमी धमकाने लगता है।  बाद में पता चलता है कि ट्रक रोकने वाले आदमी का विभाग से कोई वास्ता नहीं है। यह " साहब "का खास प्राईवेट आदमी है जिसे अवैध वसूली व ट्रक ड्राईवरों को धमकाने के लिए "साहब" ने रखा है।

 

 

"साहब "के आदमी द्वारा धमकाने के बाद ड्राईवर ट्रक से उतर कर उप संभागीय विभाग के सिपाहियों के पास जाता है और कुछ रुपये देने की कोशिश करता है लेकिन रुपये कम होने के चलते सिपाही उसे भगा देते हैं। बहरहाल किसी तरह से रुपये की व्यवस्था कर ड्राईवर ट्रक के कागजात की फाईल सिपाहियों से लेने में सफल हो जाता है और फिर अपने मंजिल की ओर ट्रक बढा देता है। यह सब कुछ दिन दहाड़े उस राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर हुआ जिस पर आने -जाने वाले लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती है।

 

 

एक दूसरे ट्रक को एआरटीओ विभाग का सिपाही रोकता है।  सिपाही ट्रक के अंदर हाथ डालता है। फिर ट्रक ड्राईवर नीचे उतर आता है और सिपाही के साथ साहब की गाड़ी के पास चला जाता। गाड़ी के ओट में सेटिंग होने के बाद  ड्राईवर ट्रक लेकर चला जाता है।

 

 

 

     बतादें कि एआरटीओ की मौजूदगी में किस तरह बेखौफ होकर कुशीनगर जनपद में ट्रक ड्राईवरों से अवैध वसूली हो रही है और इन सरकारी मुलाजिमों को किसी का डर नहीं है। दरअसल अवैध वसूली का खेल इन 3 दृश्यों पर नहीं समाप्त नहीं होता है। सूत्रों के मुताबिक,  इस गोरखधंधे बडे- बडे लोग शामिल हैं। ऊपर तक पहुंच रखने वाले बड़े ट्रांसपोर्टरों व ऊंची रसूख रखने वालों के बोर्ड (ट्रेड नेम) पर भी यह खेल चलता है। ऊंची पकड़ वालों का बोर्ड ( ट्रेड नेम) देखते  ही एआरटीओ उन ट्रकों की तरफ से अपनी आंखें फेर लेते हैं। कारण यह कि उप संभागीय परिवहन अधिकारी व सिपाहियों यह पहले से मालूम होता है कि किस ट्रांस्पोर्टर व ट्रेड नेम की सेटिंग ऊपर तक है। सूत्र की मानी जाए तो अमूमन एआरटीओ व उनका दस्ता सुबह 6 बजे से लेकर 8 बजे रात के बीच में ही ट्रकों को चेक करते है।

 

 

 

जांच के नाम पर ट्रक ड्राईवरों से 5 से 7 लाख रुपये की अवैध वसूली प्रतिदिन की जाती है। अवैध वसूली की नब्ज को ठीक ढ़ग से पहचानने वाला एक सूत्र अपना नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर कुछ नाम लेते हुए बताता है कि कुशीनगर के उप संभागीय परिवहन विभाग तैनात इन सिपाहियों की ही संपत्ति की जांच कर दी जाए तो उनके पास आय से कही बहुत ज्यादा प्रापर्टी मिल जाएगी। बात यही तक नहीं रूकती है। अवैघ वसूली के चक्कर में दर्जनों ट्रकों को ओवर ब्रिज पर ही रोक दिया जाता है। इस बात की भी परवाह नहीं की जाती है कि ओवर ब्रिज पर लोड़ बढ़ने से बड़ा हादसा  भी हो सकता है। अवैध वसूली मे लगे सिपाहियों का नाम न उजागर हो इसके लिए वह नेम प्लेट तक नहीं लगाते है।


वीओ.- बहरहाल इन आरोपों पर अपना पक्ष रखने की बजाय एआरटीओ संबंधों की दुहाई देते हुए वर्जन देने से मना कर देते हैं और हाथ जोड़ते हुए चल देते हैं।

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