तो क्या आजमगढ़ के बाद अब कुशीनगर में भी विदेशी ताकतें गहरी जड़ें जमा चुकी हैं ?

यूपी में आजमगढ़ के बाद अब कुशीनगर में लगातार बढ़ते जा रहे हैं संदिग्ध आतंकी मामले।

अवधेश कुमार मल्ल
कुशीनगर. वैसे तो आईबी जैसी खुफिया एजेंसी कुशीनगर जनपद का स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल होने पर अपना शक करीब एक दशक पहले जाहिर कर चुकी है. परंतु सिविल व खुफिया पुलिस की नाकामी से कुशीनगर में इतनी जल्दी इतने आतंक के संदिग्ध मामले सामने आएंगे यह किसी को नहीं पता था। जिले के एक ट्रैवेल एजेंसी पर एटीएस की छापेमारी, दो वर्ष पहले कुशीनगर के मठिया गांव निवासी संदिग्ध आतंकी रिजवान की गिरफ्तारी के बाद लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे आतंकी संगठन की मदद करने के आरोप में मुशर्रफ की गिरफ्तारी ने सबको सकते में डाल दिया है। एक खाते-पीते घर से ताल्लुक रखने वाले सीधे-सादे युवक के आतंकी संगठनों से संपर्क रखने की बात सबको चौका रही है। लोग यह मानने लगे हैं कि कुशीनगर में आतंकी संगठनों की जड़े काफी गहरी हो चुकी है। ठाट-बाट की जिंदगी जीने की ललक में मुशर्रफ जैसे जिले के कई युवक उनके जाल में फंसा चुके होते हैं, जिन्हें मोहरा बनाकर आतंकी संगठन देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।


कुशीनगर जनपद मुख्यालय पडरौना नगर के हथिसार मोहल्ला निवासी मुसर्रफ उर्फ डब्ल्यू एक सीधा-साधा युवक माना जाता था। इसके पिता यूनुस पडरौना नगर के कन्हैया टाकीज के पास मेडिकल स्टोर चलाते थे। उदित नारायण पीजी कॉलेज, पडरौना से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईसीआईसीआई प्रू लाईफ इंश्योरेंस के लिए काम करने लगा। 2013 के बाद वह गोरखपुर चला गया और एक मोबाईल की दुकान में काम करने लगा। यही पर मुशर्रफ की मुलाकात मोबाइल के कारोबारी नईम से हुई और वह मुशर्रफ से निखिल राय बन गया। लस्कर-ए-तैय्यबा के संपर्क में मुसर्रफ कैसे आया यह तो अभी जांच का विषय है लेकिन निखिल राय बनने के बाद उसकी जिंदगी में चौकाने वाला बदलाव आ गया। वह लग्जरियस जिंदगी जीने लगा। वह अक्सर नयी गाड़ियां खरीदता रहता था। उसका विकास देख उसके साथी भौंचक्के हो जाते थे। बहरहाल, लश्कर-ए-तैय्यबा को फंडिंग करने के आरोप में मुशर्रफ के गिरफ्तार होने के बाद जिले के लोग भौचक्के हैं।

 

 

लोगों का मानना है कि विदेशी ताकते जिले में जड़ें जमा चुकी हैं और को फांसकर अपना उल्लू सीधा कर रहीं हैं। कुशीनगर बना विदेशी ताकतों का अड्डा, युवकों को बना रहे आतंकी कुशीनगर। वैसे तो आईबी जैसी खुफिया एजेंसी कुशीनगर जनपद का स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल होने पर अपना शक करीब एक दशक पहले जाहिर कर चुकी हैं। लेकिन सिविल व खुफिया पुलिस की नाकामी से कुशीनगर में पिछले कुछ सालों से लगातार आतंक के संदिग्ध मामले सामने आने से लोग हैरत में हैं। जिले के एक ट्रैवेल एजेंसी पर एटीएस की छापेमारी। दो वर्ष पहले कुशीनगर के मठिया गांव निवासी आतंकी रिजवान की गिरफ्तारी के बाद लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे आतंकी संगठन की मदद करने के आरोप में मुशर्रफ की गिरफ्तारी ने सबको सकते में डाल दिया है। एक खाते-पीते घर से ताल्लुक रखने वाले सीधे-साधे युवक का आतंकी संगठनों से संपर्क रखने की बात सबको चौका रही है। लोग यह मानने लगे हैं कि कुशीनगर में आतंकी संगठनों की जड़े काफी गहरी हो चुकी है। ठाट-बाट की जिंदगी जीने की ललक में मुशर्रफ जैसे जिले के कई युवक उनके जाल में फंसा चुके होगे हैं, जिन्हें मोहरा बनाकर आतंकी संगठन देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।


कुशीनगर जनपद मुख्यालय पडरौना नगर के हथिसार मोहल्ला निवासी मुशर्रफ उर्फ डब्ल्यू एक सीधा-साधा युवक माना जाता था। इसके पिता यूनुस पडरौना नगर के कन्हैया टाकीज के पास मेडिकल स्टोर चलाते थे। उदित नारायण पीजी कॉलेज, पडरौना से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईसीआईसीआई प्रू लाईफ इंश्योरेंस के लिए काम करने लगा। 2013 के बाद वह गोरखपुर चला गया और एक मोबाईल की दुकान में काम करने लगा। यही पर मुशर्रफ की मुलाकात मोबाइल के कारोबारी नईम से हुई और वह मुशर्रफ से निखिल राय बन गया। लस्कर -ए-तैय्यबा के संपर्क में मुशर्रफ कैसे आया यह तो अभी जांच का विषय है लेकिन निखिल राय बनने के बाद उसकी जिंदगी में चौकाने वाला बदलाव आ गया। वह ऐशो आराम की जिंदगी जीने लगा। वह अक्सर नयी गाड़ियां खरीदता रहता था। उसका विकास देख उसके साथी भौचक्के हो जाते थे। बहरहाल, लश्कर-ए-तैय्यबा को फंडिंग करने के आरोप में मुशर्रफ के गिरफ्तार होने के बाद जिले के लोग भौचक्के हैं। लोगों का मानना है कि विदेशी ताकतें जिले में जडें जमा चुकी हैं और युवकों को फांसकर अपना उल्लू सीधा कर रहीं हैं।

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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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