शिक्षामित्रों के आंदोलन के बाद कुशीनगर में पटरी से उतरी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था

शिक्षामित्रों के आंदोलन के बाद कुशीनगर में पटरी से उतरी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था
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आंदोलित शिक्षामित्रों के डर समय से पहले ही विद्यालय बंद कर रहे शिक्षक 

कुशीनगर.  शिक्षामित्रों  के बगावती तेवर ले जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों के ताले ही शुक्रवार को नहीं खुले जबकि कुछ विद्यालय भी कहने मात्र के लिए खुले थे। पढ़ाने की बात तो दूर स्कूल पर उपस्थित अध्यापक बच्चों को संभाल तक नहीं पा रहे थे और आंदोलित शिक्षामित्रों के डर समय से पहले ही विद्यालय बंद कर अध्यापक घर चले गए। एमडीएम का चुल्हा अधिकतर स्कूलों में ठंडा रहा।



बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने सहायक पद पर समायोजित शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द कर दिया है, हालांकि टेट क्वालीफाई कर सहायक अध्यापक बनने के लिए शीर्ष अदालत ने शिक्षामित्रों को दो मौका दिया है लेकिन शिक्षामित्र न्यायालय के फैसले ले संतुष्ट नहीं हैं। 25 जुलाई को शीर्ष अदालत का निर्णय आने के बाद शिक्षामित्र बगावती तेवर अपना लिए हैं। 


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कुशीनगर जिले में 2179 प्राथमिक विद्यालय हैं। इन प्राथमिक विद्यालयों पर  2484 शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पद समायोजित होने वाले अध्यापक तैनात हैं। 342 शिक्षामित्र समायोजन के इंतजार में थे, मंगलवार को न्यायालय का फैसला आने के बाद  बुधवार को मिक्षामित्र सड़कों पर उतर आए। जिला प्रशासन के अपील के बावजूद भी शिक्षामित्रों का तेवर ढीला नहीं हो रहा है. यही नहीं टोली बनाकर शिक्षामित्र खूले स्कुलों को भी बंद करा रहे हैं।


शिक्षामित्रों के बगावती तेवर का हश्र यह है तमकुहीराज  तहसील क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय  बसंतपुर, परिसवा  खड्डा तहसील क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय टेंगरहा, पनियहवा समेत जिले के तमाम प्राथमिक स्कूलों शुक्रवार को बंद रहे . एक अनुमान के मुताबिक करीब 10 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों के ताले ही शुक्रवार को नहीं खूले. प्रशासन के डर से जो स्कूल खूले भी उनका फाटक समय से काफी पहले ही बंद हो गया।



अकेले तमकुहीराज क्षेत्र में 31 विद्यालय पूरी तरह बंद रहे। जिला प्रशासन ऊपजे हालात से निपटने के लिए मंथन तो कर रहा है, लेकिन मिक्षामित्रों के उग्र तेवर के कारण प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है।  शुक्रवार को भी शिक्षामित्र अपने आंदोलन को और धार देने के लिए रणनीति बनाते रहे, शिक्षामित्रों के आक्रोश का डर इतना है कि बेसिक शिक्षा विभाग के दोनों फाटक बंद रहे और आने नालों को अपना नाम, पता लिखना पड़ रहा था। 
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