15 नवंबर को पुनः खुलेगा दुधवा नेशनल पार्क, ये हैं घूमने की दरें

दुर्लभ वन्य जीवों को करीब से देखने का रोमांच अनुभव करने की चाहत रखने वालों का इंतजार बस खत्म होने वाला है।

By: Mahendra Pratap

Updated: 12 Nov 2017, 09:11 PM IST

लखीमपुर खीरी. साल की घनी वादियों और उनके बीच उन्मुक्त विचरण करते दुर्लभ वन्य जीवों को करीब से देखने का रोमांच अनुभव करने की चाहत रखने वालों का इंतजार बस खत्म होने वाला है। यह इकलौता दुधवा टाइगर रिजर्व पांच माह की बंदी के बाद 15 नवंबर को पुनः खुलने जा रहा है। नए पर्यटन सत्र में दुधवा एक बार फिर से देश-विदेश के सैलानियों आैर वन्यजीव प्रेमियों के स्वागत के लिए लगभग तैयार हो चुका है। दुधवा का ये नवीन पर्यटन सत्र आगामी 15 जून तक चलेगा, जिसके लिए पार्क प्रशासन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

दुधवा टाइगर रिजर्व के डीडी महावीर कौजलगी ने बताया कि 15 नवंबर को नए पर्यटन सत्र का शुभारंभ परंपरा के अनुसार स्कूली बच्चों से कराया जाएगा। नए पर्यटन सत्र के ऑनलाइन बुकिंग काफी पहले शुरू हो चुकी थीं। शुरुआत के दो हफ्ते के लिए दुधवा की बुकिंग तकरीबन फुल हो चुकी है।

क्या खासियत है दुधवा टाइगर रिजर्व की

जिले के तराई इलाके में भारत-नेपाल सीमा से सटे साल के घने जंगलों को एक फरवरी 1977 को दुधवा नेशनल पार्क का दर्ज मिला था। इसके दस साल बाद वर्ष 1987-88 में भीरा क्षेत्र स्थित किशनपुर सेंचुरी को दुधवा नेशनल पार्क में मिलाकर इस संपूर्ण वन क्षेत्र को दुधवा टाइगर रिजर्व का नाम दिया गया। इसमें दुधवा नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 680 वर्ग किमी और किशनपुर सेंचुरी का क्षेत्रफल 203 वर्ग किमी है। कुल मिलाकर 883 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले टाइगर रिजर्व का खास आकर्षण बाघ हैं। यहां हाथियों की सवारी कर गैंडों को देखने का भी अलग मजा है।

पर्यटकों के लिए ये है आकर्षण

दुधवा टाइगर रिजर्व में स्व. बिली अर्जुन सिंह का टाइगर हैवेन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। इसके अलावा झादी ताल के आस पास का क्षेत्र भी पर्यटकों को खासा लुभाता है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां पर बारहसिंघा के झुंड के झुंड देखने को मिलते हैं। दुधवा में अमहा ताल के पास गैंडों को स्वच्छंद विचरण करते देखा जा सकता है। इसके अलावा दुधवा से करीब 25 किमी दूर भीरा के पास स्थित किशनपुर सेंचुरी भी बारहसिंघों और बाघों की अच्छी-खासी मौजूदगी को लेकर सैलानियाें को आकर्षित करती है।

रोमांचित करते हैं वनराज समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीव

दुधवा टाइगर रिजर्व वैसे तो बाघों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन यहां और भी कई दुर्लभ प्रजातियों के वन्यजीव है, जो सैलानियों को रोमांच की अनुभूति कराते हैं। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, भालू, गैंडा, हाथी और पांच प्रजातियों के हिरनों (बारहसिंघा, चीतल, पाढ़ा, सांभर व काकड़) समेत अन्य तमाम वन्यजीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

परिंदों की हैं 450 प्रजातियां

दुधवा टाइगर रिजर्व में पक्षियों की 450 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें 10 प्रजातियां विलुप्तप्राय हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनयम की अनुसूची एक में रखी गई हैं। पक्षी प्रेमियों के आकर्षण के केंद्र विलुप्तप्राय बंगाल फ्लोरिकन को देखने की हसरत भी दुधवा में पूरी होती है।

सरीसृपों का भी है कुनबा

दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मगरमच्छ व घड़ियाल बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा कछुओं की पाई जाने वाली सभी 15 प्रजातियां भी दुधवा के जलाशयों में मिलती हैं। इतना ही नहीं भारत वर्ष में सांपों की जो 270 प्रजातियां पाई जाती हैंं, उसमें से 15 प्रजाति के सर्प दुधवा में मिलते हैं।

ठहरने आैर सैर-सपाटे के ये हैं इतजाम

दुधवा के पर्यटन परिसर में सैलानियों के ठहरने के लिए 14 थारू हट बने हैं। इसके अलावा सोइियाना रेंज में चार हट, बनकटी रेंज के गेस्ट हाउस के चार सूट और किशनपुर सेंचुरी के दो सूट पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं। इनकी ऑनलाइन बुकिंग यूपी ईकोटूरिज्म की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.यूपीईको टूरिज्म.इन पर होती है। दुधवा के हट और गेस्ट हाउस अगर फुल हैं तो वहां से दस किमी दूर पलिया कस्बे में कई होटल हैं, जहां पर्यटक ठहर सकते हैं। दुधवा में घूमने के लिए वन निगम उप्र की ओर से दस टाटा जियान गाड़ियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा पार्क प्रशासन अपनी ओर से भी कुछ जिप्सी गाड़ियों का इंतजाम कर रहा है। दुधवा के डीडी महावीर कौजलगी ने बताया कि लोग अपनी निजी गाड़ियां जो बड़ी हों, वो भी जंगल में ले जा सकते हैं। इसके अलावा पांच पालतू हाथी पर्यटकों के घूमने के लिए दुधवा में हैं।

ये हैं दुधवा में ठहरने और घूमने की दरें

कॉटेज: 3000 रुपये (एक रात्रि, दो भारतीयों के लिए), 2000 रुपये (एक रात्रि, एक भारतीय के लिए), 4800 रुपये (एक रात्रि, दो विदेशियों के लिए), 3000 रुपये (एक रात्रि, एक विदेशी के लिए)

डॉरमेट्री : 10,000 रुपये (दस बेड की भारतीयों के लिए), 18500 रुपये (दस बेड की विदेशियों के लिए)
इंट्री फीस : 100 रुपये प्रति व्यक्ति, प्रति शिफ्ट।

सफारी रेट : 2000 प्रति गाड़ी (गाइड व वाहन इंट्री फीस शामिल)

घूमने का समय

-सर्दियों में सुबह सात से नौ बजे तक और शाम को तीन बजे से सूर्यास्त तक।

-गर्मियों में सुबह छह बजे से नौ बजे तक और शाम को तीन बजे से सूर्यास्त तक।

कैसे पहुंचे दुधवा

-लखनऊ से वाया सीतापुर, लखीमपुर, पलिया होते हुए दुधवा तक का 250 किमी का सड़क मार्ग।

-दिल्ली से वाया बरेली, शाहजहांपुर, मैलानी, बिजुआ, पलिया होते हुए दुधवा तक का 450 किमी का सड़क मार्ग।

-शाहजहांपुर से खुटार व मैलानी होते हुए दुधवा तक का 110 किमी का सड़क मार्ग।

Mahendra Pratap
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