यूपी में हर साल 15 हजार महिलाएं इस कारण से तोड़ दोती हैं दम

रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) द्वारा चिकित्सकों की ट्रेनिंग और कार्यस्थल पर मेंटरिंग से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन आया है

By: Karishma Lalwani

Updated: 19 Jan 2019, 03:44 PM IST

लखनऊ. रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) द्वारा चिकित्सकों की ट्रेनिंग और कार्यस्थल पर मेंटरिंग से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन आया है। इस सेंटर के पहले चरण में जुड़े चार मेडिकल कॉलेजों की पिछले एक साल की उपलब्धियों और दूसरे चरण में नए जुड़े चार मेडिकल कॉलेजों के ओरिएंटेशन और प्लानिंग के बारे में बताया गया। साथ ही इस ट्रेनिंग से उन गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले फायदे के बारे में बताया, जो प्रसव के दौरान दम तोड़ देती हैं।

 

TRAINING

इन अस्पतालों को दी गई ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई की सीनियर टीम लीडर एफआरयू स्ट्रेंथनिंग डॉ. सीमा टंडन ने बताया कि पहले चरण में प्रदेश के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कालेज-अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मोतीलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज और बाबा राघव दस मेडिकल कॉलेज के सहयोग से प्रदेश के 25 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों (एचपीडी) के 50 रेफरल यूनिट्स के चिकित्सकों को दी जा रही इस ट्रेनिंग का लाभ अब तक 200 चिकित्सकों को मिल चुका है।

वहीं दूसरे चरण की शुरुआत अक्टूबर 2018 में की गई, जिसमें गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज, सरोजनी नायडू मेडिकल कालेज, बनारस हिंदू विश्विद्यालय और उत्तर प्रदेश मेडिकल साइंस युनिवर्सिटी को जोड़ा गया है।

15 हजार महिलाएं प्रसव के दौरान दम तोड़ती हैं

उत्तर प्रदेश में करीब 15 हजार महिलाएं हर साल गर्भावस्था या प्रसव के दौरान दम तोड़ देती हैं। महिलाओं का जीवन बचाने के लिए इस तरह की ट्रेनिंग और अभ्यास बहुत ही जरुरी हैं। इसके लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) और कॉम्प्रेहेंसिव इमरजेंसी आवस्ट्रेस्टिक एंड न्यू बार्न केयर (CEMONC) सेवाओं को और मजबूत बनाने की जरुरत है क्योंकि गर्भावस्था, प्रसव या पोस्टपार्टम पीरियड के दौरान महिलाओं की जान को सबसे अधिक खतरा रहता है।

एनीमिक महिलाओं को फायदा

प्रसद के दौरान दम तोड़ने वाली महिलाओं की संखया में गिरावट लाने के लिए और गर्भवती के हीमोग्लोबीन में सुधार लाने के लिए आयरन शुक्रोज चढाने की शुरुआत की गयी है। इससे उन महिलाओं को फायदा मिला है, जो एनीमिया से पीड़ित हैं।कार्यक्रम में एनएचएम की महा प्रबंधक मातृ स्वास्थ्य डॉ. स्वप्ना दास, यूपी टीएसयू के प्रोग्राम डायरेक्टर जान एंथोनी, वरिष्ठ तकनीकी सलाह्कार आईहैट डॉ. रेनोल्ड के अलावा आरआरटीसी से जुड़े सभी आठ मेडिकल कालेजों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे।

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