गेंहू और गन्ने के भुगतान को लेकर किसान परेशान, सरकार के आदेश का भी नहीं कोई असर

गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं...

लखीमपुर खीरी. जिले का किसान सिर्फ गन्ने के भुकतान के संकट से नही बल्कि गेंहू के भुकतान के संकट से भी जूझ रहा है। यह हाल तब है। जब प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले और हाल ही में हुये। कैराना उपचुनाव में हारने के बाद किसानों दर्द मासूस करते हुये। किसानों के गेंहू और गन्ने के भुकतान को समय रहते भुकतान करने के निर्देश दिये है। तब भी किसान को सहकारी गेहूं क्रय केंद्र पर तूले गेहूं का भी भुगतान समय से किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

 

सरकार ने भुगतान के दिए हैं आदेश

यह आलम तब है, जब सरकार ने गेहूं खरीद को लेकर गेहूं क्रय केंद्रों से समय अनुसार भुगतान किए जाने को कहा है। लेकिन इसके बावजूद भी गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी की लापरवाही के चलते किसानों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। मामला पीसीएस गेहूं क्रय केंद्र लगदहन का है। जहां गेहूं क्रय केंद्र पर गेहूं तुले करीब एक माह से अधिक दिन का समय बीत चुका हैं। लेकिन किसानों के खाते में अभी तक एक भी ढेला नहीं पहुंचा है। ऐसे में किसान हर तरफ से भुगतान की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन किसानों को प्रताड़ित करने वाले ऐसे गेहूं क्रय केंद्रे प्रभारी पर प्रशासन की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

केंद्र प्रभारी के हौसले बुलंद

इसी वजह से गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। यह आलम इस वर्ष का नहीं है। पिछले वर्ष भी समय से भुगतान किसानों को नहीं पाया था। उच्चाधिकारियों को ऐसे लापरवाह केंद्र प्रभारी के खिलाफ कोई कार्यवाही करने चाहिये। जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं का भुगतान इतने दिन रुकना नहीं चाहिए। अब तक हो जाना चाहिए था। इससे दिखाया जाएगा। कि आखिर भुगतान क्यों नहीं हो सका। अगर प्रभारी की लापरवाही हुई तो कार्रवाई की जाएगी।


आढ़ती और केंद्र प्रभारी के चंगुल में फंसे किसान

सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर अब गेहूं खरीद कर लक्ष्य पूरा करने का जुगाड़ किया जा रहा है। भीरा में गल्ला मंडी में इस समय गेहूं का भाव 1500 से 1550 रुपये प्रति कुंतल ही मिल पा रहा है। व्यापारी किसानों से गेहूं खरीद कर करने के साथ ही उनके आधार कार्ड एवं इंतखाब को लेकर सरकारी खरीद केंद्रों जगदेव पुरवा, मड़ाईपुरवा आदि पर उसे डंप कर रहे हैं। और समर्थन मूल्य का लाभ खुद उठा रहे हैं। इसमें जहां किसानों का नुकसान को उठाना पड़ रहा है। वही केंद्र प्रभारी और आढ़ती चांदी काट रहे हैं।

 

किसानों को नहीं मिल रहा लाभ

बताया जाता है कि इस प्रक्रिया में अब तक 30 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है। ऐसी हालत में किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। और यह आढ़ती के चुंगल में फंस चुके हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख को ज्ञान सिंह, गया प्रसाद, अशोक दीक्षित रवि आदि का कहना है। कि सरकार द्वारा हर बार सरकारी खरीद केंद्रों पर केंद्र प्रभारी गोदाम पर उतरान ना होने की जानकारी लेकर किसान की खरीद करने से मना कर देते हैं। जिसके बाद में आढ़तियों के चंगुल में किसानों को फसना पढ़ना पड़ता है।

नितिन श्रीवास्तव
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