Lakhimpur Kheri Violence : अपनों की मौत के बाद टूट गई सारी आस, घरों में पसरा मातमी सन्नाटा

Lakhimpur Kheri Violence- लखीमपुर के तिकुनिया में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई। इनमें चार किसान, दो बीजेपी समर्थक, एक ड्राइवर और एक पत्रकार है। लखनऊ से लेकर बहराइच तक मृतक किसानों के घर पर मातमी सन्नाटा पसरा है। इनमें कोई घर का इकलौता चिराग था तो किसी को पढ़ने विदेश जाना था तो कोई बूढ़े मां-बाप का सहारा था। अब इन घरों से रोने की आवाज और सिसकियां सुनाई दे रही हैं।

लखीमपुर/बहराइच. Lakhimpur Kheri Violence- लखीमपुर हिंसा के बाद से तिकुनिया छावनी में तब्दील है। अब यहां सायरन की आवाज और बूटों की खटपट ही सुनाई देती है। देश भर में सियासी शोर मचा हुआ है, जिसमें उन आठ परिवारों की चीख दब सी गई है जिनके यहां मातमी सन्नाटा पसरा है। तिकुनिया बवाल में किसी के भाई, किसी के बेटे, किसी के पिता और किसी के पति की जान चली गई। इनमें कोई घर का इकलौता चिराग था तो किसी को पढ़ने विदेश जाना था तो कोई बूढ़े मां-बाप का सहारा था। अब इन घरों से रोने की आवाज और सिसकियां सुनाई दे रही हैं।

कनाडा पढ़ने जाना चाहता था लवप्रीत सिंह
लखीमपुर हिंसा में जान गंवाने वाले 19 साल के लवप्रीत सिंह की मौत के बाद उनके घर पर मातम पसरा है। घर का इकलौता चिराग बुझ जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। चौखड़ा फार्म मझगई धौरहरा लखीमपुर के निवासी लवप्रीत अपनी दोनों बहनों गगनदीप (17) और अमनदीन (15) का इकलौता भाई था। परिवार के बार गुजर-बसर के लिए तीन एकड़ जमीन है। उम्मीदें लवप्रीत पर टिकी थीं। रिश्तेदारों ने बताया कि इंटरमीडिएट के बाद लवप्रीत आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा जाना चाहता था। लेकिन, यह किसे पता था कि उसे अंतिम सफर पर निकलना पड़ेगा। तिकुनिया में बवाल के दौरान उसे गाड़ियों से कुचल दिया गया था। बेटे की मौत के बाद लवप्रीत की मां सतविंदर कौर और पिता सतनाम गुमसुम हैं। लवप्रीत की बहनों की ने कहा, उसे मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि भाई की मौत पर उसे इंसाफ चाहिए।

दलजीत सिंह : बेटे के सामने पिता की तड़पकर मौत
बहराइज के बंजारन टोला निवासी दलजीत की तिकुनिया हिंसा में दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त उनका बेटा राजदीप वहीं था। उसने बताया कि पीछे से आई तीन गाड़ियों ने पापा को रौंद दिया। वह चिल्ला रहे थे। लोग इधर-उधर भाग रहे थे। थोड़ी ही देर में पापा की मौत हो गई।

गुरविंदर सिंह : रिश्तेदारी में गये थे गुरविंदर
बहराइच जिले के निवासी गुरविंदर सिंह की तिकुनिया में मौत हो गई। मृतक के भाई ने बताया कि गुरविंदर रिश्तेदारी में गया था और वहीं बवाल में फंस गया। हेड इंजरी, नुकीले हथियार के घाव और घसीटे जाने से गंभीर चोटों की वजह से गुरविंदर की मौत हुई।

नछत्र सिंह : अधूरी रह गई बेटे को वर्दी में देखने की चाहत
धौरहरा लखीमपुर के किसान नछत्र सिंह की चाहत थी कि वह अपने बेटे को वर्दी में देखें। हाल ही में उनके छोटे बेटे मंदीप का एसएसबी में सिलेक्शन हुआ था, जो ट्रेनिंग के लिए अल्मोड़ा गया था। नछत्र के तीन बेटों में मंदीप सबसे छोटा था। घसीटने से आई चोटें उसकी मौत का कारण बनीं।

हरिओम : मानसिक रूप से बीमार हैं पिता
तिकुनिया में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के ड्राइवर हरिओम मिश्रा की डंडों से पीटकर बुरी तरह हत्या कर दी गई। हरिओम के पिता मानसिक रूप से बीमार हैं। हरिओम ही अपने पिता और दोनों बहनों माहेश्वर व माधुरी का ख्याल रखता था।

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शुभम : पिता ने मुंह देखे बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया
तिकुनिया में मृतक शुभम के शरीर पर चोटों के इतने निशान थे कि पिता विजय मिश्रा ने आखिरी बार बेटे का मुंह देखे बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया। वह रोते हुए बताते हैं कि शुभम बहुत होनहार था। वह दंगल देखने गया था। वह एक बेटी का पिता था।

श्याम सुंदर : दंगल देखने गये थे
30 साल के श्याम सुंदर निषाद दंगल देखने गये थे। तिकुनिया में हुए बवाल के दौरान भीड़ ने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। श्याम सुंदर की पत्नी रूबी ने बताया कि वह अपने पीछे चार साल की जयश्री और एक साल की अंशिका को छोड़ गये हैं।

रमन कश्यप : ब्रेन हैमरेज से मौत
बवाल में स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप की भी मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी, 07 साल का बेटा और 03 साल की बेटी है। मौत का कारण ब्रेन हैमरेज है। उन्हें बुरी तरह पीटा गया था। शरीर पर चोटों के निशान थे।

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Hariom Dwivedi
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