गरीबों के राशन में हर महीने हो रहा लगभग 1,16,74,000 करोड़ का घोटाला !

गरीबों के राशन में हर महीने हो रहा लगभग 1,16,74,000 करोड़ का घोटाला !

Mahendra Pratap | Publish: May, 18 2018 11:39:46 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

foodयहां तो हाल यह है कि गरीबों तक पहुंचने वाली राशन पर भी कोटेदारों की नियत खराब होती है।

लखीमपुर खीरी. सरकार द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद भी भ्रष्टाचार का अंत नहीं हो पा रहा है। यहां तो हाल यह है कि गरीबों तक पहुंचने वाली राशन पर भी कोटेदारों की नियत खराब होती है। जिसका जीता जागता उदाहरण जिले की सिर्फ एक तहसील में सामने आया है।

आंकड़े असलियत को झुठलाते नजर आ रहे

कहने को तो खाद विभाग का घोटाला सामने आने के बाद हुई शक्ति से गरीबों का राशन गरीबों तक पहुंचने लगा है। कई तरह के हथकंडे अपना कर सरकारों ने व्यवस्था में भ्रष्टाचार मुक्त होने का दावा भी किया था लेकिन आंकड़े असलियत को झुठलाते नजर आ रहे हैं। गौर करें तो पता चले कि अकेले धौरहरा तहसील से ही करीब सवा करोड़ का राशन हर महीने काला बाजारी में जाता है। इस बात को आकड़ों से साबित किया जा सकता है।

पीओएस मशीन लगी होने के बाद भी हो रही घपलेबाजी

अगर हम बात करे सिर्फ धौरहरा तहसील की तो इस तहसील क्षेत्र में 3 ब्लॉक को और एक नगर पंचायत शामिल है। इन 4 क्षेत्रों को मिलाकर कुल 83 386 राशन कार्ड बने हैं। इनमें 15490 अंत्योदय कार्ड धारक है और 67896 पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड धारक है। प्रति राशन कार्ड 2 से 10 यूनिट बने हैं। इन्हें यूनिट के आधार पर 5 किलो प्रति यूनिट गेहूं और चावल का वितरण करने का शासन निर्देश है। अब अगर 4 यूनिट प्रति राशन कार्ड के हिसाब से कुल यूनिट की संख्या निकालने तो तहसील क्षेत्र में तीन लाख 33 हजार 544 यूनिट होंगे। इन्हें कोटेदार खुलेआम 5 किलो के स्थान पर चार किलो राशन दे रहे हैं। इससे एक बात तो साफ है कि 1 किलो प्रति यूनिट के हिसाब से की गई। इस घपले बाजी में हर महीने तीन लाख 33 हजार 544 किलो गेंहू और इतना ही चावल कोटेदार तब दबा लेते है। जब हर दुकान पर पीओएस मशीन लगी है।

हर महीने ब्लैक में बिकती है एक करोड़ 16 लाख 74 हजार का राशन

तीन लाख 33 हजार 544 किलो राशन का हर महीने का यह प्रत्क्षय घोटाला है। अब इनकी बाजार में कीमत देखें। तो बाजार में सबसे सस्ता गेहूं 15 रुपये किलो है। इस हिसाब से घपला कर दबाए गए गेहूं की कीमत 50 लाख तीन गाजर 160 रुपए है। इसी तरह बाजार में सबसे सस्ता चावल 20 रुपए किलो बिकता है। इस मूल्य के आधार पर हर महीने कोटेदार 66लाख 70 हजार 880 रुपए का चावल कालाबाजारी से बेचता है। इन दोनों की कीमत को जोड़ने तो घोटाले की मूल धनराशि 1 करोड़ 16 लाख 74 हजार 40 रुपए है।

कोटेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

वहीं इस घोटाले के बारे में पूरे एसडीएम धौरहरा घनश्याम त्रिपाठी से पूंछा गया तो उन्होंने बताया कि किसी भी कोटेदार की कम वितरण करने या ओवर रेटिंग करने की शिकायत मिली। तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामले पाए जाने पर बहु निलंबित कर दी जाएगी। साथ ही कोटेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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