सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भड़के शिक्षामित्र

आक्रोशित शिक्षामित्रों ने स्थानीय बीएसए दफ्तर के प्रांगण में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन बीएसए को सौंपा है।

By: shatrughan gupta

Published: 26 Jul 2017, 09:39 PM IST

लखीमपुर-खीरी. मंगलवार को आये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को एकतरफा बताते हुए जिले के हजारों शिक्षामित्रों ने मौजूदा सरकार को घेरा है। फैसले से आक्रोशित शिक्षामित्रों ने स्थानीय बीएसए दफ्तर के प्रांगण में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन बीएसए को सौंपा है। बता दें कि सुबह दस बजे से शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन दोपहर करीब तीन बजे समाप्त किया जा सका। 


न्याय पालिका से यह उम्मीद नहीं थी
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद आक्रोशित समायोजित शिक्षक व शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर धरना दिया, जिसमें जनपद के समस्त शिक्षामित्रों ने भाग लिया। इस दौरान जनपद के कई दर्जन स्कूलों में तालाबंदी रही और मध्याह्न भोजन योजना व शिक्षण कार्य प्रभावित रहा। 

न्याय पालिका से यह उम्मीद नहीं थी
धरने को सम्बोधित करते हुए आदर्श शिक्षामित्र व समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश एकपक्षीय है जिसमें 172 लाख शिक्षकों के परिवारों को अर्श से फर्श पर ला दिया। न्याय पालिका से यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश व केन्द्र की सरकारें तत्काल निर्णय ले क्योंकि हम लोगों के पीड़ा अब सहने योग्य नहीं है। मिश्र ने कहा कि शुक्रवार को भूख हड़ताल की जायेगी। धरने को प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह, महामंत्री राजेश कुमार, राजकुमार गोस्वामी, मनोज पाण्डेय सहित कई लोगों ने सम्बोधित किया। 

धरना स्थल पर ही लिया ज्ञापन
मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन में मांग की गयी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द किये जाने से एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के सामने रोजी रोटी का संकटा पैदा हो गया है। अब जिंदगी मौत से बदतर नजर आ रही है। पीडि़त आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं इसलिए प्रदेश सरकार अध्यापक सेवा नियमावली में शीघ्र संशोधन कर सहायक अध्यापक पद वापस करें और समान कार्य समान वेतन तत्काल प्रभाव से लागू करे। बता दें कि प्रदर्शन के दौरान बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने धरना स्थल पर जाकर ज्ञापन रिसीव किया। इस सभा में प्रमुख रूप से राकेश द्विवेदी, सुधीर वर्मा, विनय वर्मा, परमानन्द मिश्रा, सौरभ प्रजापति, शैलेश श्रीवास्तव, संतोष मिश्रा, विकास अग्रवाल, बाबूराम यादव, सुनीता देवी, गीता देवी, गीता पाण्डेय, सच्चिदानन्द पाण्डेय, नंदकिशोर यादव, राजेश तिवारी, विकास सिंह, विनय वर्मा, अकील खां सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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