जहरीले पदार्थ मिले चावल खाने से दो बच्चों की इलाज दौरान मौत

थाना नीमगांव क्षेत्र में परिजनों ने कच्चे चावल में विषैला पदार्थ मिला कर रखा था, जिसके कारण कुछ बच्चों की मौत हो गयी।

By: Mahendra Pratap

Published: 09 Dec 2017, 03:57 PM IST

लखीमपुर खीरी. थाना नीमगांव क्षेत्र में परिजनों द्वारा कच्चे चावल में विषैला पदार्थ मिलाकर खेत मे रखा था। यह विषैला पदार्थ चावल में मिलाकर खेतों को नुकसान पहुँचने वाले जानवरो के लिये रखा गया था। इसे बच्चों ने खेल-खेल में खा लिया। इसके कुछ देर बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। इस पर परिजनों ने चारों बच्चो को अानन-फानन में बेहजम सीएचसी लेकर पहुँचे। जहाँ डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर देखते हुये जिला अस्पताल में भर्ती करने को कहा। यहाँ से दो बच्चों को डॉक्टरों ने लखनऊ में दिखाने को कहा। जहाँ दोनो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई थी। आज सुबह दोनो बच्चों की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार 2 बच्चों की मौत हो गई

जानकारी के ग्राम सिकटिया निवासी रामगुलाम की 4 वर्षीय पुत्री राधा जगन्नाथ के 3 वर्षीय पुत्र दिलीप,लक्ष्मीकांत की 6 वर्षीय पुत्री सोनी और रामसिंह की 4 वर्षीय नातिन मेनका पुत्री नंदकिशोर एक साथ राम गुलाब के घर के बाहर खेल रहे थे। खेलते-खलते खेतों की तरफ निकल गये। यहाँ जानवरों के लिये कच्चे चावल में विषैले पदार्थ मिले चावलों को बच्चों ने खा लिया। इसके कुछ देर बाद अचानक चारों बच्चों को उल्टियां होने लगी और बच्चे बेहोश होकर गिरने लगे। उस सभी लोग घर पर थे। तभी गांव के ही एक युवक ने परिजनों को इस घटना से अवगत कराया। इस पर परिजन खेतों की ओर भागे।

बच्चों की हालत देख सभी के हाथ-पांव फूल गये। परिजनों ने आनन- फानन में चारों बच्चों को बेहजम सीएचसी लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने चारों बच्चों की हालत को गंभीर हालत में देख जिला अस्पताल रेफर किया। इसमें जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दो बच्चो की हालत नाजुक होने के कारण लखनऊ रेफर कर दिया। जबकि दो बच्चों की हालत में सुधर होने के चलते उनका इलाज यहीं चल रहा है। उधर शनिवार की सुबह लखनऊ में इलाज के दौरान सोनी व मोनिका की मौत हो गई।

इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल रहा। वही बच्चों की इलाज के दौरान मौत की सूचना पाकर एसओ नीमगांव संजय सिंह मौके पर पहुँच गये।

काश बच्चे खेतन तले न पहुँते

इस घटना के बाद जहाँ गांव में मातम फैला हुआ था। वहीं मृतक बच्चों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। बार-बार खुद को कोसते और बोलते कि काश बच्चे खेतन तले न पहुँते।

Mahendra Pratap
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