सरकारी कम्बलों का काला सच आया सामने, नहीं हैं मानक अनुसार

यह है कम्बल वितरण योजना का काला सच, मानकों को ताक पर रखकर बांटे जा रहे हैं कम्बल.

By: Abhishek Gupta

Published: 21 Jan 2018, 08:43 PM IST

Lucknow, Uttar Pradesh, India

ललितपुर. प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों एवं असहाय लोगों को बढ़ती ठंड से बचाने के लिए जनपद में कंबल बांटने की योजना अमल में लाई गई थी। प्रदेश की महिला की मंशा थी कि कोई भी गरीब ठंड से मजबूर होकर नहीं मरना चाहिए, सभी गरीबों में कंबल वितरण होना चाहिए। मगर इस कंबल वितरण का काला सच जब सामने आया तो आंखे फटी की फटी रह गई। अधिकारियों ने बिना ई टेंडरिंग कराए अपने चहेते ठेकेदारों को वर्क आर्डर पर कंबल बत्रा का आदेश पारित कर दिया।

यह है कम्बल वितरण का मानक:-
कंबल वितरण योजना के अंतर्गत बटने वाले कम्बल का शासन के अनुसार मानक इस प्रकार है- कम्बल की लंबाई 235 सेमी, चौड़ाई 140 सेमी और वजन 2.20 किलो ग्राम का होना चाहिये एवं मानक के अनुसार 70 प्रतिशत ऊन होना चाहिए। मगर जिला प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा जो कंबल बांटे जा रहे हैं, वह इसके विपरीत हैं। ना तो उनकी लंबाई चौड़ाई बराबर है और ना ही उनकी मात्रा मानकों के अनुसार है। बांटे जा रहे कंबल गरीबों को ठंड से बचाने में मददगार साबित नहीं हो रहे हैं। उपर्युक्त मानक के अनुसार लोगों को कम्बल आवंटन के लिए योगी सरकार ने साफ तौर पर निर्देश दिए थे कि ई टेंडरिंग के माध्यम से ही किसी भी सामान की सरकारी सप्लाई की जाएगी, लेकिन ललितपुर जनपद में ऐसा नहीं किया गया।

आधिकारियों ने केवल आकस्मिक परिस्थितियों का हवाला दिया। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर ने बताया कि ऐसी परिस्थिति में भी टेंडरिंग ना कराकर कुटेशन के आधार पर ही सप्लाई ले ली जाती है। इस प्रकार सप्लाई फैजाबाद की एक कम्पनी बिना प्रतिस्पर्धा के ही उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कॉपरेटिव एसोसिएशन लिमिटेड को ठेका दे दिया गया। पहली आपूर्ति लगभग 25 लाख रुपए की दे दी गई। सप्लाई किए गए कम्बलों की गुणवत्ता ठीक नहीं दिखाई दी।
ग्रामीण लाभार्थियों ने भी बताया कि बाटे गये कम्बलों में ठंड बिल्कुल नहीं। बचती कम्बलों पर लेबिल भी काम चलाऊ लगाया गया है, जिस पर कोई मानक अंकित नहीं है। कितने प्रतिशत ऊन हैं, इसकी जाँच भी नहीं करायी गई। अपने स्तर से ही मानक तय हो गया। इसका मतलब है कि प्रशासन द्वारा गरीबों का मजाक उड़ाया गया है।

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