जिला मुख्यालय के वीआईपी चौराहे पर आयोजित किया गया मेला, मेले में प्रबन्धन समिति द्वारा जमकर खिलाया जा रहा है जुआ

Akanksha Singh

Publish: Feb, 15 2018 10:47:25 AM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India

ललितपुर. किसी धार्मिक ग्रंथ में लिखा है कि "समरथ को नहीं दोष गुसाईं" कहने का तात्पर्य यह है कि जो हर तरीके से हर स्थिति में सक्षम है उसको किसी तरह का कोई दोष नहीं लगता चाहे वह गलत काम करें या सही काम उसका हर काम सही ही माना जाता है । ऐसा ही एक मामला शहर के वीआईपी चौराहे पर तुवन मंदिर के प्रांगण में सामने आया है। जहां हस्तशिल्प मेले की आड़ में मेला प्रबंधन समिति द्वारा जमकर खुलेआम जुआ खिलाया जा रहा है ।


यह है पूरा मामला

अभी कुछ दिनों पहले शहर मैं हस्तशिल्प मेले का आयोजन किया गया जिसकी अनुमति जिला प्रशासन द्वारा मेला प्रबंधन समिति को दी गई है। यह हस्तशिल्प मेला शहर के वीआईपी चौराहे पर तुवन मंदिर प्रांगण मैं आयोजित किया गया है जिसे हस्तशिल्प मेले का नाम दिया गया था और बाद में इसका नाम बदलकर ललितपुर महोत्सव कर दिया गया। इस मेले का शुभारंभ जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह के द्वारा कराया गया था जिसमें जनपद के आला पुलिस अधिकारी भी शामिल थे मगर किसी भी अधिकारी की निगाह मेले में सजाई गई जुए की दुकान पर नहीं पड़ी जबकि उद्घाटन से लेकर आज तक लगभग 1 सप्ताह में सभी जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी इस मेले में घूमकर आए हैं। पुलिस प्रशासन का तो यह हाल है कि कहीं पता चल जाए कि जुआ चल रहा है भले ही कुछ व्यक्ति एक साथ बैठकर टाइमपास के लिए ताश खेल रहे हो मगर पुलिस उन्हे पकड़ कर जेल में बंद कर देती है । मगर हद तो तब हो गई जब सदर कोतवाली के सामने आयोजित इस मेले में धड़ल्ले से जुआ खिलाया जा रहा है और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी खामोश बैठे हुए हैं वहीं जिला प्रशासन की तरफ से इस जुए को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की गई । इस जुए की दुकान से मेले में आए हुए दर्शकों से जमकर पैसा लूटा जा रहा है उनको इनाम जीतने की लालच देकर उनकी जेब पर डाका डाला जा रहा है जिस पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन खामोश बना हुआ है ।


आज से इसी प्रांगण में सुरु हो रहा है देवगढ़ महोत्सव

जिस प्रांगण में हस्तशिल्प मेला चल रहा है उसी प्रांगण में आज देवगढ़ महोत्सव का भी शुभारंभ जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह करेंगे । यह महोत्सव भी 1 सप्ताह चलेगा और इस महोत्सव को देखने के लिए जो भी दर्शकों आएंगे उनकी जेब पर पर डाका यही जुआघर डालेगा । ऐसे में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर उंगली उठना लाजमी है या फिर यूं कहें कि "जब सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का"।


इनका कहना है

इस मामले में जब जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह से एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बात की गई तो उन्होंने इस मामले की जांच कराने की बात कही। अब इस मामले में देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन इसकी वास्तविक जांच कराएगा या फिर यह मामला ऐसे ही जाने दिया जाएगा और अगर जांच में जुआघर सही पाया जाता है तो क्या प्रशासन द्वारा उसे बंद कराकर मेला प्रबंधन पर उचित कार्यवाही की जाएगी।

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