कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ेगी यह पार्टी, कार्यक्रम में किया बड़ा ऐलान

जन अधिकार पार्टी के उम्मीदवार शिवचरण कुशवाहा ने बुंदेलखंड राज्य निर्माण कराने का दावा किया है

By: Karishma Lalwani

Updated: 29 Mar 2019, 01:01 PM IST

ललितपुर. जन अधिकार पार्टी के उम्मीदवार शिवचरण कुशवाहा ने बुंदेलखंड राज्य निर्माण कराने का दावा किया है। शिवचरण कुशवाहा ने अपनी प्राथमिकता बुंदेलखंड राज्य निर्माण को शामिल किया है और कहा है कि अगर हमारी सरकार बनती है, तो सर्वप्रथम हम बुंदेलखंड राज्य का निर्माण कराएंगे। यह बातें कुशवाहा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं। कार्यक्रम में उनके साथ कांग्रेस के पूर्व सासंद ग्रामीण राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य भी मौजूद रहे।

शिवचरण कुशवाहा एनएचआरएम घोटाले के आरोपी कद्दावर नेता बाबू सिंह कुशवाहा के भाई हैं। वहीं प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि प्रदेश की 2 सीटों पर गठबंधन पार्टी कांग्रेस के ही सिंबल पर चुनाव लड़ेगी, जिसमें से एक सीट ललितपुर झांसी लोकसभा की है।

विकास से कोसों दूर है गांव

ललितपुर झांसी लोकसभा सीट पर 2014 में भारतीय जनता पार्टी से उमा भारती को जनता ने सिंहासन पर बैठाया था। 2009 में कांग्रेसी प्रदीप जैन आदित्य को संसद भेजा था। 2004 में सपा से चंद्रपाल यादव जीते थे। उमा भारती द्वारा गोद लिया गांव पवा आज भी विकास से कोसों दूर है। 2014 का चुनाव जीतने से पहले उन्होंने बुंदेलखंड राज्य निर्माण कराने की बात कही थी लेकिन यह वादा घरा का धरा रह गया।

कांग्रेस ने छोटे दलों से गठबंधन के कारण झांसी-ललितपुर सीट जन अधिकार मंच के लिए छोड़ दी है। बाबू सिंह कुशवाहा ने अपने भाई शिवचरण कुशवाहा को गठबंधन पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया जिन्होंने बुंदेलखंड राज्य निर्माण का दांव खेला है। वहीं प्रदीप जैन आदित्य ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी पार्टी के लिए काम करेंगे हमें कोई मलाल नहीं है। भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सांसद केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अब चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है। ऐसे में ललितपुर झांसी लोकसभा सीट पर चुनावी अटकलें तेज हो गई है।

कुशवाहा समाज हो सकती है निर्णायक भूमिका में

ललितपुर झांसी लोकसभा सीट पर कुशवाहा समाज से सबसे अधिक मतदाता हैं। इसलिए ललितपुर जनपद में कुशवाहा समाज निर्णायक वोटों के रूप में जानी जाती है। मगर अब यह वोट भी बंट चुके हैं। कुछ कुशवाहा समाज का वोट बैंक बीएसपी की तरफ है तो कुछ सदर विधायक रामरतन कुशवाहा की वजह से बीजेपी की तरफ हैं। अब कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कदावर नेता बाबू सिंह के भाई शिवशरण कुशवाहा के आने से कुशवाहा समाज का गणित बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

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