बीमार कैदी की मौत होने से परिजनों में हंगामा, मामले के उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

बीमार कैदी की मौत होने से परिजनों में हंगामा, मामले के उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

Akansha Singh | Publish: Sep, 10 2018 11:36:46 AM (IST) | Updated: Sep, 10 2018 12:33:42 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

बड़ापुरा निवासी शमशाद पुत्र सुल्तान नाम का युवक 15 मोटरसाइकिलों की चोरी के आरोप में जिला जेल भेजा गया था।

ललितपुर. शहर कोतवाली के पॉश इलाके जेल चौराहे पर उस समय हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई जब पास में रहने वाले मोहल्ला बड़ापुरा के लोगों ने सड़क जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी । माजरा क्या है किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था बस भीड़ दिखाई दे रही थी और नारेबाजी सुनाई दे रही थी । मामला चुकी रात का है इसलिए अंधेरे में मामला समझना कुछ पेचीदा नजर आ रहा था । थोड़ी ही देर बाद सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर आ गया और प्रदर्शन कर रही भीड़ को तितर-बितर करने का काम करने लगा ।


प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहल्ला बड़ापुरा निवासी शमशाद पुत्र सुल्तान नाम का युवक 15 मोटरसाइकिलों की चोरी के आरोप में जिला जेल भेजा गया था जिसकी रास्ते में मौत हो गई। जिला जेल में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई जेल प्रशासन द्वारा उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसका ब्लड प्रेशर लो है एवं शुगर हाई है । हालत गंभीर होने पर उसे झाँसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया । परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत रास्ते में ही हो गई फिर भी उसे मेडिकल कॉलेज तक क्यों भेजा गया एवं उसका वहां पोस्टमार्टम कराया गया । परिजनों का आरोप है कि मोटरसाइकिल चोरी के केस में झूठा फंसाया गया था जिस के संबंध में हमने जिला मुख्यालय से लेकर मुख्यमंत्री तक कागजी कार्रवाई की मगर हमें कहीं न्याय नहीं मिला । मृतक के भाई अरमान ने आरोप लगाया कि एसओजी टीम में रहे पुलिस कर्मी श्याम सुंदर यादव मनोज अहिरवार के साथ सदर कोतवाल ए के सिंह ने मिलकर मेरे भाई को मोटरसाइकिल की चोरी में झूठा फंसाया था और उसके बाद मुझसे पैसों की मांग की गई । जेल प्रशासन ने भी कई बार हमसे पैसों की मांग की जिसे हमने कर्ज पर लेकर पूरा किया और उसके बाद तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 4000 रुपये लिए गए उसके बाबजूद उसकी सही देखभाल नहीं की गई एवं इलाज के लिए झाँसी रेफर करने में भी देर की गई । परिजनों की मांग थी कि तत्काल उन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाय जिन्होंने ने शमशाद को झूठे आरोप में जेल भेजा था । एवं उसके छोटे-छोटे बच्चों के लिए मुआवजा भी दिया जाए जिससे उनका पालन पोषण हो सके । हालांकि मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार विजेता के साथ सदर एसडीएम घनश्याम दास वर्मा भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और उन्होंने स्थिति को संभाला तथा एसडीएम व एएसपी ने परिजनों को समझाबुझा कर कार्रवाई का भरोसा दिया तब जाकर कहीं मामला शांत हुआ ।

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