घर से निकलते हैं तो लोग समझते हैं मजदूर, लेकिन जब पता चलता है तो करते हैं सैल्यूट

Hariom Dwivedi

Publish: Sep, 12 2018 07:49:14 PM (IST)

Lalitpur, Uttar Pradesh, India

ललितपुर. अरे साहब! यह कोई मजदूर नहीं बल्कि राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता एक रिटायर्ड अध्यापक रूपनारायण निरंजन हैं। इनकी उम्र भले ही 78 वर्ष है, लेकिन इनमें आज भी नौजवानों जैसा हौसलवा और जुनून है। लोगों की सेवा करना, सड़कों को साफ करना और लोगों की सेवा करना ही उनकी दिनचर्या बन गई है। वे सुबह 4.30 उठकर फावड़ा-झाड़ू लेकर घर से निकलते हैं और रोजाना करीब 5 घंटे शहर की साफ-सफाई करते हैं। इनके पास वैद्य की डिग्री है, इसलिए वे मुफ्त में लोगों का इलाज करते हैं।

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