सामने आया बड़ा घोटाला, बालू की जगह लगाई जा रही है क्रेसर अनुपयोगी की डस्ट

बालू की जगह क्रेसर से निकली अनुपयोगी डस्ट को बालू की स्थान पर प्रयोग कर शासन द्वारा आवंटित धनराशि का जमकर बन्दर बाट किया जा रहा है।

By: आकांक्षा सिंह

Published: 24 May 2018, 12:37 PM IST

ललितपुर. शासन की खनन नीति की आड़ लेकर और बालू की अनुपलब्धता का बहाना बनाकर इन दिनों लोक निर्माण विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से बालू की जगह क्रेसर से निकली अनुपयोगी डस्ट को बालू की स्थान पर प्रयोग कर शासन द्वारा आवंटित धनराशि का जमकर बन्दर बाट किया जा रहा है।

डस्ट और बालू की गुणवत्ता में बहुत अन्तर है। यदि ऐसा नहीं होता तो शासन ही डस्ट को मान्यता दे देता और निर्माण में डस्ट के उपयोग की खुली छूट दे देता पर मगर ऐसा नहीं है। आज भी लोक निर्माण विभाग में कार्य के लिये बजट आवंटित में बालू का ही बजट दिया जाता हैं जो डस्ट के बजट से कई गुना अधिक है। कार्य के स्टीमेट में बालू का बजट और निर्माण में क्रेसर से निकली डस्ट का प्रयोग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है और उस पर प्रमाणिकता की मुहर अधिषाशी अभियंंता रामसूरत द्वारा डस्ट की वकालत करते हुये मामले जस्टीफाई करना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत नहीं तो और क्या कहा जायेगा ।


ताजा मामला एक सड़क निर्माण के दौरान पुलिया निर्माण का है । यह निर्माण कार्य ग्राम गुरयाना के पास हो रहा है । प्राप्त जानकारी के अनुसार जामनीबांध से नाराहट सडक मरम्मत के बाद निर्मित हो रही पुलियों का है जहां बालू की जगह मात्र क्रेसर की डस्ट का प्रयोग किया जा रहा है जिससे बन रही पुलियों की गुणवत्ता और स्टेविलटी पर सवालिया लगना स्वभावक है।


कार्य करने वाले मजदूरों ने मसाला प्योर डस्टमें बनाने और साइड पर मात्र डस्ट के का भंडारण ही मिलना यह सावित करने के लिये ही काफी है कि पूरा निर्माण कार्य डस्ट में चल रहा है। इस मामले में पुलिया पर काम कर रहे मजदूर शंकर ने बताया कि पुलिया निर्माण में सीमेंट के साथ डस्ट भी मिलाई जा रही है दूसरे मजदूर सुखलाल ने भी इस बात की पुष्टि की है ।

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आकांक्षा सिंह
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